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आइपीएस अफसर बने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष..पार्टी ने एक और नौकरशाह पर जताया भरोसा..एक साल पहले ही ज्वाइन की थी पार्टी..विधानसभा चुनाव हार गए थे अन्नामलाई

आइपीएस अफसर बने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष..पार्टी ने एक और नौकरशाह पर जताया भरोसा..एक साल पहले ही ज्वाइन की थी पार्टी..विधानसभा चुनाव हार गए थे अन्नामलाई

रायपुर. भारतीय जनता पार्टी ने एक और नौकरशाह को पार्टी की कमान सौंपी है. पूर्व आईपीएस अफसर रहे के. अन्नामलाई को तमिलनाडु भाजपा की कमान सौंपी गई है. इसकी घोषणा पार्टी के महासचिव अरूण सिंह ने की. इसके पहले मोदी सरकार में 7 नौकरशाह मंत्री बनाए गए हैं.

कर्नाटक कैडर के एक पूर्व आईपीएस अधिकारी, अन्नामलाई ने अपने पैतृक करूर जिले में एक धर्मार्थ फाउंडेशन शुरू करने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वह वर्ष 2020 में भाजपा में शामिल हो गए थे। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कर्नाटक के पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई को तमिलनाडु इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है।  मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले अन्नामलाई ने पिछले साल अगस्त महीने में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए एल मुरुगन का स्थान लेंगे।

मुरुगन को मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के साथ ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है। भाजपा महासचिव अरूण सिंह की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया, ‘भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने के अन्नामलाई को तमिलनाडु का अध्यक्ष नियुक्ति किया है। उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

पिछल दिनों संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अन्नामलाई को करूर जिले की अरावक्कुरिची विधानसभा सीट से मैदान में उतारा था। हालांकि उन्हें द्रविड़ मुनेत्र कषगम के उम्मीदवार मोंजानुर एलांगो ने 24,000 से अधिक मतों से पराजित किया था।

कर्नाटक में नौ वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्य करने के बाद अन्नामलाई ने 2019 में पुलिस सेवा से त्याग पत्र दे दिया था। उस वक्त वह बेंगलुरू (दक्षिण) के पुलिस उपायुक्त थे। तमिलनाडु के करूर में जन्मे 2011 बैच के इस पूर्व आईपीएस अधिकारी के कर्नाटक के उडुपी जिले के कारकला के सहायक पुलिस अधीक्षक और उडुपी व चिकमंगलूर के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यकाल को याद किया जाता है।



चौधरी की उम्मीदें जवां

दूसरी ओर ऐसी कई खबरों को सुनने के बाद पूर्व आइएएस ओ पी चौधरी की उम्मीदें जवां हो जाती होंगी. चौधरी आइएएस थे और 2018 में विधानसभा चुनाव के आठ महीने पहले इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन किए थे. उन्हें खरसिया से विधानसभा की टिकट भी मिली
लेकिन चुनाव नही जीत सके. इसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि चोधरी को पार्टी में बड़ा पद दिया जायेगा मगर नई कार्यकारिणी में उन्हें मंत्री पद से संतोष करना पड़ा है. हालांकि पार्टी के नेता और आम आदमी भी उन्हें लम्बा खिलाड़ी मान रहे हैं.