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Big news : विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं के आक्रामक रवैये ने कराया लखीमपुर कांड की तपिश का अहसास

Big news : विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं के आक्रामक रवैये ने  कराया लखीमपुर कांड की तपिश का अहसास

लखनऊ।  लखीमपुर खीरी में रविवार को हुयी हिंसा की तपिश आज समूचे उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं के आक्रामक रवैये और धरना प्रदर्शनों के जरिये महसूस की गयी।

विधानसभा चुनाव से पहले तराई क्षेत्र के इस जिले में हिंसा के दौरान हताहत हुये किसानों के प्रति सहानुभूति जताने और सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की हाेड़ कांग्रेस,समाजवादी पार्टी, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) और आम आदमी पार्टी (आप) समेत अन्य विपक्षी पार्टियों में साफ दिखायी दी। उधर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने विपक्ष के आक्रामक रवैये को भांपते हुये सभी तैयारियां कर रखी थी।

विपक्षी दलों के प्रदर्शन का मुख्य केन्द्र लखनऊ और सीतापुर जिला रहे जबकि हिंसाग्रस्त लखीमपुर खीरी जिले में जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुये निषेधाज्ञा लागू कर दी थी और किसानों के अलावा सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। अफवाहों से बचने के लिये जिले में इंटरनेट सेवायें बाधित कर दी गयी थी और अनहोनी की आशंका से सभी शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया गया था।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा लखीमपुर जाने के लिये रविवार देर रात दिल्ली से लखनऊ पहुंच गयी थी लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हे कानून व्यवस्था का हवाला देते हुये कौल हाउस में रहने की सलाह दी हालांकि श्रीमती वाड्रा रात 12 बजे के करीब अपने चंद साथियों के साथ हिंसा के शिकार किसानों से मिलने के लिये निकल पड़ी। सीतापुर टोल प्लाजा के पास उन्हे रोक लिया गया जिसे लेकर उनकी स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोंक हुयी। कांग्रेसियों का आरोप है कि पार्टी महासचिव के साथ धक्कामुक्की की गयी लेकिन श्रीमती वाड्रा ने उग्र तेवर दिखाते हुये पुलिस कोतवाल से अरेस्ट वारंट दिखाने अथवा उन्हे जाने की इजाजत देने को कहा। करीब 15 मिनट तक चले हाइवोल्टेज ड्रामे के बाद अंतत: श्रीमती वाड्रा को पीएसी द्वितीय वाहिनी के शिविर में पुलिस निगरानी में रखा गया जिन्हे देर शाम रिहा करने की संभावना है।

उधर, लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के आवास के बाहर ईट लदे एक ट्रक को खडा कर दिया गया। मौके पर बड़ी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स,पीएसी और पुलिस के जवान तैनात किये गये। लखीमपुर जाने को तैयार श्री यादव के घर से बाहर निकलते ही पुलिस अधिकारियों ने उनसे वापस आवास लौटने का अनुरोध किया। कुछ देर तक तकरार के बाद श्री यादव और पार्टी महासचिव प्रो रामगोपाल यादव धरने पर बैठ गये। अपने नेता को धरने पर बैठा देख सपा समर्थकों ने उत्साह में आकर सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान कुछ अराजक तत्वों ने पुलिस के एक वाहन में आग लगा दी।

इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प हुयी हालांकि पुलिस बल प्रयोग करने से बचती नजर आयी। अधिकारियों ने एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री से आवास लौटने की गुहार लगायी और नहीं मानने पर उन्हे ईको गार्डन स्थित अस्थायी जेल में रख दिया गया। पुलिस की कार्यशैली से नाराज श्री यादव ने कहा कि पुलिस का रवैया हिटलरशाही का है। पीड़ित किसानों के दुखदर्द को बांटना कहां का गुनाह है मगर सरकार ने लोकतंत्र की सारी मर्यादाओं को ताक में रख दिया है।

इस बीच पूरे प्रदेश में कांग्रेस और सपा कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जो देर शाम तक जारी रहा। कुछ स्थानों को छोड़कर हालांकि धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया। उधर यूपी में अपनी सियासी जड़े जमा रही आम आदमी पार्टी (आप) के प्रभारी और सांसद संजय सिंह देर रात ही लखीमपुर के लिये रवाना हुये मगर उन्हे भी पुलिस ने सीतापुर में रोक लिया और मामूली तकरार के बाद पुलिस लाइन में नजरबंद कर दिया। लखीमपुर की घटना के विरोध में आप कार्यकर्ताओं ने भी राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन का आयोजन किया लेकिन उनकी उपस्थिति कोई खास असर नहीं दिखा सकी।

इस बीच प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी लखीमपुर के लिये निकले और साथ ही मीडियाकर्मियों को बता भी दिया कि वह पुलिस को चकमा देकर निकल चुके हैं। हालांकि वायरल वीडियो में उनकी कार का नम्बर देखकर उन्हे लखनऊ सीमा पर ही रोक दिया गया जिसके बाद उन्होने योगी सरकार को किसान विरोधी करार देकर और पीडित किसानों के पक्ष में कुछ मांगे रखकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।

उधर, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा को भी सुरक्षा बलों ने घर से बाहर नहीं निकलने दिया जिसकी सूचना बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट के जरिये दी। उन्होने किसानों के प्रति सहानुभूति दर्शाते हुये सरकार के रवैये को अलोकतांत्रिक करार दिया।

इस बीच प्रदेश सरकार ने किसानो से सहानुभूति जताने आ रहे पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और हाल ही में यूपी के ऑबजर्वर बनाए गए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लखनऊ एयरपोर्ट में उतरने की इजाजत देने से मना कर दिया। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डा प्रशासन को इस संबंध में पत्र लिखा जिसके बाद दोनो नेताओं का दौरा निरस्त कर दिया गया।

सरकार के प्रतिनिधियों ने किसान नेता राकेश टिकैत से बात कर मृतक किसान के परिजनों को 45-45 लाख रूपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया, साथ ही पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का भरोसा दिलाया। घायल किसानों को मुफ्त इलाज और दस दस लाख रूपये की आर्थिक मदद सरकार देगी। इसके अलावा घटना में लिप्त दोषियों को उनके किये की सजा दिलाने का सरकार ने वादा किया जिसके बाद मृतक किसानों के शव पोस्टमार्टम के लिये भेज दिये गये और आंदोलनरत किसानों ने अपने अपने घरों की ओर प्रस्थान करना शुरू कर दिया।