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71 वर्ष की परंपरा टूटी, विवादों के बीच रावण दहन

71 वर्ष की परंपरा टूटी, विवादों के बीच रावण दहन

रायपुर, 26 अक्टूबर।  कोरोना काल के कारण इस बार विजयादशमी यानि दशहरा पर्व पर लोगों का उत्‍साह कम ही रहा। संक्रमण काल में दिशानिर्देशों और कोरोना के डर से लोगों ने औपचारिकता ही निभाई। शहरी और ग्रामीण अंचलों में भी रावण के पुतलों का दहन कार्यक्रम औपचारिक बनकर रह गया।  रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई ग्राउंड में इस साल 72वां दशहरा महोत्सव मनाया जाना था लेकिन कोरोना काल के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। 

मालूम हो कि पिछले 71 सालों से यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाता रहा है। मैदान में ही एक स्टेज बना कर रामलीला मंडली द्वारा प्रस्तुति द्वारा रामलीला की होती रही है। इस अवसर पर आतिशबाजी को लेकर भी खास इंतजाम किए जाते रहे हैं। 71 सालों में इस आयोजन में बड़ी- बड़ी राजनीतिक हस्तियां शामिल हुई है। पिछले वर्ष की बात करें तो दशहरा की इस आयोजन में दोपहर से ही आम जनता की भीड़ इकट्ठी होने लगती थी और शाम होते तक हजारों की भीड़ में तब्दील हो जाती थी।


बीटीआई ग्राउंड में रावण दहन हो लेकर विवाद की स्थिति बनी वहां पुरानी समिति ने तो प्रशासन की बात मान कर आयोजन नहीं कर रही थी परंतु नई समिति द्वारा बीटीआई ग्राउंड में रावण दहन के लिए विधायक और महापौर के उपस्थिति में भूमि पूजन भी करवाया और मैदान में स्टेज भी बन गया। लेकिन फिर पुरानी समिति के आपत्ति लेने के बाद प्रशासन के बड़े अधिकारी वहाँ पहुंचे और यहाँ तय हुआ कि वहां आम जनता की भीड़ न उमड़ पड़े इसलिए रावण दहन नहीं किया जाएगा। लेकिन शाम होते तक यहां प्रशासन ने बीटीआई ग्राउंड में आयोजन होने नहीं दिया। आखिकार नई समिति ने यह तय किया कि समिति के अध्यक्ष के निवास के सामने रावण दहन किया जाएगा और ऐसा ही हुआ।