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“ बेकार को आकार ” दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन

“ बेकार को आकार ” दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन

झांसी।  उत्तर प्रदेश के झांसी में घर की बेकार चीजों का इस्तेमाल कर थोडे सी कलात्मकता का इस्तेमाल कर आकर्षक बना दोबारा इस्तेमाल में लाने की मुहिम चला रही नीलम सारंगी ने दीपावली के आगमन के देखते हुए लोगों को इस ओर जागरूक करने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जिसका रविवार को समापन हुआ।

यहां राजकीय संग्रहालय में आयोजित दो दिवसीय इस कार्यशाला में लगभग 30 लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान श्रीमती सारंगी ने चीजों को कबाड़ समझकर फेंकने की जगह थोडे से प्रयत्न से फिर से इस्तेमाल में लाने लायक बनाने के बारे में लोगों को जानकारी दी। बेकार को आकार की कॉर्डिनेटर नीलम सारंगी ने बताया कि दो दिनो मे लोगों को पुराने सूखे पेड़ो से कलात्मक वस्तुॅए, काँच की बोतल से नाइट लैम्प ,पुरानी जीन्स का प्रयोग, टायर से कुर्सी , सेंटर टेबल बनाना सिखाने के साथ साथ कांच की बोतल में छेद करना, टायर में जूट की डोरी से बुनाई का काम भी सिखाया गया। नीलम सारंगी ने अपने पाॅच वर्षों की बेकार को आकार का सफर पीपीटी के द्वारा प्रस्तुत किया ।

उमा पारशर ( वीथिका सहायक, संग्रहालय) ने लोगों को संदेश दिया कि आप लोग ज्यादा से ज्यादा बेकार चीजों का इस्तेमाल करे इससे न सिर्फ स्वच्छता अभियान की मुहिम को बल मिलेगा अपितु कबाड़ की चीजों को बेहतर ढंग से प्रयोग भी किया जा सकता है । कार्यक्रम का समापन इंजी. जगदीश लाल जी की उपस्थिति में किया गया ।

कार्यशाला में राजेंद्र कुमार स्कैप आर्टिस्ट, अनिल कुशवाहा , हेमंत कुमार (परमार्थ),नीरज सिंह,दीपांकर सारंगी आदि उपस्थित रहे।