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खेल : चीन और ब्रिटेन से है सीखने की जरूरत ! - डॉ. चन्दर सोनाने

खेल : चीन और ब्रिटेन से है सीखने की जरूरत !   - डॉ. चन्दर सोनाने


इस टोक्यो ओलिंपिक में भारत के खिलाड़ियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए 1 गोल्ड , 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज के साथ कुल 7 पदक जीत कर इतिहास रच दिया है । हमारे पदकवीरों नीरज चोपड़ा , मीराबाई चानू , रवि दहिया , बजरंग पूनिया , पीवी सिंधू , लवलीना और पुरुष हाकी टीम ने विश्व में हमारे देश का भाल ऊँचा कर दिया है । महिला हॉकी टीम कोई पदक हासिल नहीं कर पाई , किन्तु इस टीम की सभी प्रतिभावान खिलाड़ियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर देश का दिल जीत लिया । सभी पदकवीरों और इन सभी खिलाड़ियों का अभिनंदन ! बधाई । आभार ।

                किन्तु 130 करोड़ से भी अधिक आबादी वाले देश को ओलिंपिक में केवल 7 पदक ! दुनिया भर में आबादी के हिसाब से प्रति व्यक्ति ओलिंपिक पदक जीतने में सैन मेरिनो अव्वल है । इसने 3 पदक जीते हैं । वहाँ की आबादी 33,931 है । यानी 11,310 लोगों पर एक पदक !हमारे देश की 135 करोड़ की आबादी पर 7 पदक के मान से 19.2 करोड़ नागरिकों पर एक पदक ! चीन ने 1.5 करोड़ लोगों पर एक पदक जीत कर कुल 88 पदक जीते हैं । इस मौके पर यह भी जरूर सोचना चाहिए कि क्या यह पर्याप्त है ! क्या हम सब को इससे ही संतुष्ट होकर बैठ जाना चाहिए ! कदापि नहीं ! हमें चीन और ब्रिटेन से सीखने की जरूरत है ! इन दोनों देशों ने चुनिंदा खेलों का चयन कर अपने अपने देशों में स्कूल स्तर से ही बच्चों की प्रतिभाओं को पहचान कर और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के कुशल प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है । उन्हें उनकी पसंद और प्रतिभा के अनुरूप न केवल लगातार निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है , बल्कि उनके आवास , पौष्टिक खुराक , कपड़े और अन्य जरूरी समस्त आवश्यकतओं को भी भरपूर ख्याल रखा जाता है । उन बच्चों के परिवार को इन सभी जरूरतों को पूरा करने की कोई भी चिंता नहीं होती है । विभिन्न स्तरों की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी उन्हें सरकार द्वारा ही भेजने और लेने के साथ - साथ सभी जरूरी जरूरतों को पूरा किया जाता है । यही कारण है कि इन देशों के खिलाड़ी ओलिंपिक सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने - अपने देशों का परचम फहराते हैं । चीन और ब्रिटेन जैसा ही हमारे देश को भी करने की सख्त जरूरत है , तभी हमारे देश के खिलाड़ी अधिक से अधिक पदक ला पाएँगे ! यदि ऐसा ही कुछ हुआ तो फिर 2024 में पेरिस में होने वाले ओलिंपिक में हमारे प्रतिभावान खिलाड़ी इतिहास रच देंगे ! अगले ओलिंपिक के लियर केवल तीन साल ही बचे हैं ! सिर्फ तीन साल ! इसलिए अभी जागना , सोचना और चयनित खेलों में खिलाड़ियों को चीन और ब्रिटेन के समान सभी सुविधाएँ देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के कुशल प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण देना आरम्भ कर देना चाहिए । इसकी सारी जिम्मेदारी केंद्र सरकार को ही लेना चाहिए !

               इस अवसर पर हमें अपने देश के राज्यों द्वारा खेलों के प्रोत्साहन के लिए किए जा प्रयासों पर भी एक नजर डालने की जरूरत है । जहाँ ओलिंपिक में अमेरिका , चीन , जापान और ब्रिटेन का वर्चस्व है , वैसे ही हमारे देश में हरियाणा , पंजाब और महाराष्ट्र ने अपने अपने राज्यों में खेलों और खिलाड़ियों पर खर्चों , सुविधाओं एवं प्रोत्साहन पर उल्लेखनीय योगदान दिया है । यहाँ इसकी चर्चा करना भी जरूरी है । छोटा सा करीब ढाई करोड़ आबादी वाले हरियाणा राज्य इन सब बातों में देश के सभी राज्यों में सिरमौर है ! देश ने 4 ओलिंपिक में 20 पदक जीते हैं । इनमें से 11 केवल एक ही राज्य हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते हैं ! यही कारण है कि इस बार भी देश में 50 % ओलिंपिक पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने ही जीते हैं । एशियन गेम्स में 33 % जीते थे । वर्ष 2000 के ओलिंपिक में हरियाणा की कर्णम मल्लेश्वरी ने पदक जीता था । बस उसके बाद से ही हरियाणा राज्य ने ओलिंपिक के लिए खिलाड़ियों को तराशने की तैयारियाँ योजनाबद्ध तरीके से शुरू कर दी थी ! इस राज्य में सरकार किसी भी पार्टी की रही हो , किसी ने भी अपने राज्य की इस खेल नीति से छेड़छाड़ नहीं की , बल्कि हर एक सरकार ने खेलों और खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दिया है । इस राज्य में पिछले 20 साल से स्कूल स्तर से ही तैयारी शुरू कर दी । पूरे राज्य में खेल नर्सरियाँ हैं । स्कूल और कॉलेज स्तर पर नेशनल मेडल लाने वाले को 6 लाख रु तथा अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदकवीरों के कोच को 20 लाख रु तक की नगद राशि प्रोत्साहन स्परूप दी जाती हैं । यही नहीं बीस साल से अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक लाने वाले को सरकार सीधे पुलिस में डीएसपी की नौकरी देकर खेल विभाग में उप खेल निदेशक की नौकरी दे रही है । ओलिंपिक में गोल्ड जीतने पर देश में सबसे अधिक 6 करोड़ , सिल्वर लाने पर 4 करोड़ और ब्रॉन्ज जीतने पर 2.50 करोड़ रु का पुरस्कार मिलता है । खिलाड़ियों को तैयारी के लिए 15 लाख रु मिलते हैं । इस राज्य में साई के 22 केंद्र है । ये एक राज्य में देश में सबसे अधिक है । हरियाणा में पिछले तीन साल का औसत बजट 300 करोड़ से ज्यादा है । विशेष प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ियों और कोच की ट्रेंनिग भी विदेश में कराता है । ये सब उसी का नतीजा है । इसी कारण देश में सबसे अधिक पदक हरियाणा राज्य के खिलाड़ी ही ला रहे हैं ।

               तो अब क्या किया जाना चाहिए ! केंद्र सरकार को चीन , ब्रिटेन और अपने ही देश के हरियाणा राज्य से सीख कर वर्ष 2024 में पेरिस में होने वाले ओलिंपिक के लिए अल्पकालीन और 25 साल की दीर्घकालीन ठोस खेल नीति बना कर सख्ती के साथ उस पर अमन करना चाहिए ! स्कूल , महाविद्यालय स्तर पर ही जिले , राज्य , राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने पर आकर्षक पुरस्कार मिलना सुनिश्चित कर दिया जाना चाहिए । जीतने के बाद नहीं , बल्कि पहले से ही पदक लाने वालों के लिए पुरस्कार का प्रावधान खेल नीति में पहले से ही कर देना चाहिए । कम से कम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेलने और जीतने वालों के लिए पेंशन मिलने की व्यवस्था खेल नीति में ही सुनिश्चित कर देना चाहिए ! इससे हमें ऐसे दुखद दिन नहीं देखने पड़े , जैसे 1978 में हॉकी विश्व कप खेल चुके खिलाड़ी गोपाल भेंगरा को अपने अंतिम दिनों में पत्थर तोड़ कर गुजारा करना पड़ा ! आज की ताजा हालात भी देख लीजिए ! इसी ओलिंपिक में हॉकी टीम में खेल चुकी झाड़खंड की अत्यंत गरीब परिवार की सलीना टेटे और निक्की प्रधान अपने घर पर नमक - प्याज के साथ माड़ - भात खा कर हॉकी का अभ्यास करने के लिए मजबूर है ! ऐसा नहीं होना चाहिए ! कभी भी नहीं होना चाहिए ! तो केंद्र सरकार इस पर गंभीरता के साथ कुछ सोचेंगी ? कुछ करेंगी ???