जर्जर भवन में विराजमान है रांकाडीह के माँ रणचण्डी ,पूर्ण करती है सबकी मनोकामना

जर्जर भवन में विराजमान है रांकाडीह के माँ रणचण्डी ,पूर्ण करती है सबकी मनोकामना

किशनलाल विश्व करमा

मगरलोड।ब्लॉक मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम रांकाडीह में बांधा तालाब के पास माता रणचण्डी एंव माता दंतेश्वरी का मंदिर है। जँहा माता रानी मन्दिर में सूक्ष्म रूप से विराज मान है।बता दे की यँहा जो भी भक्त अपने  मनोकामना को लेकर माता रानी के द्वार में जो भी भक्त जाता है,उसकी भक्ति अनुसार सभी मुरादे पूर्ण होती है।ज्ञात हो की यह मंदिर पूरा 12माह खुला रहता है।मन्दिर में माता रानी का दरबार हर सोमवार और गुरुवार को लगता है।मान्यता है की इस मंदिर में जो भक्त संतान प्राप्ति के उद्देश्य आता है ,उसकी मनोकामना साल भर के अंदर पुर्ण हो जाती है ।सिर्फ भक्तो को माता रणचण्डी के मंदिर में मात्र एक श्रद्धा से ज्योति जलाना होता है।


सैकड़ों माता के भक्तों द्वारा अपने श्रद्धा के अनुसार विभिन्न कामनाओं को लेकर प्रति वर्ष  श्रद्धा से ज्योति कलश जलाते है। लेकिन इस वर्ष महामारी वायरस कोरोना से लड़ने के उद्देश्य से शासन प्रशासन के आदेशानुसार देवी मंदिरो में भीड़ लगाना वर्जित किया गया है। जिसके चलते इस वर्ष माता रानी मन्दिर सिर्फ श्रद्धा की एक ही ज्योति कलश प्रज्वलित किया गया है । माता रणचण्डी के द्वार गांव के ही लोग ही नही बल्कि बहुत दूर-दूर के माता रानी के भक्त आते है।गाँव के भक्तों का कहना है की गाँव के हर छोटे बड़े कार्यो में माता रणचण्डी का सहयोग लिया जाता । गाँव के एक भी कार्य माता रानी के अनुमति के बिना नही होता है माता रानी के बिना अनुमति से कोई भी कार्य सफल नही होता है।ज्ञात हो रांकाडीह के माँ रणचण्डी विरान समय मे सूक्ष्म रूप से मंदिर के चारो विचरण करती है। इसका भी प्रमाण कई भक्तो के द्वारा अनुभव किया गया है । रांकाडीह के माँ रणचण्डी में श्रद्धा द्वारा किसी कामना पूर्ति के लिए किसी भी प्रकार के बलि प्रथा को नही चलाया जाता है।श्रद्धालुओं द्वारा माता रानी में सिर्फ श्रद्धा के फूल एंव श्रीफल समर्पित करते है।