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शब्द-श्रद्धांजलि : मोतीलाल वोरा की देन है रावघाट रेल परियोजना, कांग्रेस नेता रमेश वर्लयानी का विशेष कालम

शब्द-श्रद्धांजलि : मोतीलाल वोरा की देन है रावघाट रेल परियोजना, कांग्रेस नेता रमेश वर्लयानी का विशेष कालम
  • रमेश वर्लयानी, पूर्व विधायक

अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा का आज 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वे पूर्व राज्यसभा सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व राज्यपाल सहित अनेक पदों पर रहे. श्री वोरा गांधीवादी समाजवादी विचारधारा के अनन्य पोषक थे और उन्होंने कांग्रेस के आदर्शों, सिद्धांतों और नीतियों को सही परिप्रेक्ष्य में अमली रूप देने का सतत् प्रयास किया. कांग्रेस के मुख्यालय 24, अकबर रोड में उनसे अपाइंटमेंट लिये बिना, आसानी से मिला जा सकता था. यही कारण है कि न केवल छत्तीसगढ़ अंचल में वरन् पूरे देश में उनकी लोकप्रियता में दिनों-दिन वृद्धि हुई.

सरल, सौम्य, मिलनसार और सूझ-बूझ के धनी मोतीलाल वोरा ने आंचलिक पत्रकारिता को एक नई दिशा प्रदान की। उनकी गणना मध्य प्रदेश के जाने-माने पत्रकारों में की जाती थी. बाद में वे राजनीति में आ गए. श्री वोरा ने प्रथम बार 1972 के आम चुनाव में विजयी होकर विधानसभा में प्रवेश किया। उनकी प्रशासनिक क्षमता का पूरा परिचय उस समय मिला, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी ने उन्हें मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम का उपाध्यक्ष नियुक्त कर राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया। श्री वोरा ने अपने कुशल संचालन से निगम को निरंतर घाटे की स्थिति से उबारा और उनके कार्यकाल में परिवहन निगम पहली बार लाभ की स्थिति में पहुॅचा। श्री वोरा सन् 1977 में जनता लहर के बावजूद भारी बहुमत से विजयी हुए और उन्होंने मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष की भूमिका का जिस प्रभावशाली ढंग से निर्वहन किया, वह स्वस्थ्य संसदीय परम्पराओं की एक मिसाल प्रस्तुत करती है।

विधान सभा सत्र में ऐसा कोई दिन नहीं होता था, जब श्री वोरा प्रश्नोत्तर, ध्यानाकर्षण अथवा स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सरकार को घेरते नहीं दिखें। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी उनकी संसदीय प्रतिभा की कायल थीं। सन् 1980 में श्री वोरा फिर प्रचंड बहुमत से विधानसभा के लिए चुने गये और उन्होंने श्री अर्जुन सिंह के मंत्रिमण्डल में राज्यमंत्री पद ग्रहण कर उच्च शिक्षा विभाग का स्वतंत्र दायित्व संभाला। इसके बाद परिवहन और विज्ञान तथा टेक्नाॅलाजी के विभाग भी सौपें गये। इन विभागों के कुशल संचालन को देखते हुए उन्हें 30 जून, 1983 को केबिनेट मंत्री पद पर आसीन किया गया।

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी ने उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का भार सौंपा। भिलाई में राजीव गांधी की अध्यक्षता में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में श्री वोरा की संगठनात्मक प्रतिभा से राजीव गांधी काफी प्रभावित हुए और इस सम्मेलन में आगामी चुनाव के लिए जो रणनीति तैयार की गई वह किस हद तक सफल हुई इसका प्रमाण लोकसभा एवं विधान सभा के चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक विजय हैै। श्री वोरा ने दिनांक 13 मार्च 1985 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। वे 13 फरवरी, 1988 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर रहे। उन्होंने 13 फरवरी को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र प्रस्तुत किया और 14 फरवरी, 1988 को केन्द्र में स्वास्थ्य परिवार कल्याण और नागरिक उड्डयन मंत्री का पदभार ग्रहण किया।

अप्रैल 1988 में श्री वोरा मध्यप्रदेश से राज्य सभा के लिए चुने गए। श्री वोरा 24 जनवरी, 1989 तक केन्द्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रहे। श्री वोरा ने बुधवार 25 जनवरी, 1989 को मध्यप्रदेश कांग्रेस (इ) विधायक दल के नेता पुनः चुने जाने पर उसी दिन दोबारा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद की शपथ ग्रहण की। श्री वोरा ने 26 मई, 1993 को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की शपथ ली। सन 1998 में श्री वोरा राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. सन् 2002 से अब तक वे राज्य सभा में रहकर देश के ज्वलंत प्रश्नों से लेकर छत्तीसगढ़ के विकास के मामले पूरी गंभीरता से उठाते रहे हैं। उनके लगातार दबाव का परिणाम्है कि दल्लीराजहरा से रावघाट रेल परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से क्लीयरेंस मिला और अब यह परियोजना मूर्त रूप लेने जा रही है।

मेरा राजनैतिक सफर उनके साथ ही शुरू हुआ है और उनसे मेरे प्रगाढ़ पारिवारिक संबंध आज भी यथावत् हैं। मेरा निजी अनुभव उनके बारे में यह है कि वे बिना पूर्वाग्रह एवं रागद्वेष के हर किसी को यथासंभव मदद करने में तत्पर रहते हैं। 1977-80 तक मैं और वोरा जी विधानसभा के प्रश्नकाल में छाए रहे और आकाशवाणी और अखबारों ने भी हमें हाथों-हाथ लिया क्योंकि हमारे सवाल ज्यादातर आम आदमी की जिंदगी से जुड़े रहते थे। श्री वोरा की छवि इतनी निर्मल और पाक-साफ रही कि कोई भी गर्द उन्हें धुंधला नहीं सकती। उनकी ईमानदारी, विनम्रता, शालीनता और काम करने की असीम क्षमता ने ही उन्हें इतनी उंचाईयों पर पहुॅचाया. विनम्र श्रद्धांजलि.

( लेखक पूर्व विधायक और प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं )