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मध्यप्रदेश की डायरीः भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणब पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ) - "कल तलक कुछ और थे वो, आज कल कुछ और है। कल तलक मुँह ज़ोर थे वो,आज कल मुँह चोर है।

 मध्यप्रदेश की डायरीः भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणब पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ) -

सिर्फ बाक़ी रह गया बेलौस रिश्तों का फ़रेब
कुछ मुनाफिक हम हुए, कुछ तुम सियासी हो गए।

सुपर 30 का दम-- मध्य प्रदेश के सियासी हालात में ये शेर इसलिए  प्रसांगिक हो जाता है क्योंकि मध्यप्रदेश में कांग्रेस में पार्टी के ही लोग अब अपने सियासी हालात और भविष्य को बचाने के चक्कर मे हद से गुजरने को तैयार है। कोंग्रेस विधायकों के लगातार इस्तीफों का दौर 30 की संख्या पर जाकर थम सकता है। निमाड़ और विन्ध्य क्षेत्र के साथ महाकौशल से कोंग्रेस के लिए बुरी खबर आ सकती है, छन कर आ रही खबरों के अनुसार भाजपा का गणित बहुमत से ज्यादा विधायक जुटाने का है ताकि सरकार स्वंतंत्र रूप से चलाने में दिक्कत न हो। इधर सिंधिया समर्थक विधायको से , लगभग दोगुनी संख्या प्राप्त की जा सके ऐसी कवायद की जा रही है ताकि भाजपा संगठन ज्योतिरादित्य सिंधिया के किसी दबाव का सामना खुल कर कर सके । फिलहाल भाजपा अपने मिशन 30 से मात्र 3 विधायक संख्या से पीछे है। दूसरी तरफ कोंग्रेस के पास हर विकेट को भौचक्का हो कर देखने के सिवा , कुछ भी नही है " बेसाख़्ता यूं ही निकलता है अब ज़ुबान "से ओह ये होगा सोचा न था , बात सही भी है पहले भी कब सोचा था? जब सत्ता में थे ,जो अब आश्चर्य हो रहा है?। ये वो विधायक थे जिनको टेकेन फ़ॉर ग्रांटेड लिया गया था। अब निमाड़ को ही ले लो तो नारायण पटेल और सुमित्रा देवी ऐसा कर देंगे ऐसा अंदाज़ा भी नही था लेकिन कांग्रेस आलाकमान हैरान है कि प्रदेश के दिग्गजों की बिल्ली उनके साथ म्याऊं क्यों करते जा रही है। चलिये जाने देते है "भाजपा का अश्वमेध" का घोड़ा तो फिलहाल सरपट दौड़ रहा है।
"निमाड़ का नाहर " कहलाने वाले  स्वर्गीय सुभाष यादव की विरासत सम्हालना उनके पुत्र अरुण यादव के लिए चुनोतिपूर्ण साबित हो रहा है इस बीच उनके भाजपा में शामिल होने की खबर से अटकलें  तेज हो गई थी  इसके बाद तो कोंग्रेस में हलचल हो गई बाद में अरुण यादव ने भी नागपंचमी पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर विवादास्पद ट्वीट कर दिया, जिसके कारण इस अफवाह पर विराम लग गया ।इस ट्वीट के बाद सिंधिया के समर्थन में भाजपा के कई लोग पलटवार के लिए सामने आ गए  बचाव अपनी जगह है लेकिन इस बीच भाजपा के पुराने दिग्गज रहे इंदौर के कवि नेता सत्यनारायण सत्तन ने दलबदलुओं पर कविता लिख कर तहलका मचा दिया , इस कविता की कुछ बानगी देखिए
खड़े थे जिस ठौर पर, उस ठौर को ठोकर लगा, नफरते जिस ठौर से थी, आ गए उस ठौर  हैं।
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं- अब भाजपा के अंदर भी कुछ ठीक  नही चल रहा है। इंदौर से भाजपा के एक बेहद ऊर्जावान युवा नेता का शिकार कोंग्रेस करना चाहती है। बताते  है ये युवा नेता संघ की पसंद का है पर उपेक्षित है और बस्तियों में जबर्दस्त मार  पकड़ रखता है ,कोंग्रेस को तो लग रहा है कि ये युवा नेता विधायक मटेरियल है लेकिन भाजपा संगठन है कि इस युवा को ये ले लो,वो ले लो बोलकर टरका रहा है,  बताया जा रहा है कोंग्रेस का प्रस्ताव दूर की कौड़ी  था, अब कौन तीन नंबर के लिए चार साल तक इंतजार करें, फिर हिंदुत्व के मुद्दे से खासा लगाव फिर कुछ राष्ट्रीय मुद्दे ऐसे की जिसका कांग्रेस में कोई अस्तित्व ही नही तो  इस लिए इस युवा ने इस प्रस्ताव से जैसे तैसे पिंड छुड़ा लिया है। और संगठन से ही उम्मीद का दामन थामे,निष्ठा के साथ  डंडे झंडे उठा कर काम पर लग गया है । लेकिन कोंग्रेस का ये दांव आला दर्जे का था,ये और बात है कि कोंग्रेस का दांव सही ढंग से लगा नही अन्यथा संगठन को  भविष्य में तीन नम्बर पर जोर लगाना  पड़ जाता बहरहाल  इस युवा ने सलकनपुर वाली मां दुर्गा पे सब छोड़ दिया है।
जबरा मारे रोवा न दे--  फिर से एक बार सरकार आई साथ मे उम्मीदे भी लाई थी, की चलो रमेश मेंदोला जी को मंत्री बनाया जायेगा, लेकिन अपेक्षा और उपेक्षा दोनों में सामने वाला अक्षर बदल जाये तो सब कुछ बदल जाता है। भाजपा संगठन है कि बस परीक्षा लेने में लगे रहता है, बताया जा रहा है कि दादा दयालु को अब सांवेर का चुनाव जीतने के बाद कुछ करते है का फिर से झुनझुना दे दिया गया है। जाने माने सूत्र बताते है कि इंदौर से इतने नाम आ गए थे कि किस को मंत्री  बनाये और किसको न बनाये में खेल बिगड़ गया ,  मंत्रिमंडल की लिस्ट में कुछ नाम तो बस किसी का खेल बिगड़ने के लिए ही डाले गए थे ये  नाम किसने और क्यूं डाले ? अब ये तो कोई भी नही बात पा रहा है लेकिन उषा ठाकुर अब केबिनेट मंत्री है, नाम का लिस्ट में जुडना, फिर उसकी दावेदारी और फिर पीछे हट जाना, यही तो आर्ट ऑफ नेगोसिएशन है, नतीजे भी आपके सामने है।
कोंग्रेस  प्रोएक्टिव कब होगी-  रणनीति में तीन शब्द है अवसर , विस्मय और घात इन तीनो में फिलहाल भाजपा कोंग्रेस से बढ़त बनाये हुए है अवसर का सटीक चुनाव, विरोधियों को विस्मित करना और सही समय पर घात करना तो कांग्रेस की हालत सन्न सन्न ही रहती है सम्हल कर पलटवार करने का कोई अवसर नही होता।लगता है अभी प्रतिक्रिया भी ठीक ढंग से नही कर पाने की स्थिति है और इसमें सुधार की गुंजाइश में बहुत समय लगने वाला है ।
कोरोना का कहर - मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पॉजिटिव पाए गए तो हड़कंप मच गया फिर  कृषि मंत्री कमल पटेल भी और कई अन्य लोग अपन टेस्ट कराने में जुट गए। वल्लभ भवन से ले कर हर सरकारी दफ्तरों में रोज़ ही किसी न किसी के कॅरोना पोजिटिव होने की खबर लगातार मिल रही है। इस लेख के लिखे जाने तक कृषिमंत्री कमल पटेल की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस कॅरोना काल मे भी बिना मास्क के घूमने और मीटिंग करने का साहस दिखाया है तो इसमें उनका संदेश भी है की सभी नेताओं में उनकी इम्युनिटी सबसे अधिक स्ट्रांग है यहां तक कि  मध्य प्रदेश में लॉक डाउन की घोषणा भी बिना मास्क लगाए ही कि थी। भोपाल शहर में पिछले 10 दिनों से हर रोज़ 100 पोज़िटिव मरीज मिलने की पुष्टि हो रही है लेकिन अब अब यह संख्या  प्रतिदिन 200 तक पहुंच गई है।भोपाल में अब तक कुल संख्या 5720 हो गई है । इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने चिरायु हॉस्पिटल से ही कामकाज सम्हाल लिया है।
29 जुलाई को है अंतराष्ट्रीय बाघ दिवस- 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस धूम धाम से गुज़र गया। 1960 के दशक में मध्यप्रदेश  के मुख्य सचिव रहे आर पी नरोन्हा ने वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिये विशेष रुचि दिखाई थी चूंकि  वो बस्तर के कलेक्टर थे और उनका सौंदर्य बोध काफी अच्छा था तो  इसका असर सरकारी काम काज में भी आ गया जो आज तक कायम है यही कारण  था कि बाघ संरक्षण जैसे कार्यक्रमो को मध्यप्रदेश में गति मिली उन्ही के समय मध्यप्रदेश को "स्टेट ऑफ टाइगर एंड टेम्पल्स" कहा जाने लगा और प्रसिद्ध लेखक "डॉम मोरिस" ने अपनी किताब "आनसर्ड बाय फ्लूट" में इस वाक्य का प्रयोग किया था। भोपाल शहर भारत देश का एकमात्र शहर है जिसकी सीमा से एक किलोमीटर बाहर होते ही बाघ देखे जा सकते है। मध्य प्रदेश की राजनीति में भी "टाइगर अभी ज़िंदा है " ये जुमला ज्यादा पुराना हुआ नही है फिर इसके बाद दिग्विजय सिंह ने भी अपने संस्मरण बताए कि टाइगर को शूट नही शूट करना कैसे शुरू हुआ,किसी ने यशवंत सिंह की लिखी पुस्तक का हवाला दिया की राजनीति के जंगल मे बहुत सारे खतरनाक जंगली जानवर है इत्यादि  लेकिन मार्के की बात ये है कि यदा कदा बुंदेलखंड की बब्बर शेरनी भी अपने होने का अहसास कराने लगी है और और जो "ज़िंदा" है वो भी उनका आशीर्वाद लेने उनके घर जा चुके है तो समीकरण कुछ और भी है जो अभी स्पष्ट नही पर आगे क्या होगा होगा वक्त तय करेगा । बहरहाल मध्यप्रदेश ने टाइगर संरक्षण का अपना वादा दोहरा दिया है क्योंकि "टाइगर तो ज़िंदा है साहब।
मुख्यमंत्री शिवराज ने पलट दिया तीन नए जिले बनाने का निर्णय । नागदा, चाचौड़ा और मैहर ज़िला बनते बनते रह गए कमलनाथ ने बगावत को सम्हालने के लिए आनन फानन में तीन जिलों की घोषणा भी कर दी थी लेकिन अब इस निर्णय को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलट दिया है। अब आगे इन के राजनैतिक परिणाम क्या होंगे इसका इंतजार रहेगा।
बलराम तालाब योजना - मध्यप्रदेश में बहुत पहले शुरू हुई बलराम तालाब योजना का कोई आता पता नही मिल पा रहा है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भाजपा शासन के समय इस पर काफी काम हुआ था लेकिन दूसरी अन्य योजनाओं की तरह इसे वापस लागू करने में किसी ने दिलचस्पी नही दिखाई है उम्मीद है देर सबेर इस पर भी ध्यान दिया जाएगा क्योंकि मानसून का इस बार क्या हाल होगा पता नही फिर आग लगने पर गढ्ढा खोदने में  तो हर सरकार की महारत होती है ।
चलते चलते- भाजपा संगठन के बड़े अधिकारी सुहास भगत, आशुतोष तिवारी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा कॅरोना पॉज़िटिव पाए गए है। और भी कई बड़े नेताओं के पॉज़िटिव होने की खबर आ रही है। इस बीच प्रदेश सरकार में  ज़ल संसाधन मंत्री तुलसी भैया की ज़ुबान है कि बार बार फिसल जाती है अभी हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को कलंक
बता दिया था, और अभी एक वीडियो आया है जिसमे वो सिंधिया जी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बात रहे है कोंग्रेस ने भी मौका हाथ से नही जाने दिया और तंज कसा की मुख्य मंत्री शिवराज हॉस्पिटल क्या गए आपने तो तख्ता ही पलट दिया। पिछले दिनों विकास दुबे एनकाउंटर मामले में भी मंत्री जी की जुबान फिसल गई थी, खैर अब ये तो आदत है जाते जाते ही जाएगी। ऐसा क्यों हो रहा है इसका जवाब "सत्तन गुरु" की हाल ही में लिखी पंक्तियों में आप ढूंढने की कोशिश कीजियेगा--
"खड़े थे जिस ठौर पर, उस ठौर को ठोकर लगा, नफरते जिस ठौर से थी, आ गए उस ठौर  हैं"