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दंतेवाड़ा- बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा गोद लिए ग्राम मोलसनार का आश्रित ग्राम उदेला कुचेपाल मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित

दंतेवाड़ा- बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा गोद लिए ग्राम मोलसनार का आश्रित ग्राम उदेला कुचेपाल मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित

दंतेवाड़ा।  ग्राम मोलसनार का आश्रित ग्राम उदेला, कुचेपाल, सड़क, बिजली,पानी,शिक्षा,स्वास्थ्य सुविधाओं का आज भी मोहताज है। कहने को तो गावों में सरकार की विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन जनपद पंचायत के माध्यम से ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाता है। पंचायतों में वास्तविक तौर से इन योजनाओं का लाभ गांव के लोंगो को नही मिल रहा है।

ताजा उदाहरण आपको तहसील बचेली से महज 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एनएमडीसी के गोद लिए गांव में सरकार की जनकल्याणकारी योजना का लाभ ग्रामीण नही उठा पा रहे है। ग्राम पंचायत के आश्रित गांव कुचेपाल, उदेला, के ग्रामीणों को प्रधानमंत्री सड़क योजना का लाभ नही मिल रहा है। पीएमजीएसवाई गांव की कच्ची सड़क को बाराहमासी सड़क से जोड़ना भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। आश्रित गाँव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क आज तक नही बन पाई है।

लाल पानी से प्रभावित है गांव

राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) बचेली के लौह अयस्क खनन से निकलने वाला आयरन मोलसनार पंचायत के नदी-नालों को प्रदूषित कर रहा है। यहां के हेण्डपम्पों में आयरन की मात्रा ज्यादा होने की वजह से पानी पीने लायक नही है। ग्रामवासियों को गर्मियों के दिनों में मजबूरन नदी -नालों के किनारे चूहे का पानी पीना पड़ता है। वैसे तो प्रशासन ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना चालू की है, मगर इसका संचालन ग्राम पंचायत मोलसनार में करना शायद भूल गई है। हैंड पंप से लाल पानी निकलने के कारण लाल पीर पानी पीने को मजबूर है गांव वाले जिससे बच्चे  कुपोषित होने की आशंका है लाल पानी की वजह से आसपास के खेतों की जमीन भी बंजर हो गई है जिस का मुआवजा किसानों को अब तक नहीं मिल पाया है

जिमेदार अधिकारी गांव की सूध लेने को तैयार नहीं 

आपको बताना लाजमी है सड़क, बिजली,पानी, शिक्षा,स्वास्थ्य, भारत के सभी नागरिकों को उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेवारी है। आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी मोलसनार के ग्रामीणों को अपने फंडामेंटल राइट्स के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। जिसका खामियाजा गांव वालों को भुगतना पड़ रहा है समय-समय पर वाह वाही लूटने के लिए जनप्रतिनिधि भी पीछे नहीं हटते और बहुत से गांव को जनप्रतिनिधियों द्वारा भी गोद लिया गया है परंतु गोद लेने के पश्चात जनप्रतिनिधि गांव में झांकने आज तक नहीं गए कि गांव में किस प्रकार की समस्या है और इसे किस प्रकार निराकरण किया जा सकता है जनप्रतिनिधि गोद लिए गांव में केवल चुनाव के समय ही गांव में पधार ते हैं जबकि एनएमडीसी ऐसा लिमिटेड द्वारा यहां की खनिज संपदा से सरकार को करो रुपए का फायदा होता है