breaking news New

चारो ओर विकास के बयार लेकिन आज भी नदी नालो और बरसाती पानी पीने के लिए मजबूर लामनगोंदी ग्रामवासी

चारो ओर विकास के बयार लेकिन  आज भी नदी नालो और बरसाती पानी पीने के लिए मजबूर लामनगोंदी ग्रामवासी

सुकमा- यूँ तो छत्तीसगढ़ में शासन ने पेयजल हेतु कई योजनाओं का संचालन कर रखा हैं व शासन प्रसासन  योजनाओ का बखान करते नहीं थकते पर आज हम आपको सुकमा जिले की  हकीकत से रूबरू करवाते हैं आजादी के 70 दसक के बीत जाने बाद भी आखिर क्यू मजबूर है नदी नालो और बरसात के पानी पिने को ग्राम वासी इस सवाल का जवाब सरकारी  अमलो के पास भी नही है शायद लेकिन  इन बातो पर विश्वास नही होगा सरकारी योजनाओ से विभाग थकता नही बताने को लेकिन लामनगोंदी सुकमा जिले में एक स्थान ऐसा भी है जहां बरसात के दिनों में ग्रामीण बरसाती पानी से बुझाते हैं अपनी प्यास हम बात कर रहे हैं धुर नक्सल प्रभावित ग्राम लामनगोंदी,चावरपारा,पटनम पारा,नयापारा की जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर बसे यह गाँव छिंदगढ़ ब्लॉक के ग्रामपंचायत चिउरवाड़ा के आश्रित ग्राम हैं बरसात के दिनों में त्रिपाल बांध कर बारिस के पानी को इकट्ठा कर पीने वाले इन ग्रामीणों ने बहुत बार अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी  प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की 

ग्रामवासियों ने भाजपा नेत्री प्रदेश उपाध्यक्ष भाजयुमो अधिवक्ता दीपिकाशोरी से अपनी समस्या रखी

ग्रामवासियों ने अपनी समस्या के निवारण के लिऐ भाजपा नेत्री को बुलाया और अपनी समस्या रखा जिससे  ग्रामीणों के दर्द को देख दीपिका शोरी ने विश्वास दिलाया की बहुत जल्द इन समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे और विश्वास दिलाया की समस्या हर समय बनी नही रहती ।

त्रिपाल बांध कर एकत्र करते है बरसाती पानी

ग्रामवासियों ने दीपिका से बताया कि वर्ष भर ये नदी के पानी को पीते हैं परन्तु बरसात के दिनों में नदी में बाढ़ आने से इनकी समस्या बढ़ जाती है साफ पानी नहीं मिलने पर ये पूरी तरह बरसाती पानी के इन्तजार मे आकाश निहारते रहते  है और बारिस होने पर संग्रहकर  मजबूरी वस पिते है बरसाती पानी   

बडे बडे जल ,जलाशय  की योजनाओं  से बेखबर ग्रामीणों का चुआं ही साहारा

इन ग्रामीणों को वर्षभर पीने के पानी हेतु नदी के किनारे रेत खोदकर चुआं पर निर्भर रहना पड़ता है जब धीरे धीरे पानी बढ़ने पर नदी का पानी गन्दा हो जाने पर इस चुआं का सहारा भी छूट जाता है और आकाशिय पानी का ही एकमात्र शाहार शेष रह जाता है।