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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -एक बार फिर से गरमाया धर्मांतरण का मुद्दा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -एक बार फिर से गरमाया धर्मांतरण का मुद्दा

-सुभाष मिश्र

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का मुद्दा फिर गरमाया हुआ है। राजधानी रायपुर में एक पादरी की थाने में हुई पिटाई के बाद एसपी का तबादला, पुरानी बस्ती थाने के टीआई को लाईन अटैच कर सरकार ने अपनी ओर से सख्ती का संदेश देकर घटना में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके थोड़े दिन पहले सुकमा एसपी के पत्र को लेकर भी धर्मांतरण पर काफी बहस हुई है। छत्तीसगढ़ में कालांतर से ईसाई मिशनरियों पर आदिवासी क्षेत्रों में अभियान चला कर, सेवा की आड़ में धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। भाजपा के दिवंगत नेता दिलीप सिंह जूदेव ने बकायदा इसके लिए घर वापसी अभियान चलाया।

रायपुर में हुई ताजा घटना और देश के अलग-अलग क्षेत्रों में हुई घटनाएं इस ओर इशारा करती हंै कि हिन्दू धर्म में जो खुलापन था, वह खत्म होता जा रहा है और संकीर्ण बनाने की कोशिश जारी है। खुलापन, जो हिन्दू धर्म का सौंदर्य था, उसे नष्ट किया जा रहा है और उसे इस्लाम और ईसाई धर्म की तरह किताब में लिखी इबारत में बदलने की कोशिश हो रही है। हमारे समाज में धीरे-धीरे ेअसहमति का स्पेस कम होता जा रहा है जबकि हमारे यहां नये-नये विचारों को खोजने की परंपरा थी। पहले से जो मत, धर्म और परंपराएं चली आ रही हैं, उससे पूरी तरह असहमति जताते हुए अपनी बात कही जा सकती थी। चार्वाक, सुकरात, कबीर जैसे अनेकों विद्वानों, विचारकों से असहमति के बाद समाज उन्हें ऋषि संत कहता था। मंडन मिश्र के यहां शास्त्रार्थ की परंपरा रही है। विरोध का सम्मान होता था। अब हमारे यहां विचारों के लिये कोई जगह नहीं है। इस मामले में आग में घी डालने का काम सोशल मीडिया के जरिए तेजी से हो रहा है अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में गंभीर टिप्पणी की है।

सोशल मीडिया पर कथित राष्ट्रभक्त धर्म की ध्वजा लेकर बाकी धर्मावलंबियों को गरियाने में लगे हुए हैं। यदि आप गलती से मुस्लिम हैं या किसी अन्य धर्म के हैं तो आप राष्ट्रद्रोही हैं जिसे भारत माता से, देश से प्यार नहीं है और यदि आप हिन्दू हैं तो आप हरामी हैं, गद्दार हैं। धारा के विरुद्ध बोलना, अपराध हो कथित धर्म सत्ता के खिलाफ बोलकर आप संदेह के घेरे में आ जाते हैं। अल्पसंख्यक सिर्फ मुसलमान ही नहीं होते हैं। परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि व्यक्ति प्रकट में बहुसंख्यक में शामिल होता है लेकिन उसके विचारों से उसकी गिनती अल्पसंख्यक में शामिल होती है।

इस समय सारा जोर खुद को देशभक्त दिखाने का है। यह देशभक्ति का एक कुत्सित शार्टकट है। ऐसी देशभक्ति आगे चलकर व्यक्ति को ज्यादा उच्छृंखल और अनियंत्रित बनाएगी। सांप्रदायिकता में अब धर्म, आर्थिक कारण और आयातीत फंडिंग भी शामिल हो गई है। धर्म का इस तरह देशभक्ति से जुडऩा देश के लिये दुर्भाग्य है। पहले सांप्रदायिकता धर्म आधारित थी। अब देशभक्ति का मुद्दा भी शामिल हो गया है।

धर्म का सच्चा रूप जीवन सौंदर्य रचता है। इतिहास और सभ्यता से संवाद करता है लेकिन देशभक्ति में सारी चीजें गौण हो जाती हैं। यह एक सोच-समझकर गढ़ा गया मेटाफर है। इससे भ्रष्ट और बेईमान आदमी को नैतिकता के प्रश्नों से बचने का अवसर मिल जाता है। इस देश का दुर्भाग्य है कि

साम्प्रदायिकता इस तरह बदल रही है और अवसरवादी इसी काम में जुटे हैं। साम्प्रदायिकता धर्म के लिये दुर्भाग्य और देश के लिए अभिशाप है। इस नई साम्प्रदायिकता में अब बहुसंख्यक भ्रष्ट और बेईमानों को भी, जो इस घतकरम की भीड़ में शामिल नहीं हैं, देशद्रोही कहने का अवसर मिल गया है।
कुछ दिन पहले नया रायपुर में एक अवैध आश्रम में मध्यप्रदेश के मंडला से लाए गए आदिवासी बच्चों को रखा गया था। इस मामले को धर्मांतरण से जोड़कर देखा गया। इस मामले में फिलहाल जांच चल रही है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का आरोप है कि छत्तीसगढ़ की डेमोग्राफी बदलने की साजिश हो रही है। केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है और छत्तीसगढ़ में हो रहे धर्मांतरण की एसआईटी जांच करवाने की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री रमनसिंह ने भी कहा कि राज्य में छल, बल और प्रलोभन से लोगों का धर्मांतरण किया जा रहा है।

सत्ताधारी कांग्रेस का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे पर सियासत कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर कानून बना हुआ है। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एसपी सुनील शर्मा ने अपने अधीनस्थ अफसरों को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने लिखा कि राज्य में स्थानीय आदिवासियों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। एसपी ने पत्र में धर्मांतरण की गतिविधि पर नजर रखने की बात लिखी थी। क्योंकि इससे कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। इस मामले में भाजपा नेता और राज्यसभा सासंद रामविचार नेताम ने सीएम भूपेश बघेल को चिट्ठी लिखी और धर्मांतरण के मामलों में कड़ी कार्रवाई की मांग की। रामविचार नेताम ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में तेजी से धर्मांतरण हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि सरकार आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण रोकने के लिए देवगुड़ी (देवताओं का स्थान) को आर्थिक सहायता दे रही है। इसके जवाब में राज्य आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा है कि बस्तर क्षेत्र में आदिवासी चर्च न जाकर अपने देवी-देवताओं की पूजा कर सके इसलिए देवगुड़ी तथा घोटुल को आर्थिक सहायता दी जा रही है। लखमा का कहना है कि भाजपा के 15 वर्ष के शासनकाल के दौरान सुकमा जिले में 30 चर्च का निर्माण किया गया है लेकिन कांग्रेस शासनकाल में वहां एक भी चर्च नहीं बना है।

यहां सवाल धार्मिक आस्था और उससे उपजी स्थितियों को लेकर है जहां धर्म के नाम पर थाने में घुसकर एक अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों की पिटाई का है। यदि इस पूरे मामले में यदि सख्ती और समझ नहीं दिखाई गई और  राजनीतिक दल वोटों की राजनीति के लिए इस पूरे मुद्दे को हवा देते रहे तो फिर हम कैसे कह पायेंगे कि छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा।