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Couple के राधाकुंड में स्नान करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती

Couple के राधाकुंड में स्नान करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती

मथुरा । गोवर्धन की तलहटी में स्थित राधाकुण्ड में 28 अक्टूबर को अहोई अष्टमी पर्व पर संतान प्राप्ति की मनोकामना के साथ विवाहित युगल पवित्र डुबकी लगायेंगे।

मान्याता है कि राधाकुण्ड में स्नान करने से बांझ महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है। इस दिन राधाकुण्ड में मेला सा लग जाता है। किवदंतियों के अनुसार राधाकुण्ड और श्यामकुण्ड की उत्पत्ति की घटना द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अरिष्टासुर नामक राक्षस के बध करने से जुड़ी हुई है।

कंस ने अरिष्टासुर को श्रीकृष्ण को मारने के लिए भेजा था मगर वह मुरलीधर के हाथों मारा गया। अरिष्टासुर सांड का रूप धारण कर कान्हा की गायों में घुस गया था तथा बाद में वह श्रीकृष्ण को मारने दौड़ा था तो कान्हा ने उसका वध कर दिया था।

ब्रज की महानविभूति एवं कई धार्मिक पुस्तकों के लेखक आचार्य ब्रजेश जोशी ने बताया कि जब अरिष्टासुर का वध करने के बाद श्रीकृष्ण राधा से मिलने गए तो राधारानी ने उन्हें निज महल में यह कहकर प्रवेश करने से रोक दिया कि उन्होंने अरिष्टासुर के रूप में गोवंश की हत्या की है इसलिए वे सात तीर्थों में स्नान करके आएं तभी उन्हें प्रवेश मिलेगा।

इसके बाद कान्हा ने अपनी बांसुरी से खोदकर सभी तीर्थों को प्रकट किया जिससे श्यामकुण्ड बन गया तथा वे इसमें स्नान कर जब राधारानी के निज महल में गए तो उस समय राधारानी सखियों के साथ कुसुम सरोवर से कुसुम के फूल चुनने गई थीं।

उन्होंने बताया कि जब राधरानी फूल चुनकर निज महल में आईं तो श्रीकृष्ण ने उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया और कहा कि वे चूंकि उनकी अर्धांगिनी हैं इसलिए वे भी सात तीर्थों में स्नान करके आएं तब निज महल में उन्हें प्रवेश मिलेगा।

राधारानी ने इसके बाद श्याम कुण्ड के बगल में कंगन से कुण्ड खोद दिया । इसमें राधारानी को काफी श्रम करना पड़़ा। राधारानी की थकावट को देखकर श्रीकृष्ण ने सभी तीर्थों को राधाकुण्ड में भी प्रकट कर दिया। इसके बाद स्नान कर प्रसन्न मुद्रा में राधारानी निज महल में प्रवेश कर गईं।

जतीपुरा स्थित पुष्टिमार्गीय मथुराधीश एवं मदनमोहन मन्दिर के मुखिया ब्रजेश जोशी ने बताया कि इसके बाद श्रीकृष्ण ने न केवल श्यामकुण्ड को राधाकुण्ड से मिला दिया बल्कि राधारानी का मान बढ़ाने के लिए कहा कि जो विवाहित संतानविहीन युगल राधारानी की आराधना करेंगे तथा अहोई अष्टमी के दिन निर्जल वृत रखकर राधाकुण्ड में रात्रि 12 बजे साथ साथ स्नान करेंगे .

उन्हें संतान की प्राप्ति होगी। संतान प्राप्ति की आशा में राधाकुण्ड में हर साल अहोई अष्टमी पर बहुत बड़ी संख्या में विवाहित युगल साथ साथ स्नान करते हैं तथा कुण्ड का पूजन एवं आरती करते हैं।स्नान के बाद उन्हें कोई प्रिय फल या सब्जी को आजीवन न खाने का व्रत लेना होता है।

जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने बताया कि इस मेले के लिए न केवल साफ सफाई की व्यवस्था करने के आदेश दिए गए हैं बल्कि स्नान की रात्रि कुण्ड पर दिन जैसा प्रकाश करने को कहा गया है। डूबने की घटना को रोकने के लिए नाव के साथ गोताखोर भी लगाए गए हैं और पीएसी की फ्लड कम्पनी के जवान भी तैनात किये जाएंगे तथा शुद्ध खाद्य पदार्थों की बिक्री को सुनिश्चित किया जाएगा। दोनेा कुण्डों के घाट पर उठाईगीरी, चेन खीचने, जेबकाटने की घटना को रोकने के लिए वर्दीधारी एवं सादे वेश में पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।

स्नान करनेवाले लोगों को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिये स्नानस्थल की बैरीकेडिंग की जा रही है तथा मथुरा से राधाकुण्ड जाने के लिए अतिरिक्त बसें भी चलाई जाएंगी।किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा तथा घाट तक पहुंचने के लिए एकल आवागमन की व्यवस्था भी की जा रही है।