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रामरक्षित को मिला बुढ़ापे में सुरक्षित आशियाना, पक्के मकान पाकर ग्रामीणों के चेहरे आई मुस्कान

रामरक्षित को मिला बुढ़ापे में सुरक्षित आशियाना, पक्के मकान पाकर  ग्रामीणों के चेहरे आई मुस्कान


 प्रधानमंत्री आवास योजना से जिले में  अब तक 60 हजार 582 परिवारों को मिला आशियाना

जांजगीर-चांपा,30 दिसंबर।  हर किसी की चाहत होती है कि वे अपने पक्के मकान में रहे और इसी तमन्ना के साथ वे कोशिश करते हैं, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए यह सपना सभी का साकार नहीं हो पाता है। एक ओर गरीबी तो दूसरी ओर परिवार के पालन-पोषण की जद्दोजहद में मकान बनाने का सपना, सपना  ही बनकर रह जाता है, लेकिन ऐसे वंचित ग्रामीण परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से उन्हें पक्के मकान बनाकर देने से उनके जीवन में भी मुस्कान आ जाती है।  

 जिले में योजना प्रारंभ वर्ष 2016-17 से लेकर वर्ष 2020-21 तक 82 हजार 203 आवास स्वीकृत किए गए, जिसमें से 60 हजार 582 मकानों को पूर्ण कर हितग्राहियों को आबंटित कर दिया गया है। इन आवासों में हितग्राहियों ने रहना शुरू कर दिया है। योजना के तहत हितग्राहियों को चार किश्तों में राशि का भुगतान किया जा रहा है। जिसमें हितग्राही को प्रथम किश्त 25 हजार, द्वितीय एवं तृतीय किश्त 40 हजार, चतुर्थ किश्त के रूप में 15 हजार का भुगतान उनके खातों में किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें 90 दिवस की मजूदरी का भुगतान महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से हो रहा है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 12 हजार रूपए की राशि शौचालय निर्माण के लिए दी जा रही है। इस साल यानी वर्ष 2020-21 में 9000 मकानों का लक्ष्य मिला है।


रामरक्षित को मिला बुढापे में सहारा

अकलतरा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चंगोरी में रहने वाले रामरक्षित को वर्ष 2019-20 में मकान को स्वीकृत करने के बाद उसे तैयार किया गया। रामरक्षित के लिए पक्का मकान बुढ़ापे का सहारा बन गया। वे बताते हैं कि पहले कच्चे मकान में रहना पड़ता था, जिससे बारिश के दिनों में हमेशा की पानी भरने से दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन जब से पीएम आवास योजना से पक्का मकान मिला है, जिंदगी खुशहाल हो गई है। 1 लाख 20 हजार की राशि योजना से एवं महात्मा गांधी नरेगा से 90 दिन का रोजगार भी दिया गया।

खुशी में छलक आए आंसू

ग्राम पंचायत चंगोरी के ही लखेश्वर धनुवार कहते है कि मकान बनाने के लिए सारी जिंदगी पैसा जमा करते तब भी इतनी राशि जमा कर पाना मुश्किल था, ऐसे में योजना से जब मकान की स्वीकृति मिली तो आंखों में खुशी के आंसू छलक आए, उम्मीदों को पंख मिले और धीरे-धीरे पक्का मकान बन गया। आज पूरे परिवार के साथ खुशी से रहते हैं।

चिंता से मिली मुक्ति

जनपद पंचायत बम्हनीडीह के ग्राम पंचायत बम्हनीडीह के भरतलाल सतनामी बताते हैं जब भी बारिश होती या बादल छाते तो कच्चे मकान में पानी के टपकने का डर सताता रहता। ठंड आने पर खप्पर से ठंडी-ठंडी हवा कंपकंपा देती थी, लेकिन जब आवास योजना से पक्का मकान मिला तो न अब बारिश के पानी के गिरने का डर और न ही ठंड में कंपकपाने की चिंता।