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भिलाई : 26 नवंबर को प्रस्तावित अखिल भारतीय औद्योगिक एवं आम हड़ताल का प्रचार अंतिम दौर में

भिलाई :  26 नवंबर को प्रस्तावित अखिल भारतीय औद्योगिक एवं आम हड़ताल का प्रचार अंतिम दौर में

भिलाई । 26 नवंबर को प्रस्तावित अखिल भारतीय औद्योगिक एवं आम हड़ताल का प्रचार अपने अंतिम दौर में हैं सीटू सहित विभिन्न ट्रेड यूनियने संयुक्त एवं स्वतंत्र रूप से कर्मियों के बीच जाकर हड़ताल से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के साथ-साथ पर्चा वितरण कर हड़ताल में भागीदारी करने की अपील कर रहे हैं।

ग्रेच्युटी सीलिंग का प्रस्ताव क्यों रखा प्रबंधन जवाब दे

9 नवंबर को एनजेसीएस की वर्चुअल मीटिंग में प्रबंधन ने ग्रेच्युटी सीलिंग का प्रस्ताव रखा। ज्ञात हो कि 2012 का वेतन समझौता जो 2014 में संपन्न हुआ था उस समय प्रबंधन ने अंतिम दौर के बैठक में नए भर्ती होने वाले कर्मियों के ग्रेच्युटी सीलिंग का प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि केंद्र सरकार ने हर हाल में ग्रेच्युटी सीलिंग करने पर ही वेतन समझौता को अंतिम रूप देने की बात कही है ।  इस प्रस्ताव पर किसी भी यूनियन ने दस्तखत नहीं किया था। तब प्रबंधन ने 2014 के पश्चात भर्ती होने वाले कर्मियों से सीधे समझौता कर उनका ग्रेजुएटी सीलिंग करना शुरू कर। अब प्रबंधन 1 जनवरी 2017 से लंबित वेतन समझौता के लिए सभी कर्मियों के लिए ग्रेच्युटी सीलिंग करने के साथ वेतन समझौता करने का प्रस्ताव रखा है जिसे सभी यूनियनों ने एकमत के साथ ठुकरा दिया है प्रबंधन यह जवाब दे की ग्रेच्युटी का मामला ग्रेच्युटी कानून के तहत कर्मियों एवं प्रबंधन के बीच का समझौता है ऐसे में सरकार बार-बार दखल क्यों दे रही है तथा प्रबंधन सरकार की उस दखल के आगे अपना जवाब क्यों नहीं प्रस्तुत कर रही है।

प्रबंधन सरकार के लिए जारी करें एडवाइजरी

हड़ताल की तारीख नजदीक आने के साथी प्रबंधन ने हड़ताल को लेकर कर्मियों एवं यूनियनों के लिए एडवाइजरी पत्र जारी किया है इस पर सीटू ने प्रबंधन के एडवाइजरी पत्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार ने अफॉर्डेबिलिटी क्लास लगा कर वेतन समझौता पर रोक लगा दिया है सुविधाएं लगातार बंद होती चली जा रही है ग्रेच्युटी सीलिंग करने की बात कही जा रही है एवं महंगाई भत्ता पर अगले जून तक वृद्धि करने से रोक लगा दी गई है ऐसे में प्रबंधन सरकार को एडवाइजरी पत्र जारी करते हुए या सुझाव देना चाहिए की संयंत्र के कर्मी संयंत्र में उत्पादन कर ना केवल देश के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं बल्कि अपना वेतन एवं भत्तों एवं सरकार को दिए जाने वाले डिविडेंड के साथ साथ कंपनी को लाभ की स्थिति में भी बनाए रखे हैं ऐसे में कर्मियों के वेतन भत्तों से लेकर महंगाई भत्ता तक के लिए किसी भी तरह का सहायता ना करने वाला सरकार बार-बार कर्मियों के वेतन भत्तों एवं सुविधाओं में कटौती के लिए पत्र क्यों जारी करता है

गलत निर्णय है डी ए पर रोक लगाना 

सीटू नेता ने कहा कि कोरोना संक्रमण के काल में जहां निजी उद्योग उत्पादन से लेकर सेवाओं तक में पीछे हटे हैं वही सार्वजनिक उद्योग एवं सरकारी क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मी लगातार कार्य करते हुए उत्पादन एवं सेवाओं को जारी रखे हैं जिसके कारण देश के अंदर विकास दर धीरे-धीरे ही सही सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है ऐसे में बढ़ती महंगाई के कारण यदि काम करने वाले कर्मियों के महंगाई भत्ता मैं वृद्धि होती है तो उस पर रोक लगाने के बजाय उस महंगाई भत्ता को देते हुए कामगारों के मनोबल को बनाए रखना चाहिए जिससे कि कर्मियों की क्रय शक्ति बढ़ सके ताकि इस महामारी काल में मार्केट एवं विकास दर दोनों में उत्तरोत्तर वृद्धि हो सके

भ्रम जाल है कार्य दिवस के संदर्भ में जारी नोटिफिकेशन

 19 तारीख को 12 घंटे के कार्य दिवस का नोटिफिकेशन जारी किया गया एवं इसके साथ ही यह बताया गया कि 1 सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा कार्य नहीं लिया जाना है यदि कोई व्यक्ति 4 दिन तक 12 घंटा कार्य करता है तो 4 दिन में ही 48 घंटे का कार्य संपन्न हो जाता है ऐसे में 4 दिन के बाद सप्ताह के बचे हुए 3 दिन कंपनीज इन कर्मियों से कार्य कराएगा यह स्पष्ट नहीं है साथ ही उस नोटिफिकेशन में यह भी दर्ज है की सरकार उन नियमों को आवश्यकता अनुसार बदल सकता है ऐसे में इस नोटिफिकेशन का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि निजी मालिक अपने कंपनी में सामान्यता 10 से 12 घंटे तक कार्य लेते हैं जो कि गैर कानूनी है अब सरकार निजी मालिकों के इशारों पर 12 घंटा कार्य करने की संस्कृति को कानूनी बनाना चाहती है इसीलिए सरकार निजी कंपनियों के इशारों पर इस तरह के कानूनों को संसद में पेश कर एन केन प्रकारेण पारित करवा रही है जबकि आज भी विश्व में कार्य दिवस 8 घंटों का ही है  ।