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कोरोना हो सकता है तुम्हारा काम आसान कर दे, सब्र करो

कोरोना हो सकता है तुम्हारा काम आसान कर दे, सब्र करो

वुसतुल्लाह खान

ऐसे समय जब जीवन महंगा और मौत सस्ती ही होती जा रही है , उस समय में ख़ुद को या तुम्हें न कोई नसीहत देना चाहता हूँ, ना आदेश, ना भाषण, ना विनती, ना सलाह.

मैं ना तो तुम्हें भय की गुफा में देखना चाहता हूँ, ना किसी अच्छी ख़बर के ख़्याली तालाब में डुबकी लगवाना चाहता हूँ.

तुम इबादत में झुकना चाहते हो, भले झुको. प्रार्थना में रहना चाहते हो, रहो. सीने पर क्रॉस बनाना चाहते हो तो बना लो. किसी मनपसंद देवी-देवता, ख़ुदा, अल्लाह या किसी बेनाम ऊपर वाले को याद करना चाहते हो तो करो. मगर नहा-धोकर और पाक-साफ़ हो कर.

कहीं तुम्हारे उठे हुए, बंधे हुए, फैले हुए हाथ को वायरस न लग जाए. कहीं यह गंदा हाथ फांसी का फंदा न बन जाए. बस थोड़े ही दिनों की तो बात है. तुम अपने बच्चे कि लिए घोड़ा बनना चाहते हो तो बनो. मगर शश्श्श्शश्श.... आज नहीं.

मत पकड़ो हाथ अपने महबूब का. ठहर जाओ. हवाई बोसा (फ़्लाइंग किस) आख़िर कब काम आएगा? इशारों की ज़बान किस वक़्त के लिए इजाद हुई थी? यही तो समय है अपने प्यारों को आंखों से गले लगाने का.

ख़ाली वक़्त का फ़ायदा उठाओ, नयनों से चिट्ठी भेजना सीख लो. अपने होंठों को रोमांचक इज़हार के पास गिरवी रख दो- बस कुछ समय के लिए.

हां, इस समय तुममें से किसी का किसी को यक़ीनन क़त्ल करने का जी चाह रहा होगा. अच्छा, तो अपहरण करना चाहते हो? चोरी की योजना बना रहे हो? डाका डालने का मन है? धोखा देने की ताक में हो? किसी को नीचा दिखाने की सोच रहे हो या किसी कमजोर की ज़मीन पर कब्ज़ा करना चाहते हो?

हिंदू-मुस्लिम, शिया-सुन्नी विवाद को हवा देने के लिए फिर से बेकरार हो? बस कुछ दिन रुक जाओ. बस कुछ दिन ठहर जाओ. मेरी भले न मानो, समय की ही मान लो, इससे पहले कि वो ख़ुद को तुमसे मनवा ले.

जहां इतने दिन ठहर गए, वहां कुछ दिन और. मगर कुछ दिन ही क्यों? हो सकता है तुम जो भी करना चाहते हो, वो कोरोना तुम्हारे लिए कर दे. बढ़ा तब भी, घटा तब भी. रहा तब भी, ना रहा तब भी. बस कुछ दिन और.