II सीएम भूपेश बघेल का कमाल : कोरोना को रोकने में 19 बड़े राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आगे निकले, विश्व में भारत.... देश में छत्तीसगढ़ सबसे आगे... अनिल द्विवेदी की रिपोर्ट

II सीएम भूपेश बघेल का कमाल : कोरोना को रोकने में 19 बड़े राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आगे निकले,  विश्व में भारत.... देश में छत्तीसगढ़ सबसे आगे... अनिल द्विवेदी की रिपोर्ट
  • छत्तीसगढ़ उन सात राज्यों में शामिल, जहां कोरोना के मरीज 10 के अंदर सिमटे हैं!


    अनिल द्विवेदी

रायपुर. यह शीर्षक आपको आश्चर्य में डाल रहा होगा और थोड़ा अतिश्योक्तिपूर्ण भी इसलिए इसके पीछे की सच्चाई जान लीजिए. दुनिया के साथ—साथ हमारा देश भी कोरोना वायरस से जूझ रहा है. 2400 मामले सामने आए हैं और 50 से ज्यादा को हमने हमेशा के लिए खो दिया है. राज्यों की रिपोर्ट पर नजर डालें तो बड़े राज्य जहां कोरोना को रोकने में विफल रहे हैं वहीं छोटे राज्यों ने कोरोना को अपनी मुटठी में कैद कर लिया है. असम 1, मणिपुर 1 मिजोरम 1, ओडिशा 4, उत्तराखंड 7,झारखंड 1, हिमाचल प्रदेश 3 तथा छत्तीसगढ़ 9 के आंकड़े दर्शाते हैं कि इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कोरोना को अपनी मुटठी में कैद करके रख लिया है.

छत्तीसगढ़ ने तो अनुकरणीय कीर्तिमान रचा है. राज्य की डेढ़ करोड़ की आबादी में यदि 10 मरीज भी कोरोना.संक्रमित नही हैं तो यह पीठ थपथपाने वाला कमाल है. मशहूर फिल्म निर्माता सुधीर मिश्रा ने ट्वीट करके इसकी तारीफ की. उन्होंने लिखा है कि 'कोरोना वायरस के बारे में जागरूकता के लिए छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल द्वारा अच्छा काम किया जा रहा है.' इसके उलट आप बड़े राज्यों के आंकड़े सूची में देख सकते हैं जहां कोरोना के मरीज चक्रवृद्धि ब्याज की तरह बढ़ रहे हैं.

विकास का सूचकांक निकालने वाली एजेंसियां छत्तीसगढ़ को अब छोटे राज्यों की श्रेणी में नही रखतीं. इसकी वजह यह है कि भले ही यह राज्य जनसंख्या के मामले में छोटा हो, परंतु क्षेत्रफल के मामले में दिल्ली जैसे राज्यों से भी बड़ा है. ऐसे में आप सूची पढ़िए कि बड़े राज्य किस तरह कोरोना की कीमत चुका रहे हैं. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, केरल इत्यादि के आंकड़े भयावह हैं जो वहां के मुख्यमंत्रियों की कार्यशैली और फैसलों पर नैतिक सवाल खड़े करते हैं. आखिर संसाधन, आर्थिक क्षमता, मानव संसाधन इत्यादि के मामले में छत्तीसगढ़ इन राज्यों के सामने कुछ भी तो नही है.



दरअसल कोरोना वायरस जैसी आपदा को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले ही भांप गए थे. वे पहले सीएम थे जिन्होंने यह घोषणा की कि कोरोना' मरीजों के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी. उसके बाद फिर दूसरे राज्यों ने भी इसे लागू किया. देश में तालाबंदी की घोषणा से पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में निर्देश जारी कर दिए थे. कोरोना का पहला मामला सामने आते ही उन्होंने सीमाओं को सील करने के निर्देश भी दिए. यही फैसला बेहद मारक साबित हुआ.

कोरोना के खिलाफ सीएम के ब्रम्हास्त्र चलते चले गए. लॉकडाउन के दौरान जब खबर उड़ी कि सब्जियां और अनाज की कालाबाजारी हो रही है तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तुरंत एक्शन में आए और कालाबाजारी करने वालों के पीछे खादय विभाग की टीम लगा दी. दाल मिल एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने कहा, 'मुख्यमंत्री के तेवर देखकर कालाबाजारी करने जा रहे व्यापारी भी सतर्क हो गए थे. वाटसअप में संदेश भी चलाए गए. दो दिन बाद सीएम खुद सड़क पर थे और सब्जियों के दामों की टोह ले रहे थे. नतीजन रक्तबीज की तरह बढ़ रहे कोरोना की तरह सब्जियों के बढ़े हुए दाम धम्म से आ गिरे. स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव जब मुंबई में फंस गए थे तब भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वास्थ्य विभाग की बैठक ली और दिशानिर्देश जारी किए थे ताकि कोरोना को शिकस्त दी जा सके.

जब बड़ी आपदा आती है तो राजनीतिक मतभेद किनारे कर दिए जाते हैं. कोरोना वायरस से लड़ने के लिए श्री बघेल ने पीएम मोदी का पूरा साथ दिया क्योंकि यह राज्य की डेढ़ करोड़ आबादी की सुरक्षा का सवाल था. राज्य में अब तक यदि 10 मरीज भी कोरोना.संक्रमित नही हैं तो यह सीएम भूपेश बघेल के नेतृत्व और सूझबूझ की बदौलत ही संभव हो सका. 10 में से 3 तो ठीक होकर घर भी जा चुके हैं. गुजरात के दर्जनों लोग राजिम, चंपारण में फंसे तो श्री बघेल ने उनकी सुध लेते हुए अपनी धर्मपत्नी को मदद के लिए भेज दिया. सीएम ने टिवट किया, 'छत्तीसगढ़ में इस वक्त रुका हुआ बाहर का कोई भी व्यक्ति हमारा मेहमान है.'

पीएम मोदी से सीएम की तीन मांगें

हालांकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजधर्म निभाना नही भूले. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर पहले ही सतर्क हो गए होते और जरूरी कदम उठाये जाते तो दृश्य कुछ और ही होता' सीएम भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि मनरेगा सहित अन्य मजदूरों के खाते में तीन माह तक प्रतिमाह 1000 रूपये उनके खाते में डाले जाएं. सभी जन—धन खाताधारकों को 750 रूपये प्रतिमाह तीन महीने तक दिए जाएं तथा संगठित क्षेत्र के कामगारों को जिनकी आय 15000 तक है, की भविष्यनिधि की राशि तीन माह तक केन्द्र सरकार देवे. उम्मीद है पीएम मोदी इसे गंभीरता से लेंगे. छत्तीसगढ़ ने कोरोना से लड़ाई में जो साथ देश का दिया, उसका सही मोल चुकाने का वक्त यही है.