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नेपाल में अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन का होगा आयोजन, छत्तीसगढ़ के मिटटी और जल से होगा अतिथियों का स्वागत

नेपाल में अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन का होगा आयोजन, छत्तीसगढ़ के मिटटी और जल से होगा अतिथियों का स्वागत

नवागढ़। भगवान गौतम बुद्ध की जन्म स्थली लुंबनी नेपाल में होने जा रहे अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन को लेकर पूरे विश्व के पर्यावरण प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। भारत में भी यह उत्साह देखा जा रहा है। इस कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य के बेमेतरा जिले के नवागढ़ से अतिथियों के मिट्टी तिलक से स्वागत करने के लिए पवित्र तीर्थ स्‍थलों का जल नेपाल ले जाया जाएगा। इसके साथ की नवागढ़ विधान सभा क्षेत्र के धार्मिक स्थलों के गांवो से मिट्टी भी नेपाल भेजी  जाएगी।

बेमेतरा जिले के किशोर कुमार राजपूत  धार्मिक स्थलों वाले सभी गांवों के मिटटी को नेपाल पहुँचाने के लिए धर्मिक स्थलों वाले गावों में जाकर एक-एक मुट्ठी मिट्टी एकत्रित कर लिए हैं। वे सर्व प्रथम अपने जन्म भूमि जूनाडांडू और कर्म भूमि राजा नरवर सिंह देव की राजधानी और वर्तमान नगर पंचायत नवागढ़ के हर धार्मिक स्थल से जल इकट्ठा भी किया है।


इसमें नवागढ़ से श्री महामाया मंदिर सरोवर माना बंद, बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर सरोवर,श्री राम जानकी लक्ष्मी नारायण तीर्थ सरोवर, लक्ष्मनाबंध,भगनाबंद, शिव सरोवर बावलीपारा,आदि शक्ति मंदिर सरोवर चांदाबंद, व छोईहा नाला और नवागढ़ विधान सभा क्षेत्र की तीनों नदियों मरका हाफ, योगीदीप शिवनाथ और गोपाल भैना सकरी का जल शामिल है। वहीं धर्म नगरी बघुली में उग्र नाम साहेब की जन्म स्थली,जुनी सरोवर,जोगी बाबा,बुचीपुर, चक्रवाय,की मिट्टी पानी, संग्रहित किया है साथ ही पीपल, नीम,बरगद,तुलसी पौधें भी ले जाएंगे।

इस दौरान किशोर राजपूत ने कहा कि वर्षों के बाद वह दिन आ रहा है, जब नेपाल में भगवान श्री गौतम बुद्ध के जन्म स्थली लुंबनी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रखा गया है। इस दिन का इंताजर न सिर्फ भारत बल्कि विदेश में बसते पर्यावरण प्रेमी भी कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के दिशा में कार्य करने वाले समाज का हर वर्ग नेपाल में कांफ्रेस सफलता की कामना करता रहा है। उन्‍होंने कहा कि कोरोना मरामारी के कारण सम्मेलन को बेहद सीमित रखा गया है,अन्यथा भारत से बड़ी संख्या में लोग इस मौके पर पहुंचते।