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इंदौर जिले में ‘कोरोना रोकथाम प्रबंध’ को लेकर दायर जनहित याचिका ख़ारिज

इंदौर जिले में ‘कोरोना रोकथाम प्रबंध’ को लेकर दायर जनहित याचिका ख़ारिज

इंदौर।  मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने आज इंदौर जिला प्रशासन के द्वारा किये गए ‘कोरोना महामारी की रोकथाम और बचाव के प्रबंध’ पर सवाल उठाती जनहित याचिका को ख़ारिज करते हुए अपने आदेश में जिला प्रशासन के द्वारा इस महामारी की रोकथाम तथा बचाव के लिए किये गये कार्यों की सराहना की है।

प्रशासनिक न्यायाधीश एस सी शर्मा और न्यायाधीश शैलेन्द्र शुक्ला ने आज आदेश जारी करते हुए भोपाल निवासी अजय दुबे द्वारा दायर इस जनहित याचिका को ख़ारिज कर दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता के द्वारा याचिका में बतौर साक्ष्य, आधार एक दस्तावेज़ को फर्जी माना है। युगलपीठ ने फर्जी दस्तावेज़ के आधार प्रशासन के खिलाफ आरोप लगाने के संबंध में प्रशासन को याचिकाकर्ता के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई करने की स्वतंत्रता भी दी है।

याचिका में जिले के अप्रैल 2020 से लेकर जुलाई 2020 तक की अवधि में कोरोना संदेहियों के जांचे गए सेम्पलों, जिले के कोरोना रोगियों की स्थिति के विषय में जारी किये गए आंकड़ों और जिले में कोरोना रोगियों की हुई वास्तविक मौतों के आंकड़ों सहित अनेक कथित मामलों को लेकर सवाल उठाये थे। प्रशासन के द्वारा याचिकाकर्ता के उठाये गए सवालों को आधारहीन, असत्य बताते हुये पिछली सुनवाइयों में अदालत के समक्ष जवाब प्रस्तुत किया था। अदालत ने प्रशासन के जवाब, साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर याचिका को ख़ारिज कर दिया है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने स्वयं कोरोना महामारी से बचाव के लिए जनहित में कोई काम नहीं किया है। अदालत ने तल्ख़ टिप्पणी करते हुए कहा कि इन दिनों सस्ती लोकप्रियता पाने, अखबारों की सुर्ख़ियों में बने रहने के कारणों से दायर जनहित याचिकाओं से अदालतें भरी पड़ी है।

गत 05 अगस्त को दायर इस जनहित याचिका में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, भारत के गृह विभाग के सचिव, गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई), मुख्य आयुक्त केंद्रीय जीएसटी केंद्रीय उप्ताद एवं सीमा शुल्क भोपाल, राज्य के मुख्य सचिव समेत 9 प्रधकारियों का पक्षकार बनाया गया था।