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सैकड़ों युवाओं की मौत का कारण हैं नशे के धंधेबाज: सुप्रीम कोर्ट

सैकड़ों युवाओं की मौत का कारण हैं नशे के धंधेबाज: सुप्रीम कोर्ट

नशे का धंधा करने वाले समाज के लिए खतरा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या करने वाला एक या दो लोगों की मौत का जिम्मेदार होता है, लेकिन नशीले पदार्थों का धंधा करने वाले लोग हजारों निर्दोष युवाओं को मौत की आग में झुलसाने का कारण बनते हैं। इसका समाज पर बेहद घातक प्रभाव पड़ता है। ऐसे लोग समाज के लिए खतरा हैं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के नवंबर, 2019 के एक फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस निर्णय को बरकरार रखा था, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने एक किलोग्राम हेरोइन के साथ दबोचे गए व्यक्ति को एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत सजा देने लायक माना था और उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही 15 साल कैद की सजा सुनाई थी। शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने कहा, नशीले और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की देश में तस्करी और उनके गैरकानूनी आवागमन से समाज के बड़े हिस्से में नशे की लत बढ़ रही है। खासतौर पर किशोर बालक और बालिकाएं इस नशाखोरी के आदी बन रहे हैं और यह खतरा अब गंभीर और  खतरनाक अनुपात में बढ़ गया है।

पीठ ने कहा कि  किसी भी एनडीपीएस एक्ट के मामले में सजा सुनाते समय समाज के हित के संपूर्ण पहलू को ध्यान में रखना भी आवश्यक है। आरोपियों के पक्ष पर विचार करते हुए यह दिमाग में रखा जाना चाहिए कि हत्या के मामले में आरोपी एक या दो लोगों की मौत का जिम्मेदार होता है, जबकि नशीले पदार्थों का धंधा करने वाले लोग बहुत सारे निर्दोष युवा पीडि़तों को मौत की आग में झुलसाने के जिम्मेदार होते हैं। ये समाज के लिए खतरा हैं।