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IAS बाबूलाल अग्रवाल की दीवाली जेल में मनेगी, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, 23 करोड़ के प्लांट और मशीनरी का खुलासा

IAS बाबूलाल अग्रवाल की दीवाली जेल में मनेगी, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, 23 करोड़ के प्लांट और मशीनरी का खुलासा

बिलासपुर. ईडी द्वारा गिरफतार किए गए आइएएस बाबूलाल अग्रवाल की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज दिया. उसके बाद उन्हें 14 दिन के लिए जेल भेज दिया गया.

बीएल अग्रवाल को मई 2013 में प्रवर्तन निदेशालय ने सम्मन जारी किया था। इसके तहत उनके खिलाफ प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के नोटिस व कार्रवाई पर स्थगन देने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था। साथ ही उन्हें नोटिस जारी किया गया था।

उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का भी मामला है। एक अक्टूबर 2020 को जारी नोटिस के साथ उनकी संपत्तियों का ब्योरा भी संलग्न किया गया था। इस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करते हुए बाबूलाल अग्रवाल ने क्रिमिनल रिट याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया कि पिछले नौ सालों से यह मामला लंबित है, जिसमें अभी नोटिस जारी किया गया है।

याचिका में इस प्रकरण में अंतिम सुनवाई होने तक नोटिस को स्थगित किए जाने का आग्रह किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि प्रकरण दर्ज करने के बाद अब ट्रायल में तेजी लाने की जरूरत है। याचिकाकर्ता ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति ले ली है। कैट ने भी उनकी स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति को खारिज कर दिया है। इस स्थिति में उन्हें नोटिस जारी कर परेशान किया जा रहा है।

केन्द्र सरकार के वकील रमाकांत मिश्रा के साथ ही अन्य प्रतिवादियों के वकील सौरभ पांडेय, अनिल कुमार पांडेय ने याचिकाकर्ता के तर्कों का विरोध करते हुए कहा कि 2002 का एक्ट दो तथ्यों को बताता है। जस्टिस गौतम भादुड़ी ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को स्थगन देने से इंकार करते हुए उनके आवेदन को खारिज कर दिया है. उसके बाद अग्रवाल को 14 दिन के लिए जेल भेज दिया गया. ईडी ने पता किया है कि अग्रवाल ने 23 करोड़ के प्लांट और मशीनरी काला धन से खडी की.