कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः मोड़ है ऐसा छोड़ दे पीछे

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः मोड़ है ऐसा छोड़ दे पीछे


बाज़ार ऊपर

दबा वो नीचे

कहे न कुछ भी

वो आँखें मींचे

कहीं भी जाये

वो रहे पीछे


जहाँ भी जाये

होड़ है पीछे

लाख वो जोड़े

तोड़ है पीछे

वो है अकेला

गठजोड़ है पीछे

राह न सूझे

दौड़ है पीछे

मोड़ है ऐसा

छोड़ दे पीछे


वो गिरता गड्ढे में

कोई हाथ बढ़ा न खींचे

फिर भी गाता रहता है 

आज मैं ऊपर आसमाँ नीचे

आज मैं आगे ज़माना है पीछे