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रणवीर सिंह ने कपिल देव की भूमिका के लिए लंदन में पांच महीने कठिन ट्रेनिंग ली: कबीर खान

रणवीर सिंह ने कपिल देव की भूमिका के लिए लंदन में पांच महीने कठिन ट्रेनिंग ली: कबीर खान


अल गूना ( मिस्र) से अजित राय

पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान कपिल देव की भूमिका निभाने के लिए अभिनेता रणबीर सिंह ने अपना सारा काम छोड़कर लंदन के लार्ड्स स्टेडियम में पांच महीने कठिन ट्रेनिंग ली। क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने के ऐतिहासिक क्षणों पर बनी फिल्म ' 83' के निर्देशक कबीर खान ने यहां एक खास मुलाकात मे यह बात कहीं। यह फिल्म दुनिया भर में इस साल क्रिसमस पर रिलीज होगी। कबीर खान यहां 5वें अल गूना फिल्म फेस्टिवल ( मिस्र) के मुख्य प्रतियोगिता खंड की जूरी के सदस्य हैं।

कबीर खान ने ' 83' फिल्म को ' न्यूयार्क' , ' एक था टाईगर', ' बजरंगी भाई जान' जैसी अपनी पिछली ब्लाक बस्टर फिल्मों से अलग बताते हुए कहा कि यह फिल्म बालीवुड मेनस्ट्रीम सिनेमा में नए युग की शुरुआत करेगी। उन्होंने कहा कि 1983 में हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप के मैचों की वीडियो रिकार्डिंग का इस्तेमाल हम नहीं कर सकते थे क्योंकि वे फर्स्ट जनरेशन वीडियो थे। इसलिए हमें सबकुछ नए सिरे से रिक्रिएट करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सुनील गावस्कर की भूमिका के लिए अभिनेता का चुनाव सबसे ज्यादा मुश्किल था। कई महीने कोशिश करने के बाद इस रोल के लिए ताहिर हुसैन भसीन को चुना गया जिन्होंने नंदिता दास को फिल्म ' मंटो ' बेहतरीन अभिनय से हमें प्रभावित किया था।  इंडियन क्रिकेट टीम के बाकी सदस्यों की कास्टिंग में एक साल लग गए। दो हजार कलाकारों के आडिशन के बाद यह काम पूरा हुआ।

कबीर खान ने कहा कि लंदन के लार्ड्स स्टेडियम में छह महीने की अथक कोशिश के बाद हमें शूटिंग की इजाजत मिली।  लार्ड्स के कई हिस्से पहली बार किसी फिल्म में दिखाई देंगे। मसलन लांग रूम जहां से खिलाड़ी निकलकर स्टेडियम में आते जाते हैं। आज इंग्लैंड में नंबर वन खेल क्रिकेट नही फुटबाल है। लार्ड्स वालों को लगा होगा कि इस फिल्म के बहाने दुनिया भर में एक बार फिर लार्ड्स स्टेडियम और क्रिकेट की चर्चा होगी। इसलिए उन्होंने फिल्म की शूटिंग में बहुत सहयोग किया।

कबीर खान ने कहा कि कभी कभी फिल्म की कहानी खुद आपके पास पहुंच जाती है। सबसे पहले संजय पूरण सिंह चौहान ने इसे लिखा, फिर यह दक्षिण भारत के वासन बाला तक पहुंची। किसी कारण से यशराज फिल्म्स ने इसे बनाने से मना कर दिया, फिर फैंटम के पास गई और वहां से मेरे पास आई और रिलायंस ने पैसा लगाया।

कबीर खान ने कहा कि क्रिकेट मेरा सब्जेक्ट कभी नहीं रहा। जब यह फिल्म मेरे पास आई तो मैंने दो साल इस विषय पर रिसर्च किया। मैं इससे पहले  कई डाक्यूमेंट्री बना चुका था। लेकिन 1983 के क्रिकेट वर्ल्ड कप के हर महत्वपूर्ण क्षण को दोबारा फिल्म में जीवंत करना एक बड़ी चुनौती थी। खिलाड़ियों के कपड़े, जूते, गेंद, बल्ले, बोलने और चलने के अंदाज से लेकर  उनकी सोच मे उतरना जोखिम भरा था। हमने अपने सहयोगियों से कहा कि हमें तथ्यों के साथ कोई छूट नहीं लेनी है। हर चीज वैसी ही चाहिए जैसी 1983 में थी।

कबीर खान ने कहा कि कास्टिंग के बाद हमने सारी टीम और तब के कोच बलविंदर सिंह संधू के साथ धर्मशाला में दो हफ्ते की सघन वर्कशॉप की जिससे कलाकारों में एक टीम भावना आ जाए।  हम अपनी सारी तैयारी के साथ शूटिंग के लिए लंदन गए थे।

कबीर खान ने कहा कि यह फिल्म बालीवुड मेनस्ट्रीम सिनेमा में मील का पत्थर साबित होगी और इससे नया दौर शुरू हो सकता है जो हिंदी सिनेमा को दुनिया भर में शोहरत दिलाए।  भारत में क्रिकेट के साथ एक समस्या यह है कि कोई भी खड़ा होकर बताने लगेगा कि कपिल देव या सुनील गावस्कर को कैसे खेलना चाहिए, भले ही उसने जीवन में कभी बल्ला-गेंद छुआ तक नहीं हो। ' 83 ' की शूटिंग और एडिटिंग मे हमें हर छोटी से छोटी चीज का ध्यान रखना पड़ा है।

कबीर खान पहली बार  1995 में यहां के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक का इंटरव्यू करने पत्रकार सईद नकवी के साथ मिस्र की राजधानी काहिरा आए थे। दूसरी बार 2009 में वे यहां आए थे जब उनकी फिल्म ' न्यूयार्क'  को काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की ओपनिंग फिल्म बनाया गया था।  कबीर खान कहते हैं कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि उनकी फिल्म ' न्यूयॉर्क' की पायरेटेड कापी सारे अरब वर्ल्ड में छा गई थी।

कबीर खान ने कहा कि बालीवुड में एक अच्छी बात यह हुई है कि इतिहास में फिल्म  निर्माताओं की दिलचस्पी बढ़ी है। पहले ऐसी कहानियों को कोई हाथ नहीं लगाता था। उन्होंने कहा कि उनकी अगली फिल्म इतिहास से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि केवल पैसा या बाक्स आफिस पर सफलता ही अच्छी फिल्मों का पैमाना नहीं है। ऐसी कई सफल फिल्में आप आधे घंटे भी नहीं देख सकते। हमें ऐसी अच्छी फिल्में बनानी चाहिए जो ज्यादा नहीं तो कम से कम अपनी लागत निकाल ले। निर्माता को थोड़ा मुनाफा तो चाहिए, तभी वह अगली फिल्म में पैसा लगाएगा।