breaking news New

सियान जतन क्लिनिक के अंतर्गत विशेष ओपीडी में बताए लू से बचने के उपाय

सियान जतन क्लिनिक के अंतर्गत विशेष ओपीडी में बताए लू से बचने के उपाय

राजनांदगांव। बुजुर्गों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सियान जतन क्लिनिक के अंतर्गत आयुष पॉली क्लिनिक में विशेष ओपीडी का संचालन किया गया। इसके अंतर्गत बुजुर्गों की प्रकृति परीक्षण के उपरांत चिकित्सकीय परामर्श, औषधि व आवश्यकतानुसार उन्हें पंचकर्म चिकित्सा प्रदान की गई। वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधित जानकारी एवं पांपलेट भी बांटे गए। 

संचालनालय आयुष रायपुर एवं जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. रमाकान्त शर्मा के निर्देशानुसार वृद्धों के स्वास्थ्य संरक्षण, संवर्धन एवं चिकित्सा के दृष्टिकोण से शहर के चिखली स्थित शासकीय आयुष पॉली क्लिनिक में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेष रूप से प्रभारी आयुष पॉली क्लीनिक डॉ. प्रज्ञा सक्सेना ने सेवाएं दी। कार्यक्रम अवसर पर बुजुर्गों को गर्मी में लू से बचने के उपाय के साथ ही आंवला व द्राक्षा के गुणों के विषय व आयुर्वेद की रसायन चिकित्सा के विषय में व्यापक जानकारी दी गई। इस दौरान बुजुर्गों को जानकारी दी गई कि स्मृति के स्तर परए  मनोवैज्ञानिक स्तर परए तंत्रिका तंत्र, उदर, गठियावात, दृष्टिए प्रोस्टेट संबंधी एवं अन्य मूत्र विकार आदि से जुड़ी बहुत सी परेशानियां स्वाभाविक रूप से इस अवस्था में जन्म लेती हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में बुजुर्ग असामान्य परिस्थिति में परेशान हो जाते हैं। बुजुर्गों को स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरुक करने के लिए ही आयुष पॉली क्लिनिक में यह विशेष ओपीडी का संचालन किया गया है, ताकि बुजर्गों का स्वास्थ्य सुदृढ़ बना रहे। उन्हें स्वास्थ्यगत परेशानी होने से बचाया जा सके।

इस संबंध में आयुष पॉली क्लीनिक की प्रभारी डॉ. प्रज्ञा सक्सेना ने बतायाः इस अवस्था में बुजुर्गों से संवाद का अभाव भी उनमें मानसिक रोगों का एक बहुत बड़ा कारण है। चालीस वर्ष आयु के उपरांत व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद में उल्लेखित अनेक रसायन औषधियों का उपयोग, सही आहार-विहार और मानसिक शांति से वृद्धावस्था के कारण होने वाले दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। स्वास्थ्यगत परेशानियों से बचने के लिए बुजुर्गवय लोगों को हल्का, सुपाच्य एवं संतुलित आहार लेना चाहिए। शारीरिक कर्महीनता से बचना चाहिए। मन को खुश रखने के लिए उन्हें अपनी अभिरूचि के अनुसार मनोरंजन व सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए। साथ ही अपनी शक्ति के अनुसार व्यायाम करना चाहिए तथा नियमित चिकित्सकीय परीक्षण करवाते रहना चाहिए। नियमित चिकित्सकीय परीक्षण करवाएं। इस अवसर पर संस्था में वृद्ध रोगियों की नेत्र जांच भी की गई।