कृषि कानूनों के विरोध में राजभवन के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेसी

कृषि कानूनों के विरोध में राजभवन के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेसी


रायपुर। संसद से पारित कषि बिलों को लेकर राजधानी रायपुर में कांग्रेस आज पैदल मार्च कर रही है। राजीव भवन से पैदल मार्च कर राजभवन पहुंच गए हैं, जहां बाहर धरने पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल अनुसुईया उईके को ज्ञापन सौंपेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, शिक्षा मंत्री प्रेम साय सिंह टेकाम, वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा, धनेंद्र साहू, अरुण वोरा, शैलेष पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद हैं।
ज्ञापन सौंपने के बाद मोहन मरकाम ने कहा कि राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम हमने ज्ञापन सौंपा है। काला कानून वापस लेने के लिए निवेदन किया है, क्योंकि पूरे देश के अन्नदाता सड़कों पर हैं। पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। इसलिए हमने निवेदन किया है कि यह कानून वापस लें और इस कानून के माध्यम से उद्योगपतियों व अपने मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है। अन्नदाता व किसानों की ओर से हम प्रतिनिधि के तौर पर हम सांसद, विधायक राजभवन कुच किया और ज्ञापन सौंपा।
स्वस्थ्य व पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि तीन कानून केंद्र सरकार ने बनाए हैं। इस कानून के दायरे में उन्होंने कॉरपोरेट जगत को खरीदी के लिए रास्ते खोल दिए हैं। कांग्रेस को आपत्ति है कि आप न्यूनतम समर्थन मूल्य को इस कानून का हिस्सा बनाइए। स्वयं नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री को रिपोर्ट दी थी। पृष्ठ क्रमांक 19 पॉइंट 2, 3 बी में उन्होंने स्पष्ट रूप से इस बात का उल्लेख किया था और न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा दिया जाए। वह मुख्यमंत्री जो ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स में यह राय रखते थे आज राज्यों को भूल गए हैं और कारपोरेट के पाले में जाकर खड़े होते दिख रहे हैं। भंडारण को शिथिल कर रहे हैं यदि वस्तुओं संग्रहित कर रखा जाता है और वे बाजार में उपलब्ध नहीं होते तो दाम बढ़ जाते हैं। इसका फायदा न किसान को मिलता है ना उपभोक्ता को। इसका फायदा बिचौलियों को मिलता है।
उन्होंने कहा कि इस सरकार ने कानून में इसे सुनिश्चित कर दिया कि 100 रूपए का माल आप 200 रूपए तक बेच सकते है। यह कैसा कानून है। केंद्र की सरकार कहती है कि 100 रूपए की चीज आप 200 तक बेचो आपको कोई नहीं रोकेगा। ऐसा कानून मैंने कभी ना देखा, ना सोचा, ना सुना। सरकार को अधिकार दिए हैं कि राज्य सरकार किसी के कार्य के संपादन नियंत्रण को लेकर के उनके ऊपर जाकर कि केंद्र सरकार ने कानून बनाकर केंद्र से राज्यों को चलाने की कोशिश की है। हर चीज के पीछे बुनियाद न्यूनतम समर्थन मूल्य यह सुनिश्चित कानून में होना चाहिए।
बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पास किए गए किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन कृषि सेवा विधेयक 2020, आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 बिलों का राष्ट्रव्यापी विरोध हो रहा है। इस कृषि बिल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दस्तखत भी कर दिए हैं। कृषि कानून बनने के बाद भी देश भर में इसका विरोध हो रहा है। खासतौर पर किसान और कांग्रेस इसका विरोध जता रही है। कई प्रदेशों में किसान सड़कों पर है। केंद्र सरकार लाठियों के दम पर उनकी आवाज को दबा देना चाहती है। इस कानून को कांग्रेस काला कानून और किसान विरोधी बता रही है।