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पर्यवेक्षकों के लिए खुला न्याय का असली द्वार

पर्यवेक्षकों के लिए खुला न्याय का असली द्वार

पहले टुकड़ों में होता था आदेश - प्रांताध्यक्ष रंजना ठाकुर

रायपुर, 29 दिसंबर। विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी सात आठ साल से अपनी परिवीक्षा अवधी समाप्त कराने के लिए संचालनालय का चक्कर काट काट कर परेशान हो चुकी महिला एवं बाल विकास के पर्यवेक्षकों को अब न्याय मिलने लगा है।

कोरोना काल में बतौर संचालक नियुक्त की गई दिव्या मिश्रा आईएएस द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाने से पर्यवेक्षको की लंबित समस्याओं का निराकरण बहुत तेजी से होने लगा है। 

संचालक द्वारा पर्यवेक्षकों के हित में तेजी से लिए जा रहे निर्णय से उत्साहित होकर पर्यवेक्षक संघ का प्रतिनिधि मंडल नववर्ष के अवसर पर आगामी 5 जनवरी को संचालक से मिलने वाला हैं। प्रतिनिधि मंडल में प्रांताध्यक्ष रंजना ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश के पांचों संभाग से दो दो पर्यवेक्षक होंगे। 

पर्यवेक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता विद्याभूषण दुबे ने बताया आईएएस संचालक मिश्रा के चंद महीनों के कार्यकाल में पांच वर्षों से लंबित वरिष्ठता सूची का प्रकाशन होने के अलावा सैकड़ों पर्यवेक्षको की परिवीक्षा अवधी समाप्त की जा चुकी है। साथ ही जिन 16 जिलों के कार्यक्रम अधिकारियों के द्वारा समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है उन जिलों से 73 पर्यवेक्षकों की परिवीक्षा अवधी समाप्त करने के लिए प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर मांगी गई है। 

उन्होंने बताया कि जिन जिलों से प्रस्ताव मांगी गई है उसमें रायगढ़ से 9 कोंडागांव 3, महासमुंद, बस्तर और धमतरी  बालोद, सरगुजा, जांजगीर से 1 -1 पर्यवेक्षको की जानकारी मांगी गई है। बेमेतरा से 4 गरियाबंद 10  जशपुर 19 राजनांदगांव, 9 सूरजपुर 8 बलरामपुर 6 बिलासपुर 3 बलौदाबाजार से 5 पर्यवेक्षको के नाम शामिल हैं। अन्य जिला से पूर्व में प्राप्त प्रस्ताव पर सैकड़ों पर्यवेक्षको की परिवीक्षा अवधी समाप्ति के आदेश जारी किये जा चुके है।

संघ की प्रांताध्यक्ष रंजना ठाकुर ने कहा कि पूर्व के वर्षों में कभी एक तो कभी दो पर्यवेक्षकों का परिवीक्षा अवधी समाप्त किये जाने का आदेश टुकड़े टुकड़े में संचालनालय से जारी किया जाता था। आदेश में भी विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने पर के स्थान बजाए विभागीय परीक्षा पूर्ण करने पर लिखा होता था। उन्होंने कहा कि दिव्या मिश्रा के संचालक बनने के बाद से ही पर्यवेक्षको के लिए न्याय का असली द्वार खुला है और उन्हें लगने लगा है कि उनकी समस्याओं को समझने वाला उपर में कोई है। 

मुंगेली की जिलाध्यक्ष विभा मसीह का कहना है की नए संचालक के आने के बाद से पर्यवेक्षकों के लिए न्याय का असली द्वार खुला है। प्रांतीय सचिव याचना शुक्ला नें कहा कि संचालक से अपेक्षाएं बढ़ी है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में वेतन विसंगति की समस्या भी दूर होगी साथ ही मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन पर भी निर्णय लिए जाएंगे।