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25 जोड़ी ट्रेन, स्पेशल की श्रेणी से हुई बाहर, लोकल और जे डी अभी भी स्पेशल

25 जोड़ी ट्रेन, स्पेशल की श्रेणी से हुई बाहर, लोकल और जे डी अभी भी स्पेशल


दिव्यांग, बुजुर्ग और एमएसटी धारक यात्रियों की सुविधा पर चुप्पी

राजकुमार मल

भाटापारा- 25 जोड़ी एक्सप्रेस और सुपरफास्ट एक्सप्रेस से स्पेशल केटेगरी हटा ली गई है लेकिन आरक्षण की बाध्यता बदस्तूर जारी है और टिकट की दर भी जस- की-तस है। दिलचस्प है कि जे डी और लोकल अब भी स्पेशल के दर्जे के साथ ही चल रही है।

21 महीने से रेल यात्रा की स्थिति, जैसी बनी हुई है, फिलहाल उसमें राहत की उम्मीद मत कीजिए क्योंकि धरना या आंदोलन जैसा कोई विरोध काम नहीं आता। सांसद और विधायकों की भी नहीं सुनी जाती। हद तो यह कि बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों तक की दिक्कत रेल प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है। अपनी ओर से केवल एक सुविधा ,ए टी वी  मशीन के रूप में जरूर लौटाई है लेकिन जिस राहत की उम्मीद थी, वह अब भी दूर है।



स्पेशल नहीं यह ट्रेन 

कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर से एहतियात के तौर पर स्पेशल दर्जे के साथ चल रही शिवनाथ, सारनाथ , संपर्क क्रांति, अमरकंटक , अंबिकापुर , गोंडवाना एक्सप्रेस, जम्मूतवी, गरीब रथ, एर्नाकुलम, बेतवा, वैनगंगा, बरौनी, छत्तीसगढ़, तिरुपति, इंटरसिटी, साउथ बिहार, लिंक, बीकानेर, भगत की कोठी के अलावा मुंबई- हावड़ा- मुंबई मेल, अहमदाबाद- हावड़ा -अहमदाबाद एक्सप्रेस, हावड़ा- पुणे- हावड़ा, पुरी- जोधपुर -पुरी और ओखा एक्सप्रेस, स्पेशल केटेगरी से बाहर की जा चुकी है। पुराने नंबरों के साथ परिचालन में आने के बाद, इंतजार है पुरानी दरों का, जिससे 21 महीने से ज्यादा पैसे देकर यात्रा की मजबूरी से छुटकारा मिलेगा।

यह अब भी स्पेशल

रायपुर- बिलासपुर और दुर्ग- डोंगरगढ़ के बीच चल रही लोकल ट्रेन अभी भी स्पेशल बनी हुई है। सुविधा सिर्फ बगैर आरक्षण यात्रा की ही है, इसके बावजूद इन ट्रेनों में दोगुना किराया देकर यात्री आना-जाना करने के लिए मजबूर हैं।

दिव्यांग और बुजुर्गों को इंतजार

दिव्यांग और सीनियर सिटीजन की पात्रता रखने वाले यात्री की परेशानी सहज ही तब समझी जा सकती है, जब ऐसे यात्रियों को रिजर्वेशन के लिए कतार में लगा हुआ देखा जाता है लेकिन रेल प्रशासन को ना परेशानी से मतलब है, ना आर्थिक हानि से।


इस पर भी मौन

दैनिक काम पर जाने वाले मजदूर और नौकरीपेशा वर्ग का यात्री या तो रिजर्वेशन पर यात्रा कर रहा है या फिर लोकल में दोगुना किराया देकर पहुंच रहा है। 21 महीने से एम एस टी की सुविधा से वंचित यात्रियों की परेशानी से भी दूरी बना ली गई है।

इसकी वापसी

टिकट वेंडिंग मशीन चालू कर दिए गए हैं लेकिन यह केवल कतार की भीड़ से बचा रहे हैं। टिकट की बढ़ी हुई दर यहां भी ली जा रही है। यानी आर्थिक नुकसान यात्रियों को अभी भी हो ही रहा है। इसलिए उम्मीद मत कीजिए कि राहत शीघ्र मिलेगी।