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विभागीय दायित्वों में अनियमितता बनी पदोन्नति में रोड़ा बावजूद कुर्सी पर जमे हैं रेंजर मनेंद्रगढ़

विभागीय दायित्वों में अनियमितता बनी पदोन्नति में रोड़ा बावजूद कुर्सी पर जमे हैं रेंजर मनेंद्रगढ़

पी सी सी एफ के करीबी होने के कारण अनियमितता और शिकायतों पर बिना कार्यवाही बच निकलते हैं रेंजर मनेंद्रगढ़

कोरिया मनेंद्रगढ़ - वन विभाग में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी  अगर कोई गड़बड़ी करता है तो स्थानीय स्तर पर डी एफ ओ उस पर कोई संज्ञान नहीं ले सकता है।जिसे बड़ी विसंगति भी कह सकते हैं।जबकि पहले डी एफ ओ स्तर के अधिकारियों के पास इतना अधिकार होता था कि उसका कोई भी अधीनस्थ तपका किसी प्रकार की नियम विरूद्ध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता था तो व्यवस्था ठीक करने के लिए उसके अपराध अनुसार उसे दंडित कर सकता था।और अपने कार्यक्षेत्र अंतर्गत अस्थाई तबादला भी कर सकता था।और जिससे इतना जरूर होता था कि स्थानीय व्यवस्थाओं के प्रति दायित्वों में बहुत कम लापरवाही होती थी।

अपने स्थानीय अधिकारी का डर होता था इसलिए न ज्यादा लापरवाहियां होती थी और न ही जंगल बर्बाद होते थे।परंतु आज की स्थिति में जिस तरह जंगल के छोटे स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों के अंदर से अपने डी एफ ओ का डर  खत्म हो गया है और जनाब मुख्य वन संरक्षक और प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पास ये अधिकार चला गया है या यू कहें कि ऐसी सारी बागडोर खुद रख लिए हैं।उससे स्थानीय स्तर पर हो रही गड़बड़ियां तेज़ी से बढ़ रही हैं।और कार्यवाही ना के बराबर।यहां तक की मनेंद्रगढ़ के वर्तमान रेंजर पर तत्कालीन डी एफ ओ जनक राम नायक द्वारा जो बड़ी कार्यवाही की गई थी।उसी की वज़ह से जनाब रेंजर साहब पदोन्नति नहीं पा सके शायद वहीं कार्यवाही आज इनके लिए तरक्की में बड़ी बाधा साबित हुई है।

अंदाजा लगाया जा सकता है।की रेंजर मनेंद्रगढ़ जो की पदोन्नत हुए सोनहत रेंजर अर्जुन पटनायक से काफी सीनियर होते हुए भी।पदोन्नत नहीं हो पाए जबकि पटनायक डिप्टी रेंजर से रेंजर हो चुके हैं।आप सोचिए की जिस अधिकारी पर पहले से ही जंगलों के नियमों के विरुद्ध गतिविधियों पर जोरदार लिखित कार्यवाही की जा चुकी है।उनकी रेंजर की कुर्सी अब भी सुरक्षित और बरकरार है।ये संदेह हमें भी हुआ की इसके पीछे का कारण क्या है ,जो सूत्रों से पता चला की इनका सीधा संपर्क वन विभाग के बतौर मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक रायपुर से है और जिस कारण ये और उनकी कुर्सी सलामत है।

बहरहाल हम अपने जंगल बचाव अभियान में तब तक सक्रिय रहेंगे जब तक जंगल की तबाही के इन  जिम्मेदारों पर कार्यवाही नहीं की जाती।और जंगल की हो रही तबाही पर अंकुश नहीं लगता।

ख़त्म हो रहा सागौन के तैयार वृक्षों का जंगल,,,बेसुध हैं डी एफ ओ मनेंद्रगढ़,,

मनेंद्रगढ़ वन मंडल के वन परिक्षेत्र मनेंद्रगढ़ में जो सागौन के कीमती पेड़ों और तैयार नर्सरी पर आफत का आसमान टूट रहा है।उसे समूचा जिला,वृत्त और राजधानी में बैठे अधिकारी बखूबी जान रहे हैं।

इसके बाद भी जंगल को बचाने की ना तो किसी को परवाह है और ना ही कोई पहल करना चाहता है। इन पहलुओं पर जब डी एफ ओ से बात की जाती है तो उनका जवाब होता है कि हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं।क्यू की हमारे पास कार्यवाही का कोई अधिकार नहीं है।

जो भी कर सकते हैं ऊपर के लोग।इनके वक्तव्य के बाद जब हमने एकाध बार सरगुजा वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक अनुराग श्री वास्तव को समस्या से अवगत कराया तो जनाब सी सी एफ साहब वॉट्सएप पर ब्लॉक कर दिए।मतलब जंगल के ये जिम्मेदार अधिकारी जंगल की तबाही पर चुप्पी साधकर जंगल की तबाही को मौन स्वीकृति दे चुके हैं ऐसा प्रतीत होता है।

अगली पंक्ति में जब हमने इन समस्याओं को जनाब पी सी सी एफ साहब को अवगत कराया तो उन्होंने जांच का आश्वाशन तो दिया पर अब तक ना कोई जांच हुई और ना ही पड़ताल। हम जब भी मनेंद्रगढ़ रेंज के जंगलों का दौरा किए बड़े पैमाने पर जंगलों की अवैध कटाई देखने मिली।

मनेंद्रगढ़ वन मंडल में ब्याप्त लापरवाहियों की होगी शिकायत मुख्यमंत्री से,,,

आपको बता दें की आगामी 20 तारीख को राज्य के मुखिया भूपेश बघेल का कोरिया आना लगभग तय हो चुका है।उनके इस दौरा कार्यक्रम के दौरान मनेंद्रगढ़ वन मंडल के निष्क्रिय हो चुके अधिकारियों की लापरवाही और हमारे भ्रमण के दौरान मिली अनियमितता सहित जंगलों की अवैध कटाई का कक्ष क्रमांक वार विस्तृत ब्यौरा दिया जाएगा और साथ ही।मनेंद्रगढ़ वन मंडल के तत्कालीन डी एफ ओ जे आर नायक द्वारा तत्कालीन व वर्तमान मनेंद्रगढ़ रेंजर पर कई गंभीर मामलों में कार्यवाही की गई थी।

बावजूद इसके इनका लगातार मनेंद्रगढ़ वन मंडल में बने रहना जंगलों की बड़ी तबाही का कारण बनता नजर आ रहा है।जैसे सभी पहलुओं पर ध्यानाकर्षण कराया जाएगा।