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सफाई का ठेका सामान्य सभा से पारित इसीलिए सभापति और सचिव जिम्मेदार

सफाई का ठेका सामान्य सभा से पारित इसीलिए सभापति और सचिव जिम्मेदार

भिलाई।  सफाई को लेकर विपक्ष द्वारा जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं  वह सिर्फ कपोलकल्पित बातें हैं चूँकि सफाई का पूरा मामला सामान्या सभा में पास हुआ सभापति और सचिव  ही इसके लिए जिम्मेदार हैं।  सभापति ने माना और सचिव ने नोट किया आगे जो भी कार्यवाही हुई वो इसी आधार पर हुई अतः नियमतः पुरे मामले के लिए सदन चलने वाले सभापति और नोटिफाई करनेवाले सचिव जिम्मेदार हैं 

महापौर परिषद की बैठक में  जानवर पृथक पृथक साफ़ साई से सम्बंधित प्रस्ताव में प्रशासकीय स्वीकृति एवं निविदा आमंत्रित किये जाने की अनुमति हेतु प्रकरण सामान्य सभा में रखे जाने का संकल्प पारित किया गया था!  जोनवार साफ़ सफाई से सम्बंधित प्रस्ताव में खुली चर्चा के दौरान वर्त्तमान में कोरोना महामारी को  दृष्टिगत रखते हुए यह सुझाव दिया गया यदि निविदा की प्रशासकीय स्वीकृति के साथ वित्तीय स्वीकृति प्रदान किया जाता है तो समय पर साफ़ सफाई व्यवस्था के निविदा के कार्य प्रारम्भ हो सकता हैद।  

 सभापति छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 में उल्लेखित प्रावधानों के तहत सदन का संचालन एवं कार्यवाही विवरण अक्षरसः पढ़कर हस्ताक्षर करने का संपूर्ण अधिकार रखते हैं. इसके बाद भी निगम अध्यक्ष अपने ही हस्ताक्षर किये गए संकल्प को गलत ठहराना इसके लिए स्वयं वे दोषी एवं असक्षम है।  

निगम सचिव भी मनगढ़ंत बातों का उल्लेख कर पत्रकारी करना यह भी निगम सचिव के लिए गैर जिम्मेदाराना कृत्य है।  यदि दबावपूर्वक कोई बात थी तो उसी समय सचिव आयुक्त नगर पालिक निगम भिलाई के संज्ञान  में क्यों नहीं लाया इसके बाद भी विभाग द्वारा सामान्य सभा में पारित निर्णय के उपरहंत भी प्रकरण को महापौर परिषद के लिए प्रेषित किया गया था। 

इससे स्पष्ट है कि निगम सचिव राजनीति के शिकार होकर मनगढंत तथ्यों को जाहिर कर रहा है।  क्यूंकि सदन में रखे गए प्रस्ताव की कार्यवाही विवरण तैयार कर अक्षरसः पढ़कर हस्ताक्षर करने का संपूर्ण अधिकार सभापति एवं निगम सचिवका है

बीजेपी के कुछ पार्षदों को यह पच नहीं पा रहा है कि इसीलिए वे बेवजह का मुद्दा बनाकर बेकार की बातें कर रहे हैं आखिर इतने दिनों बाद इनकी नींद कैसे टूटी है। 

इसमें यह बात भी समझना चाहिए की अगर सफाई के संकल्प में कोई गड़बड़ी नजर आई तो तीन महीने तक सभापति क्यों सो रहे थेअब अपने ही किये हस्ताक्षर वाले संकल्प को क्यूँ झूठा बता रहे हैं।   क्या सभापति ने बिना पढ़े संकल्प में हस्ताक्षर किया या अब कुछ और बात है। 

आखिर विपक्ष चुनाव से पहले ही एक नही है, सभापति की अनुपस्थिति अंतरकलह को स्पस्ट करती है अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए  पार्षद ओछी राजनीति पर उतर आए है।