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नए वर्ष के शुरुवात में जिलों के प्रभारी मंत्रियों में हो सकता है बदलाव

नए वर्ष के शुरुवात में जिलों के प्रभारी मंत्रियों में हो सकता है बदलाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वैसे तो 2 वर्षो से कांग्रेस की सरकार पूर्ण बहुमत से प्रदेश की सक्ता पर आसीन हैं साथ ही प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों को भी विभिन्न जिलों के प्रभार प्रबंधन की भी जिम्मेदार मिलती है जिससे कि कुशल नेतृत्व की छमता परस्पर बनी रहे। 

इसी क्रम में अब सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बाद जिले के मंत्रियों के प्रभार में बदलाव की सुगबुगाहट देखने को मिल रही हैं। 

आगामी मरवाही विधानसभा उप चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस पार्टी को अच्छा रिजल्ट मिला है बशर्ते आने वाले समय मे भी सक्ता संघठन को मजबूत करने के लिए यह बदलाव ,और प्रभार में परिवर्तन का स्वरूप देखने को मिलेगा। 

बस्तर जैसे इलाको में अधिक ध्यान:--

विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद राज्य के बस्तर संभाग के कुल विधानसभा सीटों में कांग्रेस को एकतरफा बहुमत मिली थी साथ ही साथ लोकसभा चुनाव में भी बस्तर की एकमात्र सीट जिस पर 10 को से भाजपा का कब्जा था उसे भी कांग्रेस जीतने में सफल हुई तो कहा जा सकता है कि इस बार जनवरी के प्रथम पखवाड़े में कैबिनेट मंत्रियों के जिले प्रभार में परिवर्तन का सबसे बड़ा टारगेट बस्तर के विभिन्न जिलों में प्रभारी मंत्रियों का नेतृत्व क्रम पर फोकस करना महत्वपूर्ण है बस्तर के सुदूर नक्सली जिलों में जैसे सुकमा बीजापुर में प्रभारी मंत्रियों के नेतृत्व की अति आवश्यकता है जिससे कि संगठन मजबूत हो सके राज्य के कैबिनेट मंत्रियों में से एक कवासी लखमा भी कोंटा विधानसभा से विधायक चुने जाते हैं लेकिन उनका प्रभाव धमतरी तथा महासमुंद जिला है लखमा महासमुंद और धमतरी जिले में अपनी पार्टी की पकड़ मजबूत बनाने के क्रम में हमेशा तत्पर रहते हैं।

संसदीय सचिवों को भी मिल सकती है जिमेदारी:-

बस्तर ही नहीं सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों में पार्टी के कुशल नेतृत्व ताकि कमी साफ झलक रही है इसी क्रम में यह कयास भी लगाया जा रहा है कि राज्य सरकार द्वारा संसदीय सचिवों को भी जनवरी के प्रथम पखवाड़े में जिलों का प्रभार मिल सकता है।