भूमिगत हुए सटोरिये सेटिंग के बाद नजर आ रहे सक्रिय

भूमिगत हुए सटोरिये सेटिंग के बाद नजर आ रहे सक्रिय

संजय जैन

धमतरी, 27 सितंबर। पुलिस विभाग द्वारा वैसे तो जिले में पुलिस अधीक्षक बी पी राजभानू, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीषा ठाकुर रावटे, उप पुलिस अधीक्षक सी पी जोशी, डीएसपी सारिका वैद्य के नेतृत्व में लगातार अपराधों पर अंकुश लगाने के साथ साथ कोरोना वायरस से बचाव हेतु फिजिकल डिस्टेंसिंग और मास्क नहीं लगाने वाले व्यक्तियों को समझाईश दी जा रही है। इसके बाद भी बात नहीं मानने वाले लोगों को चालान की परिधि में लाया जा रहा है। लेकिन यहां पदस्थ विभाग के कुछ कर्मचारियों द्वारा वन-टू का फोर अर्थात सट्टा रूपी कोढ़ को संचालित करने वालों को पुन: बुलाकर यह कलंकित व्यवसाय करने के लिये छूट दे दिये हैं जिसके कारण समाज एवं जिले के लिये कलंक यह व्यवसाय फिर से फलने, फूलने लगा है जिसके जिम्मेदार कुछ हद तक वर्षों से पदस्थ यहां कर्मचारी हैं जो अपने स्वार्थ के लिये वरिष्ठ अधिकारियों के निष्पक्षतापूर्ण ऐसे घृणित अपराध को अंकुश लगाने प्रयासरत हैं, उनके मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

समूचे देश में सट्टारूपी कोढ़ को संचालित करने की प्रक्रिया वर्षों पूर्व से जारी है। हालांकि इसके नये-नये तरीके इजात कर लिये गये हैं। पहले के दौर में नागपुर-बॉम्बे वर्ली मटका चलता रहा। लॉटरी भी चलते रही। लॉटरी तो बंद हो चुकी है। लेकिन यह सट्टा वटवृक्ष की जड़ों की तरह आम लोगों के खून में पैबस्त हो चुका है। सालों से इसे समाप्त करने की प्रक्रिया पुलिस विभाग द्वारा निरंतर जारी है। इसके बाद भी इस पर अंकुश लगाना पुलिस विभाग के लिये टेढ़ी खीर नजर आता है। जब-जब सटोरियों पर कार्यवाही होती है, वे जमानत पर छूटकर पुन: इस गैर कानूनी धंधे को चालू कर देते हैं। अब तो महिलाएं भी इस धंधे से जुड़कर सट्टा-पट्टी लिखने का कार्य कर रही हैं। पुलिस अधीक्षक बी पी राजभानू एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमति मनीषा ठाकुर रावटे द्वारा पदभार संभालने के बाद से ऐसे गैर कानूनी कार्य करने वाले तथाकथित व्यक्तियों, सटोरियों पर लगातार कार्यवाही करवाई जा रही है। इस कार्यवाही में बड़े खाईवाल बचते हैं, छोटे खाईवाल पर कार्यवाही होते आ रही है। ऐसा भी नहीं है कि पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा बड़े खाईवालों को पकडऩे का निर्देश नहीं दिया जाता परंतु इनके द्वारा जो आदेश संबंधित थाना प्रभारियों को दिया जाता है और कार्यवाही के लिये थाना प्रभारी उक्त व्यक्ति के ठिकाने पर दबिश देने का प्लान भी कर लेते हैं। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि वर्षों से पदस्थ कुछ कर्मियों द्वारा ऐसे लोगों को मोबाईल फोन के माध्यम से इसकी सूचना दे दी जाती है और इसके एवज में उन्हें संबंधित खाईवाल द्वारा भेंट पूजा भी चढ़ाई जाती है।

बताया जाता है कि शहर में अनेक ऐसे पुराने कर्मचारी पदस्थ हैं जिनके द्वारा अवैधानिक कार्य करने वालों से सांठगांठ कर मंथली वसूली की जाती है। ऐसे भी कर्मचारी धमतरी में पदस्थ हैं जो अपने विभाग के अधिकारियों पर भी टीका-टिप्पणी करते चौक चौराहों में नजर आते हैं। ऐसे कर्मचारी एक ओर पुलिस विभाग में अनमने ढंग से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर ऐसे लोग प्रायवेट क्षेत्रों में भी दोहरा काम कर रहे हैं। आज इनकी हैसियत ईमानदारी से कार्य करने वाले थानेदारों की तनख्वाह से भी अधिक है। इसीलिये ऐसे लोगों का जब-जब तबादला हुआ है, तब-तब उनके द्वारा अपने आकाओं के दरबार में एप्रोच लगाकर पुन: धमतरी शहर एवं आसपास के थानों में पदस्थ रहने की जुगत लगा लेते हैं जिसके कारण ऐसे गैर कानूनी कार्य करने वाले फल फूल रहे हैं और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सट्टारूपी कोढ़ को समाप्त करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे कर्मचारियों पर पुलिस अधीक्षक जब तक लगाम नहीं लगायेंगे और उन्हें सुदूर अंचलों में पदस्थ नहीं करेंगे तब तक यह सट्टारूपी महामारी दूर नहीं की जा सकती। पिछले दिनों नगरी थानांतर्गत एक बलात्कार की घटना घटी है जिसमें पीडि़ता सिहावा थानांतर्गत रहने वाली है। लेकिन इसके साथ घटित घटना में संलिप्त अनेक लोगों को बचाने में ऐसे ही कर्मचारी मुख्य भूमिका निभाये हैं। यदि इस घटना पर वरिष्ठ अधिकारी ध्यान देकर इसकी जांच करते हैं तो संबंधित अपराध में अनेक व्यक्तियों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। ऐसे ही कर्मचारियों ने आरोपी को फरार कराने में भी महती भूमिका निभाई है।

कहा जाता है कि पुलिस अधीक्षक एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक, डीएसपी एवं थाना प्रभारियों के अपराध पर अंकुश लगाने की जो कवायद चल रही है उससे समूचा जिला पुलिस की कार्यवाही से संतुष्ट है। लेकिन जब तक विभीषण जैसे लोग विभाग में रहेंगे, पुलिस विभाग सट्टारूपी कोढ़ के साथ साथ अपराधों पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित होगा। बताया तो यह भी जाता है कि विभाग के कुछ लोग जो स्वार्थपूर्ति के लिये ऐसे गैर कानूनी कार्यों में सहयोग कर संबंधितों को प्रश्रय दे रहे हैं, उनके द्वारा गैर कानूनी में लिप्त सटोरियों को पूरी तरह मदद की जा रही है। इसी वजह से जब-जब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सटोरियों पर कार्यवाही किये जाने की बात कही जाती है, ये लोग अपने सहयोगियों को मोबाईल के माध्यम से सूचित कर उन्हें भूमिगत कर देते हैं। पुलिस अधीक्षक को ऐसे कर्मचारी जो ड्यूटी कम और बतियाना ज्यादा करते हैं, चौक-चौराहों में बैठकर अपने विभाग की खामियां उजागर करते हैं, अपराध करने वाले लोगों को प्रश्रय देते हैं, इन पर फौरी कार्यवाही किये जाने की मांग बलवती हो रही है। गौरतलब रहे कि अवैधानिक कमाई से यहां वर्षों से पदस्थ कर्मचारियों ने मकान, दुकान, कार, गहनों की लातादाद खरीदी की है। इससे भी उन्हें भारी राशि प्राप्त होती है जबकि नियमानुसार कोई भी कर्मचारी, अधिकारी शासकीय सेवा में रहते ऐसा दोहरा कार्य नहीं कर सकता।