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42वां काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह: ब्रिटेन के बेन शैरोक की फिल्म ' लिंबो ' को मिला बेस्ट फिल्म का गोल्डन पिरामिड अवार्ड

42वां काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह:   ब्रिटेन के बेन शैरोक की फिल्म ' लिंबो ' को मिला बेस्ट फिल्म का गोल्डन पिरामिड अवार्ड

अजित राय

42 वें काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में ब्रिटेन के बेन शैरोक की फिल्म ' लिंबो ' ने  बेस्ट फिल्म का गोल्डन पिरामिड अवार्ड जीतने के साथ ही दो और महत्वपूर्ण अवार्ड अपने नाम कर लिए। इस फिल्म को सिनेमा में सर्वश्रेष्ठ कलात्मक योगदान के लिए दिया जाने वाला हेनरी बरकत अवार्ड मिला। साथ ही फिल्म समीक्षकों के अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन ' फिप्रेस्की ' द्वारा संचालित अवार्ड भी इसे प्रदान किया गया। जूरी के अध्यक्ष मशहूर रूसी फिल्मकार अलेक्जांद्र सोकुरोव ने यहां काहिरा के ओपेरा हाउस में इन पुरस्कारों की घोषणा की।

लिंबो' फिल्म में सीरिया का एक नौजवान संगीतकार ओमर स्काटलैंड के एक गांव में शरणार्थी का एकाकी जीवन जी रहा है। उसे उम्मीद है कि सरकार उसे राजनैतिक शरण दे देगी और वह अपने परिवार को यहां ला सकेगा। वह शरणार्थियों के एक ऐसे समूह का हिस्सा बन चुका है जो उसी की तरह सपना देखते हैं। यहां से फिल्म हमें शरणार्थियों की अंतरंग दुनिया में ले जाती है जहां हंसी-मजाक के बीच दुःख और आंसूओं के विवरण है।


फिलिस्तीन के अरब नासिर और टार्जन नासिर की फिल्म ' गाजा मोन अमोर ' एक मछुआरे और खोमचेवाली की मुश्किल प्रेम कथा में गाजा पट्टी की हिंसा और राजनीति को पृष्ठभूमि की तरह इस्तेमाल करते हैं जहां जिंदगी की उम्मीदें अभी कायम है। इस फिल्म को बेस्ट अरब फिल्म का अवॉर्ड और स्पेशल जूरी मेंशन अवार्ड भी मिला।

बेस्ट अरब फिल्म और बेस्ट नान फिक्शन फिल्म का अवॉर्ड जीतने वाली लेबनान के विस्साम टेनिओस की फिल्म ' वी आर फ्राम देयर' में मिलाद और जमील नाम के दो भाई सीरिया से विस्थापित होकर लेबनान, तुर्की, ग्रीस, सर्बिया होते हुए स्वीडन और जर्मनी में शरण लेते हैं। जमील स्टाकहोम में बढ़ई का काम करता है और खुशहाल जीवन जी रहा है। मिलाद बर्लिन के एक जैज बैंड के लिए तुरही बजाने का काम करता है और अच्छा कमा खा लेता है। उनकी इस यात्रा में दुःख किसी अदृश्य साये की तरह उनका पीछा करता रहता है। उनके बचपन की खुशहाल यादें कभी उन्हें चैन से सोने नहीं देती। दोनों भाई फेसबुक और वाट्सऐप काल के सहारे अपना सुख दुःख साझा करते हैं। जिसने खुद विस्थापन न झेला हो और शरणार्थी का जीवन न जिया हो, वह कभी इसका दर्द नहीं समझ सकता।                     सर्वश्रेष्ठ निर्देशक को दिया जाने वाला ' द होरिजन आफ न्यू अरब सिनेमा ' का अवार्ड लेबनान के राय अरीदा को उनकी फिल्म ' अंडर द कंक्रीट ' के लिए दिया गया।  इस फिल्म का नायक एक  नौजवान गोताखोर है जो धरती और आकाश की समस्यायों से निजात पाने के लिए गहरे समुद्र में गोताखोरी का रिकार्ड बनाना चाहता है।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिस्र की मशहूर अभिनेत्री एलहाम शाहीन को अमीर रामसे की फिल्म ' कर्फ्यू ' में अविस्मरणीय अभिनय के लिए दिया गया। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार बुल्गारिया के पावेल जी वेस्नाकोव की फिल्म ' जर्मन लेसंश ' में यादगार अभिनय के लिए जुलियान वर्गोव को प्रदान किया गया।

 मिस्र के अमीर रामसे की फिल्म ' कर्फ्यू' (2020) में शहर का सन्नाटा एक चरित्र में बदल जाता है। अपने पति की हत्या करने के आरोप में एक औरत के जेल की सजा काटकर रिहा होने के चौबीस घंटे बाद ही 2013 की बरसात की एक सुबह सारे देश में कर्फ्यू लग जाता है। उस महिला ने अपने पति को इसलिए मार दिया था क्योंकि उसने अपनी सात साल की बेटी के साथ बलात्कार किया था। बेटी इतनी डर गई थी कि उसकी याददाश्त चली गई। यह वहीं समय था जब अरब देशों में अचानक बच्चियों और औरतों के साथ यौन उत्पीडन की घटनाएं बढ़ गई थी। बेटी मां को अपने पिता का कातिल समझकर उससे नफ़रत करती है। जेल से रिहा होने के बाद मां को कर्फ्यू के कारण बेटी और दामाद के साथ ही रहना पड़ता है। बेटी की भी एक सात साल की बच्ची है। मां, बेटी और उसकी बच्ची, इन तीन पीढ़ियों के साथ फिल्म अरब दुनिया में स्त्रियों की बदलती भूमिका की ओर इशारा करती है।

रूस के इवान तावेरदोव्स्की की फिल्म ' कांफ्रेंस ' को सिल्वर पिरामिड स्पेशल जूरी अवार्ड फार बेस्ट डायरेक्टर प्रदान किया गया। यह फिल्म  मास्को के दुब्रोत्का थियेटर में 23 अक्टूबर 2002 को चेचेन्या के इस्लामी चरमपंथियों द्वारा मारे गए 170 और बंधक बनाए गए 850 लोगों की यादों को ताज़ा कर देती है।

किसी निर्देशक की पहली या दूसरी फिल्म के लिए दिया जाने वाला कांस्य पिरामिड अवार्ड मिस्र की महिला फिल्मकार माए जाएद की फिल्म ' लिफ्ट लाइक ए गर्ल ' को दिया गया। इस फिल्म में अलक्जांद्रिया की चौदह साल की एक लड़की भारोत्तोलन में विश्व चैंपियन बनने का सपना देखती है और इसके लिए वह जी जान से जुट जाती है।

मिस्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लेखक नगीन महफूज की स्मृति में दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ पटकथा सम्मान मैक्सिको के जार्ज कुची को ' फिफ्टी आर टू ह्वेल्स मीट आन द बीच ' फिल्म के लिए दिया गया।

42 वें काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में करीब 92 फिल्में अलग अलग खंडों में दिखाई गई। भारत से केवल एक फिल्म थी , चैतन्य तम्हाणे की ' द डिसाइपल ' ( मराठी)। मराठी के चैतन्य तम्हाणे अपनी पिछली फिल्म ' कोर्ट' के कारण दुनिया भर में चर्चित हो चुके हैं जिन्हें वेनिस फिल्म फेस्टिवल में दो दो अवार्ड मिला था। ' द डिसाइपल '( शिष्य) भारतीय शास्त्रीय संगीत के वर्तमान हालात और गायकों की दुविधा और संघर्षों को सामने लाती है।

70 वें बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का गोल्डन बीयर अवार्ड जीत चुकी ईरान के मोहम्मद रसूलोफ की फिल्म ' देयर इज नो एविल ' फांसी की सजा पाए चार मुजरिमों की कहानी के जरिए जीवन और मृत्यु के साथ साथ ईरान में न्याय प्रणाली के कुछ बुनियादी सवालों को उठाती है। उन लोगों पर क्या गुजरती है जिन्हें अगली सुबह फांसी दी जानी है। इसी तरह अमेरिका की चीनी फिल्मकार क्लो झाओ की फिल्म ' नोमाडलैंड ' एक साठ साल की महिला की कहानी है जो पश्चिमी अमेरिका में आई भीषण आर्थिक मंदी में अपना सबकुछ गंवा चुकी है और अब घर बार विहीन बंजारे का जीवन जीने को मजबूर हैं। इस फिल्म को इस साल वेनिस फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म का गोल्डन लायन अवार्ड मिल चुका है।

कान फिल्म फेस्टिवल के इतिहास में पहली बार इस साल  शार्ट फिल्म खंड में बेस्ट फिल्म का ' पाम डि ओर' अवार्ड जीतने वाले मिस्र के समेह अला की फिल्म ' आई एम अफ्रेड टू फारगेट योर फेस ' एक जटिल प्रेम कथा है। एक प्रेमी  82 दिन अलग रहने के बाद अपनी प्रेमिका को दोबारा हासिल करने के लिए एक खतरनाक यात्रा करता है।

42 काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल की एक उपलब्धि यह है कि विश्व के महान फिल्मकार फेदेरिको फेलिनी ( इटली ) के जन्म के सौ साल पूरे होने पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। उनकी पांच बहुचर्चित फिल्मों के प्रर्दशन के साथ उनके जीवन और विचारों पर अलसेल्मा डेल ओलियो की विलक्षण डाक्यूमेंट्री ' फेलिनी आफ द स्पिरिट्स ' दिखाई गई।

अरब दुनिया और उनकी कला, सिनेमा और राजनीति के बारे में ' बर्ड्स आफ डार्कनेस ' (1995) फिल्म में  वहीद हमीद का लिखा संवाद गौरतलब है कि " जो भी इस देश को उपर से देखता है वह इसे पहचान ही नहीं सकता यदि वह इसे नीचे से देख ले।"  वहीद हमीद को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया।

कोरोनावायरस समय में अल गूना फिल्म फेस्टिवल के बाद मिस्र में 42 वां काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का आयोजन एक साहसिक पहल माना जा रहा है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कान फिल्म समारोह के निदेशक थेरी फ्रेमों ने मिस्र के फिल्म प्रेमियों को बधाई दी है।