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म्यांमार में हिंसा के खिलाफ है भारत, राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का अनुरोध

म्यांमार में हिंसा के खिलाफ है भारत, राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का अनुरोध

म्यांमार से लेकर पाकिस्तान तक स्पष्ट की स्थिति
नई दिल्ली । म्यांमार में तख्तापलट के बाद बने हालात को लेकर मंत्रालय ने कहा कि हम किसी भी तरह की हिंसा की निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि कानून का शासन होना चाहिए। हमने राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का अनुरोध किया है और आसियान के माध्यम से वर्तमान स्थिति का हल ढूंढने के लिए हर प्रयास को समर्थन दिया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम संतुलित और रचनात्मक भूमिका निभाने के प्रयास में अपने अंतरराष्ट्रीय वार्ताकारों और यूएनएससी के साथ इस मुद्दे पर लगे हुए हैं। वहीं, म्यांमार से लोगों के सीमा पार कर भारत में आने के मामले पर अरिंदम बागची ने कहा कि हम इस पर अपने नियमों और मानवाधिकारों के मुताबिक काम कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान की ओर से बुधवार को भारत से सीमित व्यापार बहाली की बात कहने और अगले ही दिन पलट जाने पर बागची ने कहा कि यह सवाल हमसे नहीं पूछा जाना चाहिए।
इस सवाल पर कि क्या ताजिकिस्तान में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और उनके पाकिस्तानी समकक्ष के बीच कोई बात हुई थी, बागची ने कहा कि मुझे वहां पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के होने की जानकारी नहीं है।
वैक्सीन निर्यात पर  प्रतिबंध नहीं
वहीं, अन्य देशों को कोरोना वायरस के टीके की आपूर्ति को लेकर बागची ने बताया कि भारत ने अभी तक पूरी दुनिया में 80 से अधिक देशों को वैक्सीन की खुराकें पहुंचाई हैं। उन्होंने साफ किया कि भारत सरकार ने कोविड-19 वैक्सीन के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। इसके साथ ही अमेरिका के विदेश विभाग की मानवाधिकारों पर रिपोर्ट में भारत के उल्लेख पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह पूरी तरह से अमेरिका का आंतरिक अभ्यास है। हम इसमें सहभागी नहीं हैं। ऐसे मामलों में भारत में हो रही घटनाओं की पूरी समझ होनी चाहिए।
जलवायु सम्मेलन के लिए पीएम मोदी को न्योता
बागची ने बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने 22 और 23 अप्रैल को वर्चुअल माध्यम से आयोजित होने वाले जलवायु सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बाइडन का न्योता स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु के लिए अमेरिका के विशेष राष्ट्रपति दूत जॉन कैरी पांच से आठ अप्रैल को दिल्ली का दौरा करेंगे। इसके साथ ही मंत्रालय ने बताया कि जिनेवा में हमारे स्थायी मिशन ने सिख फॉर जस्टिस नामक समूह की गतिविधियों के बारे में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के कार्यालय को जानकारी दी है।