घाटा भरने हाट बाजार में चला रहे थे फिल्म, तालाबंदी हुई तो वर्चुअली लोगों तक पहुंच रहे

घाटा भरने हाट बाजार में चला रहे थे फिल्म, तालाबंदी हुई तो वर्चुअली लोगों तक पहुंच रहे

AKJ-रायपुर : लॉकडाउन का तीसरा चरण भी आधा बीत गया है लेकिन तालाबंदी के दौरान मददगारों का हौसला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना के कर्मवीरों की कहानी के इस चरण में आज हम आपको एक ऐसे कर्मवीर से मिलाने जा रहे हैं जो नया तो नहीं है लेकिन उसकी पहचान अभी नई-नई है। कर्मवीरों की कहानी के क्रम में AKJ न्यूज़ की टीम पहुंची छत्तीसगढ़ के नए नवेले फिल्म एक्टर राज साहू की तालाबंदी के दौरान एक्टिविटी जानने।

जो बुरे वक्त में साथ दे वही सच्चा दोस्त,
तालाबंदी के दौरान बीता हुआ 43 दिन अब तक की जिंदगी का सबसे डरावना समय रहा है। हम सब के मन के भीतर कोरोना का डर इस कदर बैठ गया है की अपनों के नजदीक बैठने से भी मन घबराता है। जब तालाबंदी हुई उसके दो महीने पहले ही मेरी पहली फिल्म रिलीज हुई थी, लेकिन फरवरी-मार्च में ही बच्चों की परीक्षाएं होनी थी इसलिए जितना मुनाफा होना चाहिए उतना नहीं हुआ। बच्चों के साथ ही उनके परिजन भी घर से फिल्म देखने नहीं निकले इसका फर्क पड़ा। फिल्म में जो घाटा हुआ था उसे पूरा करने के लिए प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में लगने वाले हाट-बाजर और मेलों में फिल्म को चलवा कर घाटे को भरने की कोशिश कर रहे थे की तालाबंदी हो गई और सब कुछ जहा था वही पर ठहर गया। अब स्थिति ऐसी हो गई की फिल्म बनाने के लिए जिनसे कर्ज लिया था वो कैसे चुकाया जाये, लेकिन जितने भी लोगों से मैने कर्जा लिया था वे सभी लोग तालाबंदी के दौरान धाडस बांधे हुए मेरा सहयोग कर रहे हैं। मेरा जमीन खरीदी बिक्री का भी काम है लेकिन वो भी बंद पड़ा हुआ है। 


तालाबंदी में सबसे भरोसेमंद सोशल मीडिया
चुकी तालाबंदी के दौरान जमीन पर तो कुछ काम कर नहीं सकते हैं, लेकिन वर्चुअल बहुत कुछ किया जा सकता है। इसलिए अपने प्रशंसकों तक फिल्म के गानो की लिंक भेजने की योजना पर काम करना शुरू किया। ऐसे वक्त में जब कोई नजदीक तक नहीं आना चाह रहा था तब सबसे करीबी और भरोसेमंद दोस्त ही काम आया, सोशल मीडिया, जिसके माध्यम से अपनी फिल्म के गानों की लिंक गांव-गांव तक लोगों के मोबाईल तक पहुंचाने लगा। कुछ दिन तक तो लोग वीडियो देख कर सिर्फ प्रसंसा ही करते थे लेकिन धीरे-धीरे लोग फिल्म में कुछ कुछ सीन दिखने की भी मांग करने लगे। अब मैं इन दिनों उसी पर काम कर रहा हूं, एक ऐसा प्लेटफार्म तैयार कर रहा हूं की छत्तीसगढ़ ही नहीं देश और देश के बहार भी लोग जहां हैं वहीं पर बैठे अपनी मनपसंद फिल्में देख सकें। 


जैसा हमारा व्यवहार दूसरों के लिए होता है बदले में भी वैसा ही वापस मिलता है
दरअसल फिल्म के प्रमोशन के दौरान पुरे राज्य भर के लगभग सभी शहरों में जाना हुआ था। इसके साथ ही जमीन वाले काम की वजह से भी गांव-गांव में काफी ज्यादा पहले से ही पहुंच बनी हुई थी, इसी का फायदा लॉकडाउन के दौरान मिला। और इसी वजह से तालाबंदी के दौरान रायपुर में फसे बहार के लोगों के लिए कई बार राशन, मास्क से लेकर रोजाना जरुरत के काम आने वाली कई तरह की सामग्रियां उपलब्ध करने का काम कर रहा हूं।