breaking news New

कमला कॉलेज समकालीन शिक्षा और बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के बीच चुनौतीपूर्ण राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

कमला कॉलेज समकालीन शिक्षा और बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के बीच चुनौतीपूर्ण राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

राजनांदगांव। शासकीय कमलादेवी राठी स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, राजनांदगांव में 20 दिसंबर 2021 को भूगोल विभाग एवं अंग्रेजी विभाग के तत्वाधान में समकालीन शिक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकारों के बीच चुनौती पूर्ण संबंध विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन प्रो. एडीएन बाजपेई, वाइस चांसलर, अटल बिहारी बाजपेई विश्व विद्यालय, बिलासपुर के आतिथ्य में संपन्न हुआ। डॉ. निवेदिता ए. लाल के द्वारा मुख्य अतिथि एवं विषय विशेषज्ञों तथा बेबीनार में उपस्थित प्रबुद्धजनों का स्वागत किया। 

संस्था की प्राचार्य डॉ. सुमन सिंह बघेल ने कहा कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार रचनाकारों और अविष्कारकों के आर्थिक और नैतिक अधिकार को उनकी कृतियों और अविष्कारों के मामलें में वैधानिक अभिव्यक्ति प्रदान करते है। आईपीआर एक सीमित अवधि के लिए प्रदान किए जाते है तथा इस अवधि के दौरान अन्य लोगों को उन उत्पादों के अनाधिकृत प्रयोग से रोकते है।

वेबीनार की संयोजक डॉ. एचके गरचा ने बेबीनार के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानवीय बौद्धिक सृजनशीलता को प्रोत्साहन देना है। बौद्धिक संपदा अधिकारों का क्षेत्र व्यापक होने के कारण यह समझा गया कि क्षेत्र विशेष के लिए उसके संगत अधिकारों एवं संबंद्ध नियमों आदि की व्यवस्था की जाए तथा उन्होंने मुख्य अतिथि व विषय विशेषज्ञ सुयश पांडे का परिचय भी दिया। 

मुख्य अतिथि प्रो. एडीएन बाजपेई द्वारा कहा गया कि जिस प्रकार कोई भौतिकधन (फिजिकल प्रापर्टी) का स्वामी होता है, उसी प्रकार कोई बौद्धिक संपदा का भी स्वामी हो सकता है। आप अपने बौद्धिक संमदा का नियंत्रण कर सकते हैं, और उसका उपयोग करके भौतिक संपदा (धन) बना सकते हैं।

इस प्रकार बौद्धिक संपदा के अधिकार के कारण उसकी सुरक्षा होती है और लोग खोज तथा नवाचार के लिए उत्साहित और उद्यत रहते हैं। विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग केके द्विवेदी द्वारा प्रो. कमल शर्मा का परिचय दिया गया। राष्ट्रीय वेबीनार में विषय विशेषज्ञ प्रो. कमल शर्मा, भूतपूर्व प्राध्यापक भूगोल विभाग, डॉ. एचएस गौर विश्व विद्यालय सागर मध्यप्रदेश ने व्याख्यान देते हुए कहा कि मनुष्य अपनी बुद्धि से कई तरह के अविष्कार और नई रचनाओं को जन्म देता है उन पर उसका पूरा अधिकार होता है, परंतु उसके इस अधिकार के सुरक्षा की चिंता भी उसे भी रहती है, इसे ध्यान में रखते हुए !

बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी संगठन और नियम बनाए गये। प्रो. शर्मा ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रकार तथा भारतीय बौद्धिक संपदा अधिकार व्यवस्था की कमियों तथा इसमें बदलाव लाने वाले कारकों पर प्रकाश डाला। विषय विशेषज्ञ डॉ. अमित दुबे, साइंटिस्ट सेंट्रल लेबोरेट्री फेसिलिटि एंड इंटेलेख्वल प्रापटी राईट सेंटर, रायपुर ने कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा सृजित कोई संगीत, साहित्यिक कृति, कला खोज, प्रतीक, नाम, चित्र, डिजाइन, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, पेटेंट आदि को कहते है। बौद्धिक संपदा अधिकार दिये जाने का मूल उद्देश्य मानवीय बौद्धिक सृजनशीलता को प्रोत्साहन देना है।

बौद्धिक संपदा अधिकारों का क्षेत्र व्यापक होने के कारण यह आवश्यक समझा गया कि क्षेत्र विशेष के लिए उसके साथ अधिकारों एवं संबंध नियमों की व्यवस्था की जाये। उन्होंने द बॉयोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्अ फार्मर राइट्स एक्ट द प्रोजेक्शन ऑफ प्लांट वेरायटी के विषय में विस्तृत जानकारी दी। 

केके द्विवेदी द्वारा विषय विशेषज्ञ डॉ. कमल शर्मा का परिचय दिया गया। विषय विशेषज्ञ सुयश पांडे, एडव्होकेट सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली ने कहा कि-बौद्धिक संपदा अधिकार मानव मस्तिष्क के विचारों से उत्पन्न एक उपज है।

दुनिया के देश कई सदियों से अपने-अपने अलग कानून बनाकर मानव मस्तिष्क से उत्पन्न उपज को सुरक्षित करते चले आ रहे हैं। 1995 में विश्व व्यापार संगठन बना इस संगठन का एक समझौता है, जो देश इस संगठन के सदस्य हैं, उन्हें इसे मानना पड़ता है तथा अपने कानून इसी के अनुसार बनाते हैं। उन्होंने कॉपीराइट एक्ट, पेटेन्ट एक्ट, ट्रेडमार्क एक्ट की विस्तृत जानकारी दी। 

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. निवेदिता ए. लाल द्वारा तथा डॉ. जयसिंह साहू आईक्यूएसी प्रभारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।