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शिवराज मंत्रीमण्डल में भाजपा के नेताओं को शामिल न करने को लेकर असंतोष व्याप्त

शिवराज मंत्रीमण्डल में भाजपा के नेताओं को शामिल न करने को लेकर असंतोष व्याप्त

 मिलीभगत से इन दिनों तबदाला उद्योग खूब फलफूल रहा है

भोपाल ।  ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके 22 समर्थकों के सहयोग से चौथी बार बने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जहां मंत्रीमण्डल में भाजपा के नेताओं को शामिल न करने को लेकर असंतोष व्याप्त है यही नहीं अजय विश्नोई जैसे नेता बार-बार अपनी पीढ़ा व्यक्त करते हुए सुर्खियों में बने हैं, जिनकी भावना को लेकर कांग्रेस के नेता हवा देकर अपनी स्वार्थ सिद्धि में लगे हुए हैं क्योंकि  उन्हें भरोसा है कि भाजपा में असंतोष पनपेाग और बिल्ली के भाग्य से कमलनाथ सरकार की तरह छींका टूट सकता है और फिर कांग्रेस की सरकार प्रदेश में बन सकती है? लेकिन उनकी यह मुराद पूरी न होने से कांग्रेस के नेता कमलनाथ से लेकर दिग्वजय सिंह कुछ ज्यादा ही परेशान हैं जिस तरह से इन नेताओं ने कमलनाथ सरकार के 15 महीने के शासनकाल के दौरान हर प्रकार से फायदा उठाते हुए अपनी स्वार्थ सिद्धि को अंजाम दिया था। तो कुछ नेताओं और कार्यक्ताटों की कमलनाथ सरकार के  दौरान कमाई की अब धीरे-धीरे परतें खुलती नजर आ रही है यही नहीं कई नेता तो अपनी कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में चले तबादला उद्योग की काली कमाई से अर्जित किये गये दो पहिया और चार पहिया वाहनों की पोस्टें सोशल मीडिया पर डालकर वाहवाही बटोर रहे हैं उनकी इस तरह की पोस्टें देखकर भाजपा के नेताओं में भी शिवराज सरकार के चौथे कार्यकाल में तबादला उद्योग नहीं पनपने के कारण भारी असंतोष व्याप्त है जिसको लेकर सभी परेशान हैं, हालांकि इन नेताओं के अनुसार शिवराज सरकार के चौथे कार्यकाल की जिस तरह से वे व्याख्या करते हैं वह बड़ी रोचक है इन नेताओं के अनुसार चौथी पर बार सत्ता पर काबिज होने पर शिवराज सिंह सरकार में वर्तमान में तीन मुख्यमंत्रियों के काबिज होने की बात यह नेता दबी जुबान से कर रहे हैं इन नेताओं के अनुसार उनमें पहले नम्बर पर प्रशासन में बैठे वरिष्ठ अधिकारी को वह सुपर चीफ मिनिस्टर बताते हैं तो वहीं शिवराज के 15 वर्षों के शासनकाल में चॢचत रही अदृश्य सत्ता की देवी को वह पर्दे के पीछे का और दूसरे नम्बर का मुख्यमंत्री विभूषित करते हैं, हालांकि यह लोग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को संवैधानिक मुख्यमंत्री तो मानते हैं तो वहीं यह कहते नहीं थकते कि शिवराज के चौथे शासनकाल में तबादला उद्योग यदि कहीं पनप रहा है तो वह आबकारी एवं परिवहन जैसे कमाई वाले विभागों में जमकर फल-फूल रहा है और यह सब खेल 15 साल तक चर्चाओं में रही सत्ता की अदृश्य देवी के इशारे में इन विभागों में आये दिन तबादले हो रहे हैं, यह सब देखकर भाजपा के विधायकों, संगठन से जुड़े नेताओं और पहुंच वाले कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष व्याप्त है, हालांकि इन नेताओं के अनुसार इन दिनों अदृश्य सत्ता की देवी के चंद दलाल ही हैं जिनकी वजह से उनका यह कारोबार फल-फूल रहा है मामला जो भी हो लेकिन फिलहाल तो सत्ता की अदृश्य देवी और सुपर चीफ मिनिस्टर की मिलीभगत से इन दिनों तबदाला उद्योग खूब फलफूल रहा है लेकिन पार्टी के बाकी सब लोग इस बात से अछूते हैं।