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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -देखा जो आईना तो मुझे सोचना पड़ा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -देखा जो आईना तो मुझे सोचना पड़ा

-सुभाष मिश्र

फराग रोहवी की ये गजल हालिया मुंगेली की जूतमपैजार के वाकिये को एक नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर रही है। अब तक जिस प्रदेश में सरकारी साहबों के रुतबे के सामने आम आदमी की बात छोड़ो कई बार तो जनप्रतिनिधि भी सहम जाते थे, उसी राज्य में गत दिनों एक बिल्कुल उलट घटना हो गई। दरअसल मुंगेली जिले में जहां की एक महिला जिला पंचायत सदस्य एक आईएएस अफसर को मारने चप्पल निकाल लेती है, अगर मौके पर मौजूद कर्मचारी बीच बचाव नहीं करते तो हो सकता है ये महिला अपने इरादे पर कामयाब भी हो जाती। इस घटना की शिकायत संबंधित 2017 बेच के आईएएस अधिकारी ने मुख्य सचिव और आईएएस एसोसिएशन से की है। घटना की जानकारी मिलते ही आईएएस एसोसिएशन ने आपात बैठक भी बुला ली। हालांकि इससे पहले राज्य में आईएएस-आईपीएस अफसरों द्वारा आम जनता के साथ ही अपने मातहत अधिकारी-कर्मचारियों के साथ बदसलूकी के कई मामले सामने आ चुके हैं। सूरजपुर में कलेक्टर ने सरेआम एक युवक को थप्पड़ मारा था और मोबाइल तोड़ दिया था। कुछ दिन पहले बलौदाबाजार के एसपी अपने ही महकमे के सिपाही को धमका रहे थे। इस तरह के कई मामले सामने आ जाते हैं। जो किसी तरह कैमरे में कैद हो जाते हैं, जहां लोग इस तरह अफसरों की दंबंगई के आदि हो गए थे। जिस बिरादरी का आम तकिया कलाम उल्टा टांग दूंगा हो उसे यदि एक जिला पंचायत की एक महिला सदस्य चप्पल से मारने पर उतारू हो जाये तो यह निश्चित ही सोचने की बात है। हम किसी तरह के भी बदसलूकी का समर्थन नहीं करते लेकिन इस पर जिस तरह ने इस घटना को लेकर रिएक्ट किया जा रहा है काफी चौकाने वाला है। गत दिनो नगरीय निकाय के चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने जब प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी को सरेआम तलुवे चांटने वाली कहा, गरियाया और वो वीडियो भी खूब वायरल हुआ तब साहब बहादुर लोग चुप रहे। दुर्ग की चुनावी रैली में डॉ रमन सिंह ने कहा-कान खोलकर सुन लो कलेक्टर और एसपी हमारे कार्यकर्ता को आतंकित कर ना छोड़ दो। तुम्हारे नाम मेरा कार्यकर्ता लिख रहा है। इनके तो तीन साल पूरे हो चुके हैं। दो साल बचे हैं फिर तुम्हारा हिसाब करेंगे। तलवे चाटना बंद करो, राजनीति करोगे, रणनीति करोगे तो हम हिसाब करेंगे। अधिकारियों को गिने-चुने दिन ही रहना है। उन्हें इतने तलवे चाटने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, जबरदस्ती इतना स्वामिभक्त मत बनो, वक्त बदलता है। सरकार के दो साल बीत गए हैं। तीन साल बाद हिसाब-किताब करने हम भी आएंगे। इसलिए ज्यादा गर्मी न दिखाएं।

मुंगेली की इस घटना के बारे में जो रिपोर्ट सामने आई है उसके अनुसार जिला पंचायत सीईओ के चेम्बर में किसी काम को लेकर लगभग 1.30 बजे महिला जिला पंचायत सदस्य पहुँची थीं। आईएएस ने गैरवाजिब काम बताते हुए उसे करने से इंकार कर दिया। इस पर दोनों में बहस हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला जिला पंचायत सदस्य ने सीईओ को मारने के लिये चप्पल निकाल ली। आईएएस ने देखा कि महिला का मामला है, चेम्बर में सीसीटीवी भी नहीं है, इसलिए बचने के लिए चेम्बर से भागे तो जिला पंचायत सदस्य भी चप्पल लिए दौड़ी।
घटना के बाद महिला सदस्य जिला पंचायत अध्यक्ष व अन्य सदस्यों के साथ जातिगत गाली और दुर्व्यवहार की शिकायत लेकर एसपी के पास पहुँच गयी। जिला पंचायत सदस्य ने आरोप लगाया है कि वे अपने क्षेत्र के कामकाज को लेकर जिला पंचायत सीईओ के केबिन में पहुंची थी, इस उन्हें जातिगत रूप से प्रताडि़त किया गया। उनको जातिसूचक गाली दी गई है। वहीं जिला पंचायत सीईओ का कहना है कि जिला पंचायत सदस्य के द्वारा उनके साथ न सिर्फ अभद्रता की गयी,बल्कि उन्हें मारने के लिए चप्पल उठा ली गई, जिसको लेकर वे थाने में एफआईआर दर्ज करा रहे हैं। सीईओ ने कहा कि निर्माण कार्य स्वीकृति नहीं होने की बात को लेकर मेरे साथ विवाद की है।

महात्मा गांधी ने कहा कि आप दूसरों के साथ वो व्यवहार न करो जिसे खुद के साथ होना पसंद नकरें। अगर इस महा वाक्य को हमारे देश की ब्यूरोक्रेसी समझ ले तो सारी समस्या का हल निकल सकता है। दरअसल देश में आईएएस और आईपीएस बनते ही एक आम युवक खुद को बेहद खास समझने की भूल कर बैठता है। उसे इस बात को लेकर नजर अंदाज करता है कि वो एक जन सेवक है वो अपने व्यवहार से जनता को ही सेवक साबित करने लगाता है। छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार में तो इन अफसरों के एक खास वर्ग का इस कदर बोल बाला था कि वे सत्ता पक्ष के विधायकों को भी कुछ नहीं समझते थे। कुछ अफसरों से तत्कालीन मुख्यमंत्री इस कदर घिर गए थे कि धीरे-धीरे वे आम जनता, विधायक फिर अपने मंत्रियों तक से दूर चले गए थे। प्रदेश में भूपेश बघेल की सरकार में भी अफसरों की बेअदबी के कई मामले सामने आए हैं लेकिन ज्यादातर मसलों में अफसरों पर कार्रवाई भी हो गई।

खुज्जी विधानसभा की विधायक छन्नी साहू के पति चंदू साहू का गाली-गलौज देने का मामला अबतूल पकड़ता जा रहा है। पूरे मामले में पीडि़त प्रार्थी ने कहा कि एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने के बावजूद भी विधायक पति चंदू साहू की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामला रेतखनन से जुड़ा है। बहुत से जनप्रतिनिधि बहुत तरह के खनन और दोहन के कार्य में लगे रहते हैं जब उन्हे कोई रोकता टोकता है तो फिर धमकी-चमकी, मारपीट की स्थिति निर्मित हो जाती है।

इधर के सालों में जिस तरह से सावर्जनिक जीवन में सहनशीलता, सद्व्यवहार और धैर्य की कमी दिखाई दे रही है, वह चिंतनीय है। लोग छोटी-छोटी घटनाओं पर एक-दूसरे के साथ गाली-गलौच, मारपीट पर आमदा हो जाते हैं। जो लोग राजनीति में है उनसे भी सुचिता और शांतिपूर्ण आचरण की उम्मीद की जाती है। अपने नेता के आचरण को देखकर ही उनके कार्यकर्ता, समर्थक आचरण करते हैं। जहां तक नौकरशाही के धैर्य, संयम और विवेकपूर्ण कार्य प्रणाली का सवाल है तो उन्हें इस बात के लिए बकायदा प्रशासनिक अकादमियों और अलग-अलग संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जाता है। देश की श्रेष्ठ और कठिन परीक्षा उत्तीर्ण करके आने वाले युवा अधिकारी बहुत बार काम के दबाव को नहीं झेल पाते हैं या फिर उन्हें इस बात का मुगालता हो जाता है कि वे खुदा है। सूचना का अधिकार आने और नई मोबाईल टेक्नालाजी, कैमरे के जरिए अब कोई भी आचरण छिपा नहीं है। लोगों के बीच आये दिन हमारे शासकीय तंत्र, खास करके बड़े अधिकारियों के आचरण को लेकर सवाल उठते है। बहुत सारे मातहत कर्मचारी-अधिकारी इनके अभद्र आचरण, गाली गलौच की शिकायतें दबे स्वर में कहते रहते है।

इस मामले में ये भी देखना होगा कि इस घटना के पीछे क्या वजह है आखिर शांत तासिर वाले इस राज्य के लोगों में इस तरह उबाल क्यों आ रहा है? आखिर कौन सा ऐसा काम था जिसको लेकर एक महिला नेता आईएएस अफसर के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाती है। अफसरों को इस बदलाव को समझना होगा। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में काम के दौरान उन्हें लोगों को और जनप्रतिनिधियों की बात ध्यान से सुनने की आदत डालनी होगी। अगर वे अपने लालफीताशाही अफसरी की छवि से बाहर नहीं निकलेंगे तो इस तरह की दुर्भाग्यजनक घटनाएं हमें और देखने को मिल सकती है।

प्रसंगवश फराग रोहवी की गजल के चंद शेर

देखा जो आईना तो मुझे सोचना पड़ा
ख़ुद से न मिल सका तो मुझे सोचना पड़ा


मुझ को था ये गुमाँ कि मुझी में है इक अना
देखी तिरी अना तो मुझे सोचना पड़ा