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लॉकडाउन में मजदूरों का पलायन एक बड़ी चुनौती,इन्हें अपनी जान की चिंता नहीं

लॉकडाउन में मजदूरों का पलायन एक बड़ी चुनौती,इन्हें अपनी जान की चिंता नहीं


नईदिल्ली। शनिवार को लॉकडाउन का चौथा  दिन था  देशभर में मजदूरों का अपने-अपने घर के लिए पलायन एक बड़ी चुनौती बनकर सामने दिखा।  इस समस्या को देखते हुए  केंद्र और राज्य सरकारों ने कई कदम उठाए हैं।  दिल्ली-एनसीआर का हाल सबसे बुरा है, जहां मजदूर, रिक्शा चालक और फैक्ट्री कर्मचारी अपने अपने गांव की ओर लौटने के लिए हजारों की तादाद में निकल पड़े हैं।  लेकिन सिर्फ दिल्ली एनसीआर नहीं बल्कि देश के दूसरे छोटे बड़े शहरों से भी लोगों का पलायन यूं ही जारी है।  चाहे वो कानपुर हो, सोनीपत हो या फिर सिरसा या आगर मालवा। 


दिल्ली-एनसीआर बॉर्डर पर  अजीब सी दहशत भर गई है इन दिलों में, अजीब सी तड़प उठी है घर पहुंच जाने की, जो जहां था, आऩंद बिहार बस बड्डे पर भी मजदूरों का ऐसा ही रेला है।  जेबें खाली हैं, परिवार को पालने कि चिंता ने चाल में रफ्तार ला दी है।  जो मजदूर दिल्ली शहर को सुंदर बनाने के लिए अपना पसीना बहाता था, अट्टालिकाओं पर रस्सी के सहारे चढ़कर उन्हें सतरंगी बनाता था, जो मिलों में अपनी सांसों को धौंकनी बना देता था।  वो मजदूर चल पड़ा है, सिर पर गठरी लादे, हाथ में बच्चा उठाए। 


ओखला मंडी में काम करने वाले मजदूरों को मालूम है कि दिल्ली से बहराइच की दूरी 600 किलोमीटर है. रास्ते बंद हैं. बसें बंद हैं. ट्रेन बंद हैं...फिर भी चल पड़े हैं पांव. ऐसे एक नहीं हजारों हजार मजदूर हैं. कोई पैदल पटना निकल पड़ा है। इन मजदूरों को सरकारों पर एतबार क्यों नहीं है कि कोई भी भूख नहीं मरेगा।

chandra shekhar