breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - वैक्सीन के बहाने सरकार पर हमला

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  - वैक्सीन के बहाने सरकार पर हमला

-सुभाष मिश्र
हमने विश्व गुरु बनने और अपनी उदार छवि दिखाने के लिए विदेशी को 7 करोड़ से अधिक वैक्सीन देने का प्रचार किया, उसमें से 5 करोड़ से अधिक वैक्सीन तो हमारी थी ही नहीं। ये वैक्सीन दवा कंपनी के बीच हुए व्यवसायिक करार के कारण उन देशों को देनी ही थी, जिसने कच्चा माल और वैक्सीन निर्माण तकनीक की वैज्ञानिक सलाह ली गई। करीब एक करोड़ ही वैक्सीन हमने आसपास के छोटे-मोटे देशों को दी, किन्तु प्रचारित-प्रसारित ऐसे किया कि 7 करोड़ वैक्सीन विदेशों को दान स्वरूप भेजी गई थी। जब यह झूठा प्रचार देश में वैक्सीन की कमी के कारण केंद्र सरकार के गले की हड्डी बन गया तो उसे इसका खुलासा करना पड़ा। अब कांग्रेस दिल्ली में एक पोस्टर कैम्पेन चलाकर पूछ रही है, मोदी जी हमारे बच्चों को वैक्सीन विदेश क्यों भेजी। इस पोस्टर अभियान से नाराज होकर अब सरकार के इशारे पर पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर हो रही है, गिरफ्तारी हो रही है, तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ट्वीटर पर ट्वीट करके कह रहे हैं मुझे भी गिरफ्तार करो। लोग इस समय की तुलना आपातकाल से कर रहे हैं।

फिलहाल तो देश में यह कहावत चरितार्थ होती दिख रही है कि न नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी। कांग्रेस भी जानती है कि देश में वैक्सीन की कमी है। सरकार युद्धस्तर पर ही वैक्सीन उत्पादित कर लें, बाहर के देशों से मंगवा लें फिर भी साल भर तक तो सभी को वैक्सीन नहीं लगने वाली। रही बच्चों की बात तो अभी तो 18 साल से ऊपर वालों के लिए ही वैक्सीन के लाले पड़ रहे है, छोटे बच्चों का नंबर तो अभी आया नहीं, किन्तु कांग्रेस ने एक कैम्पेन चलाकर मोदी जी हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दिया, चलाया है। दरअसल कांग्रेस को समूची वैक्सीन व्यवस्था पर सवाल उठाना था। इसी कैम्पेन के बहाने कांग्रेस और आप पार्टी भाजपा और मोदीजी के झूठ और लापरवाही को उजागर कर रहे हैं।

सूचना समर के इस इस दौर में बहुत सारी लड़ाइयां मैदान में नहीं मीडिया के जरिये लड़ी जा रही है। पूरा देश इस समय कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है। देश के अधिकांश हिस्सों में कोरोना वायरस की चैन ब्रेक करने लॉकडाउन है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन केंद्रों पर लंबी-लंबी लाइन है। सेंटरों में पर्याप्त टीके नहीं होने के कारण सभी को वैक्सीन के टीके फिलहाल नहीं लग पा रहे हैं। कोरोना से होती मौतों और अव्यवस्था को लेकर लोगों के मन में आक्रोश है। यह आक्रोश सभी शहरों पर है, किन्तु देश जिन पर सबसे ज्यादा भरोसा करके मोदी है तो मुमकिन है, मान बैठा था, उन पर और उनकी सरकार पर हमला कर रहा है। राजनीतिक पार्टियों भी केंद्र सरकार को घेरने में लगी है। वही जन आक्रोश की अभिव्यक्ति सोशल मीडिया, अपसी बातचीत में दिखाई-सुनाई दे रही है। इस पूरे माहौल में सरकार की गिरती टीआरपी और बिगड़ती छवि को रोकने के लिए सरकार और पार्टी के स्तर पर जो प्रयास होने चाहिए वे हो रहे हैं, किन्तु जो अंधभक्तगण हैं, जिन्हें अपने आका की आलोचना सुनना बिल्कुल पसंद नहीं है, वे इजराइल और फिलिस्तीन के ताजा झगड़े का उदाहरण देकर कह रहे है कि देखो जैसा इजराइल ने किया वैसा ही सबक यहां की आलोचकों को सीखना चाहिए। ये लोग आलोचना को देश भक्ति से जोड़ते है। जो सरकार की आलोचना करे, वह देशद्रोही है, अर्बन नक्सली है।

दिल्ली में प्रधानमंत्री के खिलाफ पोस्टर लगाने वालों के विरूद्ध 25 एफआईआर दर्ज करके 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें अदालत ने जमानत दे दी। जब सरकारे, कोई व्यवस्था जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती तो ऐसी सरकार, व्यवस्था को आलोचना सुनना ही होता है। ऐसी सरकार जनतंत्र में आलोचना लोक अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा माध्यम है। केंद्र में जब से मोदी सरकार आई है, उसे किसी भी स्तर पर अपनी आलोचना पसंद नही। बावजूद इसके ट्रको के पीछे लिखा है कृपया हार्न न बजाये, मोदी सरकार सो रही है।

गाजा में इजरायल की सेना ने मीडिया संस्थानों के आफिस वाली बिल्डिंग जिसमें द एसोसिएटेड प्रेस और अल जजीरा जैसे मीडिया का आफिस है, उस पर एयर स्टाईक कर बिल्डिंग को उड़ा दिया। इसे लेकर हमारे देश में सोशल मीडिया के जरिये से कुछ लोग इस तरह की टिप्पणी दे रहे है कि जो खिलाफ में बोलेगा उसे ऐसा ही सबक सिखाया जाना चाहिए।

किसी भी देश में नागरिक जीवन पर होने वाले हमलों की विश्वव्यापी आलोचना होती है। फिलिस्तीन में हो रही हिंसा के खिलाफ लोग लंदन की सड़को पर एकत्र होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारे देश में भी म्यांमार और फिलिस्तीन में हुए हमलों की आलोचना हो रही है और होना ही चाहिए, किन्तु इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़कर यह कहना कि यदि तुम खिलाफ में खबरे दिखाओगे तो तुम्हें वैसे ही नेस्तनाबूद किया जाना चाहिए जैसे गाजा में हुआ है।

सरकार के खिलाफ जब भी कोई असंतोष, प्रतिरोध या असम्मानजनक टिप्पणी होती है तो सरकार मौजूदा कानून लेकर विरोध के स्वर को दबाना चाहती है। देश में अभिव्यक्ति की आजादी पर सबसे बड़ा हमला आपातकाल के दौरान हुआ था। जहां विरोध में बोलना अपराध था। किन्तु जनता ने इसका पुरजोर विरोध कर मौजूदा सरकार को हटा दिया। उसके बाद सभी को लगा था कि ये देश में अभिव्यक्ति का सम्मान होगा, किन्तु ऐसा नहीं हुआ। सरकार कोई भी हो उसे अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं है। वह विरोध के स्वर को किसी भी तरह दबाना चाहती है। जबकि हमारे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार बनाया गया, किन्तु 19(2) में इसे सीमित करने के आधार भी बताए गए। ये आधार थे झूठी निन्दा, मानहानि, अदालत की अवमानना या वैसी कोई बात जिससे शालीनता या नैतिकता को ठेस लगती है या जिससे राष्ट्र की सुरक्षा खतरे में पड़ती है या जो देश को तोड़ती है। संविधान लागू होने के तुरंत बाद 1951 में ही प्रथम संविधान संशोधन के द्वारा इसमें नए आधार जोड़े गए और फिर 1963 में 16वें संशोधन के जरिए उसे विस्तारित किया गया। इस तरह भारत की संप्रभुता एवं एकता, दूसरे देशों से दोस्ताना सम्बंध तथा हिंसा भड़काने के आधार पर भी अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित किया जा सकता है।

सन् 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया गया, जिसमें 2008 में संशोधन किया गया और संशोधित कानून 2009 में लागू हुआ। गत 25 फरवरी को केन्द्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी(अंतरिम दिशा निर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 जारी किया। इसमें ऑनलाइन न्यूज मीडिया सहित सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए सरकार के पास कई शक्तियां हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत बहुत से लोगों पर मुकदमे भी चलाए गए हैं और देशद्रोह तक के आरोप लगाए गये। अभी सबसे ज्यादा विवाद देशद्रोह के मामले को लेकर है, क्योंकि कई लोगों पर ऐसे मुकदमे चलाए गए हैं। एक आरोप विभिन्न सरकारों पर यह लगता रहा है कि औपनिवेशिक काल के प्रावधान (भारतीय दण्ड विधान की धारा 124-5) का दुरुपयोग कर असहमति को दबाया जा रहा है। सरकार कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों की आलोचना को राष्ट्र की छवि के साथ जोड़कर देख रही हैं। उनका मानना है कि देशद्रोही ताकतें इसका फायदा उठायेगी। देश की छवि पूरी दुनिया में खराब होगी। 16 जनवरी 2021 से शुरू हुए टीकाकरण अभियान के अंतर्गत अभी तक देश की 140 करोड़ आबादी में से 17 करोड़ लोगो को ही कोरोना का टीका लगा है। बच्चों की बारी तो अभी आना बाकी है पर उनके बहाने देश में टीके की और अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा गर्म है।