breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना की जंग अंधविश्वासियों के संग

 प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना की जंग अंधविश्वासियों के संग

- सुभाष मिश्र

गौ मूत्र और गोबर से कोरोना का उपचार करके हम विश्वगुरु तो कतई नहीं बन सकते। मोदीजी की छवि और उनकी दबी हुई आकांक्षाओं पर उन्ही की पार्टी के लोग गोबर डालने में लगे हुए हैं। पूरे विश्वभर में किये जा रहे शोध, मेडिकल परीक्षण और वैज्ञानिक की दिन-रात की मेहनत को जब भाजपा सांसद, विधायक, नेता और उन जैसे बहुत से लोग अनदेखी करके इसका श्रेय गोमूत्र-गोबर को दे रहे हो तब आपका मन सिर पिटने का होगा और यदि आप गलती से इस मूर्खतापूर्ण बयानबाजी का सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे हैं तो आपको जेल में बंद भी किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह बार-बार दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी कह रहे हैं,जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं या जान है तो जहान है का नारा बुलंद कर लोगों से अपने मन की बात कह रहे हैं, तब उन्हें अपने पार्टी के जिम्मेदार नेताओं और उन सभी लोगों से जो कोरोना की जंग के खिलाफ अंधविश्वास फैला रहे हैं, चुप रहने कहना होगा। फिर वह उनकी पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा क्यों न हो।यदि ऐसा करना संभव ना हो और इस उपचार विधि पर भरोसा हो तो दुनिया के बाकी राष्ट्रो को सांसद साध्वी प्रज्ञा और उन जैसी सोच वाले लोगों के प्रतिनिधि मंडल के साथ कोरोना वैक्सीन के डोज भेजने की बजाय गोबर और गोमूत्र भेजना चाहिए ताकि दुनिया को मालूम हो की हम वाकई विश्व गुरू हैं ।

छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जो गोबर खरीदकर उससे खाद बना रहा है, कंडे बना रहा है, उससे खिलौने, दीए बनाकर अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। जब कोरोना के ऊपचार के लिए पूरे देश में आक्सीजन, रेमडेसिविल जैसी दवाई और टीकाकरण की वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, तब सांसद साध्वी प्रज्ञा और बाकी नेता ऐसी बाते कर रहे हैं। जो लोग इस तरह की बेवकूफो, अंधविश्वास का विरोध करते हैं ऐसे लोगो को गिरफ्तार किया जाता है। मणिपुर के पत्रकार सामाजिक कार्यकर्ता पर ऐसी पोस्ट को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला मणिपुर राज्य भाजपा के उपाध्यक्ष उषाम देबन और महासचिव पी प्रेमानंद मीतेई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पत्रकार किशोरचंद वांगखेम और कार्यकर्ता एरेन्ड्रो लीचोम्बम के खिलाफ दर्ज कर उन्हें घर से गिरफ्तार किया।

हमारे देश में बहुत से लोग अशिक्षा, अज्ञानता और अंधविश्वास के कारण अभी भी मेडिकल चिकित्सा विज्ञान पर भरोसा नहीं करके बैगा, गुनिया, नीम हकीम, झोला छाप डाक्टरों के पास इलाज के लिए जाते है। कोई अज्ञानी, अशिक्षित व्यक्ति यदि ऐसा करता है, तो उसे एक बार माफ भी किया जा सकता है। किन्तु यदि यह काम एक निर्वाचित सांसद जो सतारुढ़ पार्टी से है, साध्वी है वह जब इस तरह की बात करती है तो उसके दूरगामी परिणाम निकलते हैं।

हमने अपने देश में वैज्ञानिक सोच और कार्य व्यवहार के लिए इतने सालो में जो लोक शिक्षण करना था, जो जनजागृति लेनी थी, वह काम नहीं किया गया। इसके ठीक उल्ट हमारे देश में धर्म, जाति, संप्रदाय, परंपरा और बहुत बार लोगों के बीच अपना प्रभामंडल बनाएं रखने के लिए उन बातों, उपचार की अवैज्ञानिक विधियों और कार्यव्यवहार की महिमा मंडित किया जो एक सभ्य सुसंस्कृत समाज के लिए ठीक नहीं है। लंबे समय तक विदेशियों के बीच भारत की छवि सांप-सपेरों दिखाने वालों और तरह-तरह के अंधविश्वास के बीच रहने वालों की बनी रही। आज जब विज्ञान ने बहुत सी तरक्की करके बहुत सारी जादुई और मिथक कथाओं के सच को ऊजागर कर दिया है, तब भी यदि हम नागपंचमी पर सांप को दूध पिलाते, गोमूत्र, स्वमूत्र का सेवन करे तो हमारी समझ पर सवाल लाजमी है। हमारे टीवी सीरियल और फिल्मों में नाग-नागिन, पुर्नजन्म, भूत-प्रेत, जादू-टोना, काला जादू, चुड़ैल, प्रेतात्मा आदि की फैंटेसी निर्मित करके जनता को भ्रमित किया गया है, उसे अंधविश्वास बनाएं रखा है। आमजनों की धार्मिक आस्थाओं और भावनाओं के साथ खिलवाड़ करके बहुत से बाबा, साध्वी और प्रवचनकारों ने लोगों को अंधविश्वास के कुएं में ज्यादा ढकेला है। कई बार ऐसा लगता है कि भक्त, अनुनायी होने के कारण मूर्ख होना जरूरी है। देश में पढ़ाई-लिखाई के बावजूद इस तरह वे मूर्ख भक्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हाल ही में मेरठ में सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में भाजपा के नेता गोपाल शर्मा और कुछ साथी, शंख बचाते और जय श्रीराम और हर हर महादेव के नारे लगाते नजर आए। उनका दावा है कि पवित्र धुआं हवा में फैले वायरस को रोक देगा। कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने कोविड-19 की तीसरी लहर को रोकने के लिए यज्ञ चिकित्सा आयोजित करने का सुझाव दिया। अब देश को बाकी वैक्सीन मंगाने, आक्सीजन बनाने के काम को रोककर यज्ञ हवन की तैयारी करनी चाहिए।

महामारी की पहली लहर के दौरान, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दावा किया था कि भाभीजी पापड़ के सेवन से कोरोना वायरस से लडऩे के लिए एंटीबाडी बनाने में मदद मिलेगी। मध्य प्रदेश के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने दावा किया था कि अयोध्या में राम मंदिर बनने से कोरोना वायरस का अंत हो जाएगा। असम की भाजपा विधायक सुमन हरिप्रिया ने भी कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ गोमूत्र का सुझाव दिया था।

यह सही है कि गाय से हमारी आस्था जड़ी हुई है। सनातन धर्म से गाय को मां का दर्जा भी दिया गया है। गाय के साथ भावनात्मक लगाव और धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर कुछ लोग गायका उपयोग दूध की बजाए दंगों के लिए, मांब लिचिंग के लिए भी करने लगे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने धूप सेंकने का सुझाव देते हुए कहा था कि 10-15 मिनट धूप में खड़े रहने से विटामिन डी का उत्पादन होता है जो कोरोना वायरस को मार देगा।

गुजरात में कुछ लोग इम्युनिटी बढ़ाने गौशाला में जाकर अपने शरीर पर गाय के गोबर को मल रहे हैं और गाय के मूत्र का सेवन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित बैरिया विधानसभा से बीजेपी विधायक सुरेन्द्र सिंह कैमरे के सामने गौमूत्र पीते हुए नजर आए थे। उन्होंने जनता से अपील की थी कि गौमूत्र का सेवन करें उनकी सेहतका राज गौमूत्र ही है। साल 2020 में जब कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई थी तब अखिल भारत हिन्दू महासभा ने गोमूत्र पार्टी का आयोजन कर ये दावा भी किया था कि गोमूत्र पीने से कोरोना वायरस का खात्मा होगा। पशिचम बंगाल के भाजपा नेता दिलीप घोष कहते हैं की स्वस्थ रहने के लिए लोगों को गोमूत्र का सेवन करना चाहिए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि इसके कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि गाय के गोबर या गाय के मूत्र से कोरोना के खिलाफ जंग में इम्युनिटी बेहतर की जा सकती है। ये पूरी तरह से आस्था पर आधारित है।

हमारे देश में स्वास्थ्य सुविधाएं और वैज्ञानिक चेतना का विस्तार कभी भी सरकार की प्राथमिकता में नहीं रहा। सरकारें मंदिर-मस्जिद के झगड़ों में उलझी रही या फिर परंपरा के नाम पर बहुत सारे से आयोजनों उत्सवों को प्रमोट करके उन साधु-सतों को आगे बढ़ाती रही है। जो वैचारिक रूप से बहुत ही संकुचित, अंधविश्वासी और आधुनिक चिकित्सा विरोधी है। यह गोबर और गोमूत्र को महिमामंडित करने का नहीं हमारे स्वास्थ्य संसाधनों, सुविधा में बेहतर करने का समय है। हमारे देश में आईसीयू बेड्स ,ऑक्सीजन की कमी, दवाइयों कमी के कारण कई लोगों की जानें गयी हें। यह आपदा हम सबके  लिए एक सबक़ है। हम अपने हेल्थ इन्फ्ऱस्ट्रक्चर को मजबूत करे। वह गोबर और गोमूत्र के सेवन से नहीं वैज्ञानिक सोच और पहल से ही होगा।