कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः ओ काठ के भगवान जी!

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः ओ काठ के भगवान जी!

आफ़त में जान जी।

ओ काठ के भगवान जी!


चकिया के पाटों-सी,

नदिया के घाटों-सी,

आँखों के सागर में आया तूफान जी।

ओ काठ के भगवान जी!


यह दुनिया खूब रही,

धरती ही डूब रही,

देखो घर लूट रहे दूर के मेहमान जी।

ओ काठ के भगवान जी!


भव में सब दीन हुए,

वैभव से हीन हुए,

बस्ती में सुन पड़ती बेबस की तान जी।

ओ काठ के भगवान जी!


बैठे पट बन्द किये,

कोई क्या मरे-जिये,

मंदिर के पास खुली मौत की दूकान जी।

ओ काठ के भगवान जी!


आफ़त में जान जी।

ओ काठ के भगवान जी!