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दलालों , ठेकेदारों और अफसरों का चरागाह बना हुआ है जलसंसाधन विभाग

दलालों , ठेकेदारों और अफसरों का चरागाह बना हुआ है  जलसंसाधन विभाग

जगदलपुर । लाईट मशीनरी ट्यूबबेल एवं गेट विभाग नाम सुनकर चौंके मत । ये विभाग जलसंसाधन विभाग की शाखा है । यह विभाग नेताओं उनके चमचों कुछ दलालों , ठेकेदारों और अफसरों का चरागाह बना हुआ है । दंतेवाड़ा से लेकर कांकेर तक लगभग सभी जिलों में डीएमएफ और अन्य राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत इस विभाग को सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार करने के लिए करोड़ों रुपए के नलकूप खनन के लिए क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया है ।

इस विभाग के जगदलपुर के एक छोटे से दफ्तर में आधा दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों के भरोसे संभाग भर में पचास करोड़से भी अधिक के कार्य हर साल किए जा रहे हैं ।

लोगों को इस विभाग और इसके कारनामों की खबर ही नहीं है । इस विभाग के माध्यम से संभाग स्तर पर कथित रूप से बोर खनन और आज भी हो रहे हैं और वो भी सिर्फ कागजों में । उदाहरण के तौर पर दंतेवाड़ा वासियों की प्यास बुझाने के लिए करीब 120 बोर का खनन इस विभाग को करवाना था । जिले में 120 हैंडपंप लगने थे ।

इन पंपों को लगाने का ठेका भूपेंद्र सिंह को दिया गया । विभागीय सूत्रों का कहना है कि महज 25 से 30 बोर ही पूरी तरह से पूर्ण किए गए है । पैसा हैंडपंपों का 80 प्रतिशत पार हो चुका है । एक करोड़ 52 लाख रुपए के चेक कट जाने की बात खुद अधिकारी कह रहे हैं । इस रकम के पास होने के बाद ठेकेदार ने अधिकारी से संवाद करना ही बंद कर दिया है ।

इतना ही नहीं अब अधिकारी फोन लगाता है तो रिसीव तक नहीं कर रहा है । लोग तो अब कह रहे हैं कि पानी का पैसा पानी में नहीं गया ठेकेदार पी गया और अधिकारियों ने भी पैसे से अपनी प्यास बुझाई ।

राजनैतिक दबाव में हुआ भ्रष्टाचार 

लाईट मशीनरी ट्यूबबेल एवं गेट विभाग से राजनैतिक दबाव के चलते यह ठेका भूपेंद्र सिंह को मिला । लोगों का कहना है कि भूपेंद्र सिंह के पास नलकूप खनन से जुड़ा कोई उपकरण ही नहीं है । बड़ा सवाल है कि विभाग ने किस मापदंड के आधार पर इतना बड़ा टेंडर उसे दे दिया । इस पर पड़ताल करने पर पता चला कि एक कांग्रेसी नेत्री के हस्तक्षेप करने पर नियमों को दरकिनार कर दिया गया । इस महिला के पद पर भी कई बार सवाल खड़े हुए है ।

विवादों में रहने वाली इसी नेत्री के इशारे पर बड़े भ्रष्टाचार की नींव रखी गई । एक करोड़ 92 लाख की लागत से 120 हैंड पंप लगाए जाने थे । ये अभी पूरे खोदे ही नहीं गए है । 80 प्रतिशत पैसा भी ठेकेदार का पास हो . चुका है । रौबदार इतना है ठेकेदार की चाह कर भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं.

पंचायत में बोर खनन अधूरे , हैंडपंप भी नहीं लगे 

कारली पंचायत में ही पांच बोर का खनन हुआ है । इन पांचों में हैंडपंप नहीं लगया गया । ग्रमीणों की पानी की समस्या को लेकर हालत जस के तस बने हुए हैं । उन्हें मौजूदा तपते समय में पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है । बोर खनन हुआ है , तो आस जरूर जागी है कि हैंडपंप जरूर लग जाएगा । लक्ष्मीनाथ यादव , निवासी मांझापाराबोर खनन हो गया , हैंडपंप नहीं लगा 

कारली में पानी की समस्या को लेकर कलेक्टोरेट में पंचायत की ओर से आवेदन दिया गया था । इसी आवेदन के तहत पटेलपारा में बोर का खनन हुआ है । बोर खनन तो हो गया , लेकिन हैंडपंप अभी तक नही लगा है । दो माह से अधिक समय बीत चुका है । पानी लोगों को 500 मीटर से अधिक दूरी से ढोना पड़ रहा है । जीतू भवानी , निवासी पटेलपारा

 दंतेवाड़ा जिले में 120 बोर करने का ठेका भूपेंद्र सिंह को दिया गया । था । एक करोड़ 92 लाख रुपए की लागात से खनन किए जाने थे । 80 प्रतिशत पैसा विभाग से किया जा चुका है ।

यह रकम एक करोड़ 50 लाख से अधिक है । अभी तक हैंडपंप लगने का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है । महज 30 से 35 बोर के पूर्ण होने की ही रिपोर्ट विभाग के पास है । अब ठेकेदार को फोन लगाओ तो वह फोन रिसीव नहीं कर रहा है ।

फिलहाल अभी समय है । समय समाप्त होने के बाद रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी । राकेश कर्मा , एसडीओ लाइट मशीनरी ट्यूबवेल एवं गेट , जगदलपुर

संभाग भर में हुआ है करोड़ों का घोटाला 

जगदलपुर के एक ठेकेदार द्वारा संभाग भर में बीते तीन सालों में 100 करोड़ से भी ज्यादा के काम इस विभाग के माध्यम से किए गए हैं । इस ठेकेदार द्वारा कई फर्जी फर्मों खड़ी की गई हैं जिनकी आड़ में काम बटोरे जा रहे हैं ।

खुद को सांसद का करीबी बताने वाले इस ठेकेदार की इतनी दहशत है की अधिकारी असफल हुए नलकूपों के बिलों का भुगतान भी इसे कर रहे हैं ।

बस्तर के दरभा , बास्तनार और लोहंडीगुड़ा में तो तीन साल पहले के नलकूपों को भी वर्तमान का बताते हुए करोड़ों के वारे न्यारे हो चुके हैं जिनका खुलासा होना अभी बाकी है । 

जल समस्या निवारण में आए आवेदनों के आधार पर स्वीकृत किए गए कार्य 

जल समस्या निवारण शिविरों में जितने आवेदन आए थे , उन आवेदनों के आधार पर बोर किए जाने थे । पूरे संभाग का एक डिविजन बनाया गया है । लाईट मशीनरी ट्यूबवेल एवं गेट विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है । एक एसडीओ पूरे संभाग को संभालने जगदलपुर में पदस्थ है ।

जिले की ही नहीं संभाग भर में जल संकट का निराकरण करने के लिए इस विभाग को जिम्मेदारी दी गई है ।

• दंतेवाड़ा , बीजापुर , सुकमा कांकेर और जगदलपुर में इसी तरह से बड़ा चार किया गया है । जनता की तो प्यास नहीं बुझी , लेकिन अधिकारी और ठेकेदार आर्थिक रुप से पूरी तरह तृप्त हो चुके हैं ।