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कोकीन केस की पैरवी के लिए एक और लोक अभियोजक अधिकारी की अनुशंसा! अभी विनोद कुमार भारत हैं विशेष लोक अभियोजक.!

कोकीन केस की पैरवी के लिए एक और लोक अभियोजक अधिकारी की अनुशंसा! अभी विनोद कुमार भारत हैं विशेष लोक अभियोजक.!

जनधारा समाचार
रायपुर. राजधानी से निकलकर पूरे राज्य में फैल गए कोकीन प्रकरण के कुछ आरोपियों की पैरवी करने के लिए जिला विशेष अभियोजक अधिकारी की नई नियुक्ति करने संबंधी अजीबोगरीब मामला सामने आया है. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और पुलिस अधीक्षक को लिखे गए एक पत्र में विशेष प्रकरण हेतु विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की अनुशंसा की गई है. इसके लिए चार अधिवक्ताओं के नाम भी सुझाए गए हैं. सबसे बड़ा आश्चर्य यह कि राज्य सरकार ने गुजरे 4 मई 2019 को राजपत्र में प्रकाशित करके बताया है कि रायपुर विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट में शासन की ओर से पैरवी करने के लिए विनोद कुमार भारत को नियुक्त किया जाता है!


गुजरे 28 अक्टूबर को सरकार की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि '30 सितम्बर को दोपहर 2 बजे रायपुर में श्रेयांश झाबक, पिता रमेश झाबक, विकास बंछोर पिता सुरेंद्र बंछोर को गिरफतार करते हुए उनके पास से 17 ग्राम कोकीन और 175000 रूपये जब्त किये गये थे तथा पुलिस में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज करते हुए अपराध कायम किया गया था इसलिए उपरोक्त प्रकरण की पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया जाना उचित प्रतीत होता है. इससे आगे जाते हुए इस पद हेतु चार अधिवक्ताओं एस के फरहान, ठाकुर आनंद मोहन, पियूष भाटिया तथा आदित्य तिवारी में से कोई भी इस प्रकरण की पैरवी हेतु नियुक्त किया जा सकता है.

तो फिर अचानक ऐसा क्यों सूझा कि नए विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की जाए. ज़रा सरकारी काग़ज़ की गति तो देखिए 28 अक्टूबर को पुलिस कप्तान कार्यालय कलेक्टर कार्यालय को पत्र भेजता है और उसी दिन कलेक्टर कार्यालय का पत्र गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव के लिए रवानगी भी ले लेता है. याद दिलाते चलें कि हालिया दिनों में राजिम और माना थाना में कुल जमा 1270 किलो गाँजा बरामद हुआ है. संवेदनशील तो यह भी है मसला है, पर इस पर कोई विशेष लोक अभियोजक नही खोजा गया है, लेकिन दो आरोपियों की पैरवी के लिए नया लोक अभियोजक अधिकारी की नियुक्ति करना समझ से परे है!

उधर इस नये आदेश से लोगों के मन में कई तरह के सवाल जन्म ले रहे हैं. कोकीन मामले में राजधानी पुलिस दो थानों में अपराध दर्ज कर चुकी है और कुल 17 की गिरफ़्तारी का हुई है. इनमें से 9 ने जमानत आवेदन लगाया और सभी की जमानत याचिका राज्य की ओर से दर्ज प्रतिरोध और केस डायरी के तथ्यों की वजह से ख़ारिज हो गई. ऐसे में पहला सवाल यह है कि क्या वर्तमान लोक अभियोजक की भूमिका से रसूखदार वर्ग नाराज है और उन्हें पद से हटाना चाहता है या फिर खुद सरकार को उनकी भूमिका पसंद नही आ रही है जो उनके समानांतर जिला प्रशासन एक और लोक अभियोजक अधिकारी नियुक्त करना चाहती है ताकि रसूखदार दोनों आरोपी युवकों को जमानत की सुविधा हासिल हो सके.

हालांकि सरकार चाहे तो विशेष लोक अभियोजक अधिकारी को एक महीने के अंदर नोटिस देकर हटा सकती है. लेकिन यह प्रक्रिया पूरी किये बगैर ही एक और लोक अभियोजक की नियुक्ति, और वह भी विशेष प्रकरण हेतु, प्रशासन की मंशा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है.