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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -सारे रिश्ते-नाते ऑन लाईन

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -सारे रिश्ते-नाते ऑन लाईन

-सुभाष मिश्र
अभी हमारी उड़ानों पर कुछ देश ने प्रतिबंध लगाया है। हमारा यहीं रवैय्या रहा तो बहुत से देश हमारी आवाजाही, हमारी उनके देश में पढ़ाई-लिखाई, नौकरी पर भी रोक लगा सकते हैं। हमारी सरकार मानकर चल रही है कि हमें कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी। कोरोना संक्रमण के चलते धीरे-धीरे सारे नाते-रिश्ते ऑन लाईन तक सिमटकर रह गये हैं। मारे डर के कोई किसी को न अपने घर बुला रहा है और न दूसरों के घर जा रहा है। कोरोना से ज्यादा कोरोना का डर है। इस डर में अस्पतालों की दुर्दशा, दवाईयों की कालाबाजारी और आक्सीजन की कमी ने बहुत ज्यादा इजाफा किया है। बचा कुछ डर मीडिया और सोशल मीडिया पर आ रही खबरों से है। कोरोना के नाम पर पॉजिटिव की खबरें भी बहुत नेगेटिव हैं। पूरा समाज नेगेटिविटी में जीना चाहता है और मीडिया यही कर रहा है। आदमी अपने घर में ही रहने में अपनी भलाई समझ रहा है। गरीब और तंग बस्तियों में रहने वालों की बात अलग है, वे चाहकर भी अपना आंगन, झुग्गी और अपने रिश्तों में दूरी नहीं रख सकते। केंद्र सरकार फिर ऐसे 80 करोड़ लोगों को गरीब अन्नकल्याण योजना से मई-जून माह में पांच-पांच किलो अनाज मुफ्त देने वाली है। देश में इस समय अनाज से ज्यादा आक्सीजन की जरूरत है। जिनके सामने भूखे मरने की नौबत आ रही थी,वे बेदर्द और बेमुख्त शहरों को छोड़ एक बार फिर अपने गांवों की ओर चल पड़े हैं। इस बार पहले की तुलना में गॉंव अधिक बीमार और कमजोर हैं। जो लोग अस्पताल में भर्ती है वे वहां की लापरवाही, संभावित आगजनी, लूट और आक्सीजन की कमी से लेटे-लेटे दम तोडऩे के लिए मजबूर है। मुम्बई से लेकर रायपुर तक अस्पताल अग्नि समाधि स्थल साबित हो रहे हैं। हमारे देश में कोरोना महामारी में बहुत से अस्पतालों का चरित्र उभरकर सामने आया है। जहां कुछ लोग सफेद पोशाक में लूटेरो की तरह दिखाई देते हैं। दवाई दुकान से लेकर किराना, सब्जी वाले जिसे लूटने का अवसर मिल रहा है, वह इस कोरोना नामी लूट में शामिल है। हरिद्वार के कुंभ में लौटे लोग पता नहीं कितना प्रसाद किस-किस को बांटेंगे और कितने लोग मोक्ष को प्राप्त करेगें यह कह पाना मुश्किल है, किन्तु फिलहाल इनसे कोई भी गंगाजल लेने तैयार नहीं है। मई में पांच राज्यों की विधानसभा के चुनाव परिणाम आते तक इन राज्यों में कोरोना संक्रमण के जो परिणाम आयेंगे, वह चौकाने वाले होंगे। अभी पश्चिम बंगाल, असम से कोरोना संक्रमण के भयावह रूझान आने शुरू हो गये हैं। कोई जीतेगा पर हारेगा देश का नागरिक।

कोरोना संक्रमण को चरम पर पहुंचाने के बाद हमारे राजनैतिक दल अब चुनावी रैलियों से देखा-देखी की दूरी बना रहे हैं। न्यायालयों को भी देर से चुनाव आयोग की लापरवाही नजर आ रही है। सोते से अचानक जागे हमारे हुकुमरानों को अब लग रहा है कि हमे एक देश होकर काम करना चाहिए ये बात याद आ रही है। प्रदेशों के बीच आक्सीजन सप्लाई को लेकर मची खिंचातान के बीच यह काम अब सेना के हवाले किया जा रहा है। अकेले-अकेले मन की बात कहने वाले प्रधानमंत्री को उन्हीं के पदचिन्हों पर चलने वाले उनके चेले अरविंद केजरीवाल ने आज उन्हीं की मीटिंग में टीवी चैनल पर लाईव आकर बता दिया, ये खेल क्या है। भले ही बाद में प्रधानमंत्री की नाराजगी के चलते उन्होंने माफी मांग ली। हमारे देश में मीडिया को जरिया बनाकर राजनीति करने का खेल आज चरम पर है। हर राजनेता अब जनता के पास जाने के बजाए ट्विटर, इस्ट्राग्राम पर जाता है।
सुप्रीम कोर्ट में आज कोरोना को लेकर होने वाली सुनवाई टल गई। कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर केंद्र सरकार को चार बिन्दुओं पर जवाब मांगा था। अब यह सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हरीश साल्वे को एमक्स क्यूटी मानी न्याय मित्र बनाया था। जिस पर कुछ वरिष्ठ वकीलों ने आपत्ति की थी और सुप्रीम कोर्ट की मंशा को लेकर सवाल उठाये थे। सुप्रीम कोर्ट को यह सफाई देनी पड़ी की उनका इरादा किसी हाईकोर्ट को सुनाई से रोकना नहीं था। यहां सवाल यह भी है कि वहीं के वकील सुप्रीम कोर्ट की मंशा पर संदेह क्यों कर रहे हैं? इस बीच दिल्ली सहित बहुत से राज्यों में आक्सीजन का संकट बरकरार है। मिर्जा गालिब का एक शेर है
की मिरे क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा
हाए उस ज़ूद-पशीमाँ का पशीमाँ (पश्चाताप) होना।।

कोरोना से संक्रमित होने वालों का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और यह स्थिति तब है जब कोरोना की रिपोर्ट आने में काफी दिन लग रहे हैं। कोरोना जांच की रफ्तार धीमी है। यदि कोरोना जांच की रफ्तार बढ़ी और रिपोर्ट तुरंत मिलने लगी तो आज जो हमारी संख्या 3 लाख 33 हजार है, वह संख्या हमारी हमारे देवी-देवताओं के बराबर 33 करोड़ भी हो सकती है। कोरोना संक्रमण के चलते अब आम आदमी के साथ-साथ बड़े-बड़े नेता ,अभिनेता, पैसे वालों के मरने का भी क्रम शुरू हुआ है। पूरे देश को झांसा देकर कोरोना की दवाई बेचने वाले रामदेव बाबा के पतंजलि के 83 लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाये गये है। देखते है अब ये कौन सी दवाई खाते हैं। मौत के इस तांडव ने एक बार पूरे देश के लोगों को बता दिया है, कि यदि अबकी नहीं चेते तो आगे इससे भी बुरा होगा।

दरअसल हमारा देश बाबू, बाबा और बहुत से ऐसे नेताओं के प्रभामंडल में आ गया है, जो अपने तरीके से लोगों को बेवकूफ बनाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं। बाबू यानी हमारी ब्यूरोक्रेसी और राजनेता जो अभी तक अपने आपको सेफ समझ रहे थे और जिसके लिए आमजन की स्वास्थ्य सुविधाएं सेकेंडरी थी, अब खुद हलाकान है। बहुत सारे एलिट क्लास को लगता था की शिक्षा और स्वास्थ्य की जो मौजूदा व्यवस्था है वो उनके लिए पर्याप्त है। पैसे, पॉवर से वे देशी विदेशी सब इलाज करा सकते हैं। कोरोना वायरस की उड़ान ने सबके पैर काटकर उन्हे घर बिठा दिया है।

फैज अहमद फैज का एक शेर है -
चलते हैं दबे पांव कोई जाग न जाये
गुलामी के असीरों की यह खास अदा है
होती नहीं जो कौम हक बात पे यकजा (एक साथ)
उस कौम का हाकिम ही बस उनकी सजा है।

इतने सालों में हमने जो अपने हकीम चुने हैं, उनकी प्राथमिकताएं क्या है? ये भी हमको समझना पड़ेगा। यदि देश का सबसे बड़ा हाकीम देश को बीमारी की हालत में छोड़कर चुनाव के नाम पर आमजनता को भ्रमाने निकल जाये तो, उस देश का वहीं हश्र होना है जैसा अभी हो रहा है।

जब कोरोना खाली बातों से, नारों से, ताली-थाली से कंट्रोल नहीं हुआ और पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मीम बनने लगे, आलोचना होने लगी तो उन्होंने तत्काल अपना पश्चिम बंगाल का दौरा, रैली निरस्त कर मुख्यमंत्रियों की आनलाईन बैठक आहत की। प्रधानमंत्री की बैठक में देश के 28 राज्यों और 8 केन्द्र शसित प्रदेशो में से केवल 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कुछ और लोगों ने हिस्सा लिया। यह इस बात का संकेत है कि हमारे बाकी राजनेता कोरोना को लेकर कितने गंभीर है।

पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई बैठक में छत्तीसगढ़ और दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा की राज्यो को कोरोना के वैक्सीन केंद्र के समान कीमतों पर ही मिलने चाहिए। जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति में राज्यों की अड़चन खत्म होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना टीकाकरण के चालू अभियान की समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ को भी उसी दर पर वैक्सीन उपलब्ध कराने की मांग रखी, जिस दर पर वह केंद्र सरकार को मिल रही है। मुख्यमंत्री ने जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति में राज्यों की अड़चन खत्म करने को भी कहा।

सीरम इंस्टीट्यूट ने अपनी कोवीशील्ड वैक्सीन के लिये जो मूल्य तय किये हैं उसके अनुसार प्राइवेट अस्पतालों के लिये कोवीशील्ड वैक्सीन का दाम 600 रुपए प्रति डोज तय किये। राज्य सरकारों को 400 रुपए और केंद्र सरकार को 150 रुपए में देने की बात कही है। छत्तीसगढ़ सहित कुछ राज्य तो अपने यहां 18 साल से उपर के लोगो को निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध करा रहे हैं किन्तु ये सबके लिए संभव नही है। यदि एक देश है तो नियम, प्रकिया और दरें भी एक सी होनी चाहिए। सबके हिस्से की आक्सीजन सबको मिलनी चाहिए।
जाने कब आ के वो दरवाज़े पे दस्तक दे दे
जि़ंदगी मौत की आहट से डरी रहती है।