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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-भाषायी नहीं उत्कृष्टता के आधार पर स्कूल खुले

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-भाषायी नहीं उत्कृष्टता के आधार पर स्कूल खुले


छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी माध्यम के स्वामी आत्मानंद विद्यालयों के प्रति बढ़ते रुझान को देखते हुए सरकार ने जिला स्तर से इनका विस्तार कर ब्लाक स्तर किया। अब विधायकों, नेताओं और अभिभाषकों की मांग पर हर उस जगह ये स्कूल खोले जा सकते हैं, जहां सरकार को यह उपयोगी लगे।
चूंकि, अंग्रेजी भाषा हमारे यहां अभिजात्य, बाजार और रोजगार की भाषा के रुप में स्वीकार है, ऐसी स्थिति में हिन्दी माध्यमों के मौजूदा स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम के आत्मानंद विद्यालयों में तब्दील किया जा रहा है लेकिन पूर्व से संचालित इन स्कूलों में जो हिन्दी माध्यम के विद्यार्थी पढ़ रहे थे उनकी हालत अपने ही स्कूल में पराये जैसी न हो जाये और इस ओर शिक्षा शास्त्रियों और नीति निर्धारकों को ध्यान देने की जरुरत है। अच्छा होता कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी हिन्दी माध्यम के स्कूल बनने की बजाय नवोदय विद्यालय केन्द्रीय विद्यालयों की तरह के उत्कृष्ट विद्यालय यानी स्कूल ऑफ एक्सीलेंस बनाये जाये। छत्तीसगढ़ के 28 जिले जिनमें 146 विकासखंड भी समाहित है, वहां अभी तक 171 इंग्लिश मीडियम आत्मानंद विद्यालय खुल चुके हैं। एक नवंबर 2020 से प्रारंभ इन स्कूलों में प्रवेश के लिए ऑनलाईन आवेदन किया जाता है। कक्षा 1 से कक्षा 12वीं तक की अध्ययन सुविधा वाले इन स्कूलों में वर्तमान में 70 प्रतिशत ऐसे छात्र पढ़ रहे हैं, जो अंग्रेजी माध्यम के अन्य विद्यालयों में पढ़ते थे। निजी स्कूलों में फीस ज्यादा होने या पढ़ाई का स्तर अच्छा नहीं होने के कारण ऐसे छात्रों का एडमिशन आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में हुआ है, इनके अलावा 30 प्रतिशत ऐसे छात्र हैं, जो उसी विद्यालय में हिन्दी माध्यम से पढ़ रहे थे। चूंकि, इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम को ध्यान में रखकर प्राचार्य आदि की भर्ती हुई है जिसके कारण उनका सारा रुझान अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों पर है। ऐसे में हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों की स्थिति उस मूल निवासी आदिवासी की तरह न हो जाए जो अपने ही घर में अपने को पराया समझें। अंग्रेजी प्रेम के अतिरेक में लोग ये भूल रहे हैं कि अकेले भाषा के बूते रोजगार नहीं मिलने वाला। उसके लिए हुनर की भी जरूरत होगी।

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उच्च शैक्षणिक वातावरण में खेल एवं कलात्मक गतिविधियों से बच्चों में उनकी रचनात्मकता-भौतिकता को नया आयाम देने सुविधायुक्त खेल मैदान, एम्फीथिएटर जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। इन उत्कृष्ट स्कूलों में गुणवत्ता हेतु जिलों को स्वायत्तता प्रदान की गई है जिससे स्कूल के प्रबंधन और शिक्षकों का चयन सावधानीपूर्वक किया जा सके।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए हमारी सरकार ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की श्रृंखला स्थापित करने का जो काम शुरू किया, पहले राज्य में 52 स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल स्थापित किए थे। बाद में 119 और स्कूल शुरू किये। स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के लिए 6 हजार 826 पदों का सृजन किया गया है। इन 119 नवीन विद्यालयों के संचालन के लिए प्रति विद्यालय के मान से 43 पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है।

अंंग्रेजी स्कूल में पढ़ाने के उत्सुक नवा रायपुर स्थित मंत्रालय कर्मचारियों ने भी नवा रायपुर में भी सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल की मांग की है। सरकारी स्कूलों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में बदलने की योजना के तहत रायपुर के तीन स्कूलों पंडित आरडी तिवारी हायर सेकेंडरी स्कूल, आमापारा, बीपी पुजारी हायर सेकेंडरी स्कूल राजातालाब और शहीद स्मारक हायर सेकेंडरी स्कूल फाफाडीह का नाम शामिल है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि शिक्षा हर समाज और देश की प्रगति का प्रतिबिम्ब है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उन परिवारों के सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया है जो कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से अपने बच्चों को महंगे अंग्रेजी निजी स्कूलों में शिक्षा दिलाने में समर्थ नहीं थे। छत्तीसगढ़ जैसे हिन्दी भाषी राज्य के छात्रों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रकार की प्रतियोगिताओं के काबिल बनाने के उद्देश्य से अंग्रेजी मीडियम में अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा देने के लिए रायपुर में जन्मे स्वामी आत्मानंद की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से उनके नाम से इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले गये हैं।  

स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में वर्तमान में इन विद्यालयों में पचास प्रतिशत सीट बालिकाओं के लिए 25 प्रतिशत सीट गरीबी रेखा से नीचे वाले विद्यार्थियों के लिए आरक्षित है। प्रवेश के लिए छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्कूल में लाटरी के आधार पर चयन सिस्टम विकसित किया गया है। शहरी, अर्धशहरीय क्षेत्रों के निजी अंग्रेजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को माता-पिता किसी भी तरह से अपने बच्चों का एडमिशन स्वामी आत्मानंद विद्यालय में करना चाहते हैं। वर्तमान में इन स्कूलों में 124601 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

स्वामी आत्मानंद विद्यालय की स्थापना के समय ऐसे हिन्दी विद्यालय जो ठीक से संचालित नहीं हो रहे थे, जहां छात्रा संख्या कम थी उन्हें सबसे पहले आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूलों में कन्वर्ट किया गया और वहां के बच्चों को पास के विद्यालय में। ऐसे में बहुत सारे विद्यार्थी जिनके लिए स्कूल की दूरी अधिक थी पढ़ाई छूटी। जो छात्र वहीं रहकर पढ़ रहे हैं, उनकी अंग्रेजी ठीक नहीं होने से उनके लिए अलग से कक्षा संचालित हो रही है। ऐसे बहुत से विद्यार्थियों को लायब्रेरी, लैब आदि की सुविधा से वंचित रखकर मुख्यधारा से हटकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। चूंकि, स्वामी आत्मानंद विद्यालय का संचालन अनुदान प्राप्त विद्यालयों की समिति के अनुसार हो रहा है। ऐसे में उन्हे नियुक्ति आदि में आरक्षण रोस्टर का उस तरह से पालन नहीं करना पड़ रहा है जैसा कि जिला और राज्य स्तर पर आरक्षण रोस्टर पालन के लिए करना पड़ता है। अलग-अलग स्कूलों और समितियों द्वारा विज्ञापित पदों के लिए एक ही व्यक्ति कई जगह आवेदन कर चयनित भी हो रहा है। जिसके कारण बार-बार पदों को विज्ञापित करना पड़ रहा है। आत्मानंद विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर, सरगुजा और कोरबा जिले में स्थानीयता की शर्त को शिथिल किया है ताकि यहां पद भर सकें। स्वामी आत्मानंद विद्यालय के लिए सेटअप में 43 पदों की स्वीकृति दी गई। सरकार ने बिना किसी नये पदों और भवनों की स्वीकृति दिए ही पुराने स्कूल और हिन्दी विद्यालय के सेटअप में स्वीकृत पदों को दी। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल के पद संरचना में शामिल कर दिया है। हर स्कूल के लिए  चयनित होकर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया था। स्वामी आत्मानंद आजीवन जनकल्याण के कार्यों में लगे रहे और पीडि़त मानवता की सेवा का संदेश दिया।
प्रसंगवश -
शिक्षा हुई समय की दासी, विधा सागर भी नहीं बन पा रहा है चपरासी।