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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - संतो घर में झगड़ा भारी

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - संतो घर में झगड़ा भारी

-सुभाष मिश्र

कबीर साहब का दोहा है संतों घर में झगड़ा भारी। कांग्रेस में इस समय यही हो रहा है। भाजपा भी इससे अछूती नहीं है किन्तु वहां अनुशासन का डंडा मजबूत है। कांग्रेस हाईकमान अपने कथित आंतरिक लोकतंत्र की दुहाई देकर सबको अपनी ताकत दिखाने का मौका दे रहा है। हाल ही में पंजाब में हुई घटना के बाद जी-23 के कांग्रेसी नेताओं ने एक बार फिर केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल उठाया है। वैसे तो राजनीतिक पार्टियां में जी हुजूरी की परंपरा पुरानी है। कहावत है कि दिल्ली ऊंचा सुनती है। अब दिल्ली की दर्ज पर क्षेत्रीय क्षत्रप भी ऊंचा सुनने लगे हैं। उन्हें ठकुर सुहाती अच्छी लगती है। चारण भाह की परंपरा के इस देश में लोग अभी भी रीतिकाल के राजाओं की तरह वही सुनना पसंद कर रहे हैं, जो उन्हें मजा दे। इस समय बड़ी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं का कद पार्टी से बड़ा हो गया है। समय-समय इसकी स्तुति करने वाले कभी इंदिरा इज इंडिया कह सकते हंै तो कभी मोदी है तो मुमकिन है। इस समय देश की अधिकांश पार्टियों में विचारधारा, सिद्धांत सब हाशिए पर है, वहां व्यक्तिगत बुरी तरह हावी है। इस समय एक ही परंपरा फल-फूल रही है जो कि जी हुजूरी की है।

फिलहाल कांग्रेस में मचे बवाल की सबसे ज्यादा चर्चा में है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि इस समय हमारे यहां अध्यक्ष नहीं है, हम जानते भी हैं और नहीं भी जानते हैं कि फैसले कौन कर रहा है। सिब्बल कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाकर वर्तमान हालात पर चर्चा करना चाहते हैं। जी-23 के नाम से चर्चित कांग्रेस नेताओं के समूह ने बहुत सारे मुद्दों पर कांग्रेस नेतृत्व की नीतियों को लेकर सवाल उठाए। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पार्टी हाईकमान के रवैये को लेकर इस्तीफा दे दिया। जिस नवजोत सिद्धू को कांग्रेस का नया स्टार बनाकर प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, वो कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़कर निकल गए। वे अस्थिर चित के हैं। कब क्या करेंगे कोई नहीं जानता। राजस्थान, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस हाईकमान का जो रवैया है वह भी यहां की राजनीति में अस्थिरता पैदा कर रहा है। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों से ढाई-ढाई साल की सत्ता को लेकर जो खिंचतान बनी हुई है उसने भी यहां की अच्छी खासी चल रही भूपेश बघेल की सरकार को अस्थिर करके रख दिया है। विधायकों का दिल्ली जाकर शक्ति परीक्षण करने का सिलसिला लगातार जारी है। कांग्रेस हाईकमान के फैसलों पर अब उन्ही की पार्टी के नेता सारेआम उंगुली उठाने लगे हैं। देश का विपक्ष जब कांग्रेस के नेतृत्व में एकत्र होकर भाजपा से लडऩे के मंसूबे बना रहा है तब कांग्रेस अपने ही घर को ठीक से संभाल नहीं पा रही है। इस समय कांग्रेस में कोई एक हाईकमान नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस में एक बार फिर से राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की मांग उठने वाली है। जगदलपुर में हुई छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस की बैठक में राहुल को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिया गया है। इधर, टीएस सिंहदेव खेमा हर दूसरे दिन उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाते हुए खबरें फैलाने के काम में लगा है। छत्तीसगढ़ के नौकरशाही मूकदर्शक की तरह तमाशा देखते हुए ऊंट किस करवट बैठता है, ये देख रही है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेता पूरी तरह गांधी परिवार के साथ खड़े हैं। यही वजह है कि कपिल सिब्बल के बयान पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव ने बिना देर किये कड़ी प्रतिक्रिया दी। भूपेश बघेल ने कहा कि हमें सोनिया-राहुल पर भरोसा है। दोनों ने कठिन समय में कांग्रेस पार्टी को संभाला है। दरअसल, राज्यों के मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नेता फिलहाल किसी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहते। वहीं कांग्रेस के पुराने नेता जिन्हें जी-23 के नाम से पुकारा जाता है उनमें से एक गुलाम नबी आजाद ने पत्र लिखकर कार्यसमिति की बैठक बुलाने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कुछ विधायक पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में है। ये विधायक अपने साथ 46 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र भी ले गए हैं। जिसमें भूपेश बघेल के नेतृत्व को ही यथावत रखने कहा गया है। इसके पहले भी छत्तीसगढ़ के पचास से अधिक विधायक दिल्ली में जाकर अपना पक्ष रख चुके हैं। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व जो राज्यों की जमीनी सच्चाई और भाजपा की रणनीति से पूरी तरह परिचित नहीं है, वह चुनाव के पहले जिस तरह से पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान में अपने नेताओं और सरकार के साथ व्यवहार कर रहा है वह चौंकाने वाला है।

कांग्रेस शासित राज्यों में हो रही उठापटक से कांग्रेस हाईकमान की कमजोरी साफ जाहिर हुई हैै। भाजपा जहां एक नीति के तहत आगामी चुनाव में जीत के गणित को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्री बदल रही है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व बिना जमीनी सच्चाई जाने ऐसे फैसले ले रहा है कि उसके नेता उसी से नाराज होकर अपनी ताकत और तेवर दिखा रहे हैं। पंजाब की घटना से कांग्रेस नेतृत्व की किर किरी हुई है।