breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - चिंता को बढ़ाता चिंतन शिविर

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  - चिंता को बढ़ाता चिंतन शिविर

- सुभाष मिश्र

भाजपा बस्तर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर कर रही है। इस समय बस्तर की सभी 13 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। आदिवासी आबादी बाहुल्य बस्तर में जगदलपुर शहर की एक विधानसभा सीट को छोड़ दें तो 11 सीटें आरक्षित है। छत्तीसगढ़ की विधानसभा में 29 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है जिनमें से 25 सीटे अभी कांग्रेस के पास है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में अनुसूचित जनजाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग का बाहुल्य है। वर्तमान विधानसभा में 90 में से 70 सीटें कांग्रेस के पास हैं। 14 सीटे भाजपा, 4 जोगी कांग्रेस और दो बसपा के पास है। 15 साल तक छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज भाजपा को 2016 के विधानसभा चुनाव में जो शिकस्त मिली उसके बाद भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व लगातार इस बात की पड़ताल कर रहा है कि पार्टी की हार का प्रमुख कारण क्या है? डॉ. रमन सिंह की छबि एक सौम्य व्यक्ति की रही है किन्तु उनके शासनकाल में भाजपा जिस शुचिता, चाल, चरित्र, चेहरे की बात करती रही है उसका उल्ट लोगों ने देखा। कांग्रेस ने अपने जन घोषणा-पत्र में किसानों की ऋण माफी, समर्थन मूल्य से अधिक पर धान खरीदी सहित ऐसे सारे मुद्दों को समाहित किया जिसकी वजह से कांग्रेस की सत्ता में शानदार वापसी हुई।

छत्तीसगढ़ में 2023-24 में विधानसभा चुनाव होना है। भाजपा ने अपने चिंतन शिविर के लिए बस्तर को चुना है। बस्तर में तीन दिन के चिंतन शिविर में भाजपा के शीर्ष नेता से लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भी चुने हुए प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं। इसके पहले भाजपा के चिंतन शिविर रायुपर और चंपारण में होते रहे हैं। बस्तर में हो रहे चिंतन शिविर को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है। पार्षदों को चौक-चौराहों पर भारी भीड़ के साथ पदाधिकारियों के स्वागत सत्कार की जवाबदारी सौंपी गई है। भीड़ देखकर ही उनका रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा। बस्तर के आदिवासी नेतृत्व दलों के माध्यम से पूरे चिंतन शिविर के माहौल को बस्तरिया रंग में रंगने की कवायद हुई है। इस चिंतन शिविर में भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव छत्तीसगढ़ प्रभारी डी. पुरेंदश्वरी, महासचिव बी.एल. संतोष, संगठन के संयुक्त सचिव शिवप्रकाश के अलावा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. रमन सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय जैसे लोग भाग ले रहे हैं। बस्तर महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव के वंशज कमलचंद्र भंजदेव को भाजपा ने बस्तर का चेहरा बनाया है। इस परिवार की आदिवासी समुदाय के बीच अच्छी खासी पैठ है।

एक ओर जहां भाजपा चिंतन शिविर के जरिए अपनी सत्ता वापस लाने की जुगत में लगी हुई है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर खिंचतान मची हुई है। पिछले कुछ समय से लगातार वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के बीच शक्ति परीक्षण का माहौल बना हुआ है। कांग्रेस का सबसे मजबूत किला राष्ट्रीय नेतृत्व की ना समझी और नेताओं की महत्वाकांक्षा के चलते अपनी ही जड़ों में मट्ठा डालने की कोशिश व बयानबाजी में चिंता और चिंतन की बात कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में हाशिए पर गई भाजपा को बैठे ठाले कांग्रेस ने मुद्दा दे दिया है। यदि कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई नहीं थमी तो इसका खामियाजा कांग्रेस को मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी उठाना पड़ेगा।

भाजपा के बस्तर चिंतन शिविर में 2023 के लिए एक रोड मैप तैयार किया जाना है। सत्तारूढ़ कांग्रेस की कमियों और उनके जन घोषणा-पत्र के वादों को पूरा नहीं करने को लेकर भी भाजपा भविष्य में हमलावर होगी। भाजपा छत्तीसगढ़ में अल्प वर्षा से उत्पन्न अकाल की स्थिति सहित शराबबंदी, कोरोना संक्रमण के दौरान की अव्यवस्था और मुआवजा राशि आदि का मुद्दा उठायेगी। भाजपा की ओर से विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा नहीं करना भी उनकी भविष्य की रणनीति का हिस्सा है। भाजपा पूरे छत्तीसगढ़ में खासकर बस्तर और सरगुजा संभाग में अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलायेगी। संभव है भाजपा दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जिसकी चर्चा भाजपा के गलियारों में है।

कांग्रेस इस समय पूरे देश में राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाईप लाईन योजना का विरोध करते हुए लोगों के बीच यह संदेश देने में लगी हुई है कि मोदी सरकार दरअसल पूंजीपतियों की सरकार है। देश की सारी लाभकारी संस्थाओं को मोदीकरण के नाम पर निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। जिसका सबसे ज्यादा असर गरीबों और आम आदमी पर पड़ेगा। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार के मॉडल को कांग्रेस देश के विकास का मॉडल बताकर आगामी उत्तरप्रदेश चुनाव में इसे प्रचारित प्रसारित करना चाहती है। भूपेश बघेल के नेतृत्ववाली छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है। भूपेश बघेल खुद किसान है और पिछड़े वर्ग से आते हैं। ऐसे में भाजपा के चिंतन शिविर में इस मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा होगी की कांग्रेस की छत्तीसगढ़ सरकार की छवि को ग्रामीण अंचल में कैसे प्रभावित किया जाए। दरअसल ये चिंतन शिविर भविष्य की चिंता को दर्शाने वाला शिविर है। चिंता दोनों ही ओर है। बस्तर के सीधे-साधे आदिवासी इस चिंता में है कि उन्हें वहां व्याप्त तरह-तरह के आतंक और शोषण से कब मुक्ति मिलेगी।