प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-दर्द का हद से गुजऱना है दवा हो जाना

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-दर्द का हद से गुजऱना है दवा हो जाना

मिर्जा गालिब का शेर है 

''इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फऩा हो जाना
दर्द का हद से गुजऱना है दवा हो जाना

मिर्जा ग़ालिब के मुताबिक़ दर्द अगर हद से गुजऱने लगे तो समझिए अब कोई और दवा काम नहीं करेगी, बल्कि, वो दर्द ख़ुद अपना इलाज करेगा। यानी अपने  मर्ज की दवा वो ख़ुद बन जाएगा। यही हाल पूरी दुनिया का है, कोरोना की वैक्सीन को लेकर है। कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास हो रहे हैं, किन्तु अभी पूर्णरूप से सफलता नहीं मिली है। जैसे ही हमारे यहां की कंपनी डॉ. रेड्डी ने रूस की कंपनी के साथ कोरोना वैक्सीन को लेकर एग्रीमेंट की बात कही, डॉ. रेड्डी के शेयर में उछाल आ गया। कोरोना से जहां पूरा देश हलाकान है, काम-धंधा मंदा है, नौकरियां चली गई है,वहीं दूसरी ओर कुछ अस्पतालों, होटलों और दवा, सेनेटाइजर, मास्क आदि बनाने वाली कंपनियों की बन आई है। कोविड टेस्ट और उपचार को लेकर लूटमार मची हुई है। सरकार ने जो गाइडलाइन जारी कर दरें तय की हैं, उसका भी पालन नहीं हो रहा है। मरता क्या नहीं करता। कोविड 19 की जांच के लिए आरटीपीसीआर और एंटीजन रैपिड टेस्ट के बाद पॉजीटिव होकर नेगेटिव होने तक की डगर बहुत कठिन है। अब लोगों को लगने लगा है कि डर के आगे जीत है।

कोरोना के नाम पर बहुत से निजी अस्पतालों ने होटल के साथ टाइअप कर लिया है। पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा कोई चीज बिकती हैं तो 'वह है मौत का डर'। अभी कोरोना की वैक्सीन नहीं आई है, इसके बावजूद अपनी इम्यूनिटी, कुछ दवाइयां सतर्कता और हिकमत अमली से 70 प्रतिशत से अधिक लोग सुधर के घर जा रहे है। जो लोग कोरोना पॉजिटिव होकर अस्पतालों या अन्य स्थानों पर बनाय गए कोविड-19 के स्थानों में रखे गये हैं, उनका अनुभव यह बताता है कि इसकी कोई खास दवा नहीं देते। यूं ही जो दवायें, परहेज, एहतियात घर में बरतते हैं, वही वहां भी बरत रहे है। ज्यादातर मरीजों को कोई डॉक्टर देखने नहीं आता। जब पीडि़त की सांसे रूकने लगती है, तब जरूर अस्पताल का आक्सीजन सिलेंडर और वेटिंलेटर यदि उपलब्ध है, तो मरीज के काम आ सकता है। मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए सारी व्यवस्थाएं फेल हो रही हैं।

हम आज जिस कोरोना वायरस, से जुझ रहे हैं वह दरअसल नोवेल कोरोना वायरस है, क्योंकि सार्स वायरस और स्वाइन फ्लू भी कोरोना वायरस से ही फैले थे? मगर ये उसकी नई किस्म है। फ्लू शब्द का प्रयोग आमतौर पर फेंफड़ों की बीमारी के संदर्भ में किया जाता है। वायरस को हिंदी में विषाणु कहते हैं और बैक्टेरिया को जीवाणु। विषाणु या वायरस को मारा नहीं जा सकता, इसलिए वायरस की एंटीबॉयोटिक दवाईयाँ नहीं आती हैं। आपने ये अक्सर सुना होगा कि वायरल बुखार दवा लेने पर एक हफ्ते में और दवा न लेने पर सात दिन में ठीक हो जाता है। इसे समझना इसलिए जरूरी है कि इससे कोरोना के टीके का गहरा संबन्ध है। कोरोना की दवा आना कठिन है पर टीका आना सम्भव है। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने कोविशील्ड नामक वैक्सीन का तीसरे याने अंतिम चरण का ट्रायल शुरू कर दिया है और भारत के सीरम इंस्टीटयूट के साथ उत्पादन का भी करार किया है। भारत में तीन कम्पनियां अलग-अलग वैक्सीन तैयार कर रही हैं जिनमें कोवेक्सीन नामक वैक्सीन जल्द आने की संभावना है। उधर रूस की अपनी दुनिया है जिसने दो प्रकार के वैक्सीन लांच भी कर दिये हैं।

भारत की डॉ रेड्डी जानी मानी कम्पनी ने रूस से दस करोड़ वैक्सीन खरीदने का करार भी कर लिया है। किसी भी वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल थोड़ा लम्बा होता है, क्योंकि इसे बड़ी जनसंख्या और विविध स्तर पर जाँचा जाता है। लगभग 73 दिनों के ट्रॉयल के बाद तीसरा चरण पूर्ण होता है, इसके बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होता है। नवंबर मध्य तक सभी प्रकार के ट्रायल्स पूरे होने की उम्मीद है। उसके बाद की कहानी पूरी तरह से राजनैतिक नेतृत्व और प्रशासकीय ढांचे के वितरण पर निर्भर करेगी। कोरोना वैक्सीन को लेकर आने वाले दिनों में जो बहुत सी चुनौतियां हमारे सामने आने वाली हैं उनमें (1) क्या पहले डॉक्टर्स और कोरोना वारियर्स को वैक्सीन मिलेगी? (2) क्या पुलिस प्रशासन वैक्सीन को चीते की फुर्ती से झपटकर अपने अमले को पहले लगाएगा? (3) क्या नेतागण अपने क्षेत्र में इसे ले जाकर वोट बैंक बढ़ाने के लिए वितरण व्यवस्था अपनाएंगे ताकि यह उनके डांवाडोल होते राजनीतिक जीवन में संजीवनी बुटी का काम करे। जैसा कि इन दिनों सभी ओर से शिकायतें आ रही है। ये वैक्सीन कोरोना की न होकर चुनावों की वैक्सीन हो। (4) क्या निजी अस्पताल कलाबाजारी कर बढ़े दामों पर बेचेंगे? बहुत से अस्पतालों ने कोरोना की एक दवा रेमडेसिवीर के विक्रय के दौरान किया।

सवाल यहॉ यह भी है कि क्या सरकार इसे पोलियो वैक्सीन की तरह सभी को खुद वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी? क्या इसे सरकार आपदा में अवसर की तरह उपयोग में लाकर उन राज्यों में पहले बांटेगी, जहां पर निकट भविष्य में चुनाव होना है? कहीं यह वैक्सीन बाकि सरकारी योजनाओं अनुदान, सुविधाओं की तरह 'अंधा बांटे रेवड़ी चीन्ह चीन्ह कर दे' वाली स्थिति निर्मित तो नहीं हो जावेगी।

धर्म को धंधे से जोड़कर योग करने वाले इस देश के तेजी से आगे बढ़े। रामदेव बाबा ने आपदाओं को अवसर समझकर कोरोना वैक्सीन बनाने की घोषणा कर दी थी। बाद में पतंजलि योग पीठ कोरोना वायरस की दवा बनाने के अपने दावे से पीछे हट गया है। पतंजलि ने दावा किया था कि उसकी दवाई कोरोनिल से कोरोना वायरस का इलाज संभव है।  

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जिन्हें नवम्बर में चुनाव में जाना है, चीन और कोरोना वैक्सीन को अपने चुनावी रणनीति का मुद्दा बनाएंगे। उन्होंने कहा कि कोरोनो वैक्सीन एक महीने के भीतर उपलब्ध हो सकती है। ट्रम्प ने कहा था कि एक टीका चार सप्ताह में आ सकता है, यह कुछ सप्ताह इौर लग सकते है। डेमोक्रेट्स ने चिंता व्यक्त की है कि ट्रम्प ने 3 नवंबर को चुनौती देने वाले जो बिडेन के खिलाफ  पुनरीक्षण के लिए अपनी ईमानदार बोली को चालू करने में मदद करने के लिए सरकारी स्वास्थ्य नियामकों और वैज्ञानिकों पर समय पर एक जल्दबाजी में वैक्सीन को मंजूरी देने के लिए दबाव डाल रहे हैं। 

 कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत में अनिश्चितता बनी हुई है, जहां वैक्सीन उम्मीदवार चरण-2 और चरण-3 परीक्षणों में एक साथ चल रहा है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ  इंडिया (SII), जो परीक्षण कर रहा है, को वैश्विक मुद्दे के बारे में भारत के शीर्ष दवा नियामक द्वारा नोटिस के बाद परीक्षण रोकना पड़ा। अब तक भारत में लगभग 100 प्रतिभागियों को वैक्सीन दी जा चुकी है।

कोविड-19 वैक्सीन  के बारे है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन के अनुसार, भारत में जो वैक्सीन कैंडिडेट्स हैं, उनमें से तीन ऐसी हैं जो फेज 1, 2 और 3 में पहुंच गई हैं। हर्षवर्धन ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गाइडेंस में एक्सपर्ट का एक ग्रुप भी बना है जो वैक्सीन से जुड़े डेवलपमेंट्स पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल की शुरुआत में भारत के भीतर कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध हो जानी चाहिए। सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ  इंडिया वैक्सीन का फेज 3 ट्रायल कर रहा है। यह वैक्सीन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी अस्त्राजेनेका ने मिलकर तैयार की है। यह दुनिया की सबसे एडवांस्ट वैक्सीन कैंडिडेट्स में से एक है। सीरम इंस्टिट्यूट देशभर में 14 जगहों पर डेढ़ हजार लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल करेगा। इस वैक्सीन का कोडनेम ChAdOx1-S है और  यह नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन है। भारत के अलावा इस वैक्सीन का ब्रिटेन, अमेरिका, ब्राजील समेत कई देशों में ट्रायल चल रहा है। देश में हो रहे कोरोना वैक्सीन के सभी ट्रायल्स पर ICMR नजर रखे हुए है। 

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