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दुखद : वरिष्ठ संपादक ललित सुरजन का निधन, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, नही रहा पत्रकारिता का लालित्य,

दुखद : वरिष्ठ संपादक ललित सुरजन का निधन, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, नही रहा पत्रकारिता का लालित्य,

रायपुर. छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता का एक और सूर्य आज अस्त हो गया. प्रगतिशील विचारक, लेखक, कवि और देशबंधु के प्रधान संपादक ललित सुरजन का कल नई दिल्ली स्थित एक अस्पताल में निधन हो गया. उनका काफी दिनों से इलाज चल रहा था लेकिन कल उन्होंने अंतिम सांसें लीं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्यपाल सुश्री अनुसूइया उइके, जनसंपर्क आयुक्त, आईएएस तारण प्रकाश सिन्हा व दैनिक आज की जनधारा के प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ने उनके निधन पर दु:ख जताते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है.

पत्रकारिता के आधारस्तंभ थे सुरजन : राज्यपाल

राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने श्री सुरजन के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है. राज्यपाल ने अपने शोक संदेश में कहा कि श्री सुरजन का देश-प्रदेश की पत्रकारिता और साहित्य जगत में महत्वपूर्ण योगदान था. उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के निचले तबकों और शोषितों की आवाज उठाई और उन्हें उचित मंचों पर रखकर न्याय दिलाने का प्रयास करते रहे. उनके निधन से देश की पत्रकारिता एवं साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है. उन्होंने प्रदेश में पत्रकारिता की अलख जगाई. वे देश और प्रदेश के पत्रकारिता के आधारस्तंभ थे.

मेरा मार्गदर्शन करते थे ललित भैया : भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने शोक संदेश में कहा है कि ललित सुरजन के निधन की सूचना ने स्तब्ध कर दिया है. आज छत्तीसगढ़ ने अपना एक सपूत खो दिया. सांप्रदायिकता और कूपमंडूकता के खिलाफ देशबंधु के माध्यम से जो लौ मायाराम सुरजन ने जलाई थी, उसे ललित भैया ने बखूबी आगे बढ़ाया. पूरी जिंदगी उन्होंने मूल्यों को लेकर कोई समझौता नहीं किया. मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को संबल देने की प्रार्थना करता हूं.

श्री बघेल ने कहा कि ललित भैया को मैं छात्र जीवन से ही जानता था और राजनीति में आने के बाद समय-समय पर मार्गदर्शन लेता रहता था. वे राजनीति पर पैनी नजर रखते थे और लोकतंत्र में उनकी गहरी आस्था थी. नेहरू के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा मुझे बहुत प्रेरित करती थी. उनके नेतृत्व में देशबंधु ने दर्जनों ऐसे पत्रकार दिए हैं, जिन पर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों को गर्व हो सकता है.

उनकी मुस्कान सबको अपना बना लेती थी : सुभाष मिश्र

दैनिक आज की जनधारा के प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ने श्री सुरजन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ललित सुरजनजी का अचानक यूं छोड़कर जाना दु:खी कर गया. वे ताउम्र प्रगतिशील प्रतिबद्ध विचारक रहे. उनकी कलम का ही असर था कि देशबंधु एक वैचारिक संस्थान में तब्दील हो गया था. निधन के दो दिन पहले तक वे सोशल मीडिया पर लिखते रहे और एक कविता भी पोस्ट की. उन्होंने देशबंधु—चौथा खंभा बनने से इंकार' सीरिज के तहत 25 सीरिज में अपने संस्मरण लिखे जो फेसबुक पर पढ़े जा सकते हैं. ललित जी सभी से स्नेह रखते थे. उनकी मुस्कान सबको अपना बना लेती थी. उनके विचार हमेशा हम सबका मार्गदर्शन करते रहेंगे. 

जनसंपर्क आयुक्त, आईएएस तारण प्रकाश सिन्हा, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रूचिर गर्ग, राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा, संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी ने भी ललित सुरजन के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए श्रदधांजलि व्यक्त की. जनधारा परिवार उनके निधन पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त करता है.