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आइए धनतेरस पर पूजन की विधि और शुभ मुहूर्त जाने

 आइए धनतेरस पर पूजन की विधि और शुभ मुहूर्त जाने

धनतेरस पर विभिन्न धातुओं से बने बर्तन, सोना, चांदी खरीदने का बड़ा महत्व होता है. साथ ही शाम के वक्त परिवार की मंगलकामना के लिए यम नाम का दीपक भी जलाया जाता है. 

धनतेरस  के दिन महालक्ष्मी के सचिव कुबेर का पूजन होता है. कुबेर के वरदान से घर में अपार धन के भंडार लग सकते हैं. इस दिन  शाम के वक्त उत्तर की ओर कुबेर और धनवंतरि की स्थापना करनी चाहिए. दोनों के सामने एक-एक मुख का घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए. भगवान कुबेर को सफेद मिठाई और धनवंतरि को पीली मिठाई को भोग लगाया जाता है. पूजा के दौरान "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें. इसके बाद "धनवंतरि स्तोत्र" का पाठ करें. पूजा के बाद दीपावली पर कुबेर को धन स्थान पर और धनवंतरि को पूजा स्थान पर स्थापित करें.

धनतेरस पर शाम 05 बजकर 28 मिनट से 08 बजकर 07 तक प्रदोष काल रहेगा. पूजा के लिए यही समय सबसे अधिक उत्तम रहेगा. पूजा की अवधि 2 घंटे 39 मिनट रहेगी. यदि आप शुभ मुहूर्त में कुछ नहीं खरीद पाए हैं तो प्रदोष काल में खरीद सकते हैं. वृषभ लग्न के लिए इस मुहूर्त में खरीदारी बहुत ही शुभ मानी जा रही है.

धनतेरस के दिन धनवंतरि का पूजन करना चाहिए. साथ ही नई झाड़ू और सूपड़ा खरीदकर उनकी पूजा करनी चाहिए. शाम के वक्त दीपक जलाकर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करना फलदायी साबित होता है. धनतेरस पर मंदिर, गोशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं.

 धनवंतरि के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं. यही कारण है कि हर बार दिवाली से दो दिन पहले ही धनतेरस मनाया जाता है.