breaking news New

क्षतिग्रस्त इन्द्रावती पुल का पुनः निर्माण में महीनों विलम्भ,NHAI व राष्ट्रीय राज्य मार्ग विभाग की उदासीनता का परिचायक-मुक्तिमोर्चा

क्षतिग्रस्त इन्द्रावती पुल का पुनः निर्माण में महीनों विलम्भ,NHAI व राष्ट्रीय राज्य मार्ग विभाग की उदासीनता का परिचायक-मुक्तिमोर्चा


जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक उदासीनता के चलते क्षतिग्रस्त पुल से जान जोखिम में डाल ,राहगीर चलने को मजबूर, जिमेदार रिपोर्ट भेज मस्त क्यों?-नवनीत

जगदलपुर, 25 मार्च। बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के सयोंजक नवनीत चाँद ने बयान जारी करते हुए कहा कि,बस्तर से रायपुर को जोड़ने वाला एक  मात्र वैकल्पिक मार्ग NH30 पर जगदलपुर शहर को जोड़ने वाला इंद्रावती पुल ,विगत कई माह से क्षतिग्रस्त होने के बावजूद जिमेदार NHAIव राष्ट्रीय राज्य मार्ग विभागो द्वारा अपने उदासीन रवैया के चलते, अपने पुनः निर्माण की बाट जोह रहा है। ज्ञात हो की सन 1980 के लगभग इस पुल का निर्माण तत्कालील सरकार द्वारा इन्द्रावती नदी पर बस्तर के लोगो के शुलभ आवागमन हेतु  किया गया था। वर्ष 2020के नवम्बर माह में अचानक पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। इस घटना से पूरा बस्तर स्तब्ध है। क्योंकि राज्य की राजधानी रायपुर से  बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर को जोड़ने वाली यह एक मात्र सड़क है।जिस पर निर्मित इंद्रावती पुल स्थापित है। जिसके एक हिस्से के जबदस्त क्षतिग्रस्त हो जाने से इस पुल से गुजरने वाले राहगीरों को जान जोखिम में डाल कर चलना पड़ रहा है। 

पुल क्षतिग्रस्त परिस्थितियों के चलते जनता को हो रही परेशानी से जिमेदार NHAI व राष्ट्रीय राज्य मार्ग के विभागीय अधिकारियों को कोई वास्ता नहीं, विभाग द्वारा इस पुल के पुनः मरम्मत व नव निर्माण हेतु रिपोर्ट तैयार कर, एक दूसरे पर जिमेदारी  डाली जा रही है। इस सब पर कई माह गुजरने के वावजूद, बस्तर के जिमेदार जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक आला अधिकारियों द्वारा NHAI को पत्र लिख अपनी जिमेदारी निर्वहन की खाना पूर्ति रस्म अदायकी निभाई जा रही है।जो बस्तर के निवाशियो को प्राप्त सुविधाओं के अधिकार का हनन है। इस पूरे सरकारी गैर जिमेदारी भरे कृत्य का बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा कड़ी निंदा करता है। व केंद्र सरकार के उपक्रम NHAI व राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग,स्थानीय जनप्रतिनिधियों व सम्भागीय प्रशासन से यह अपील करता है। कि इंद्रावती पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल प्रभाव से मरम्मत कार्य प्रारम्भ किया जाए, अन्यथा बस्तर वाशियों द्वारा क्षतिग्रस्त पुल के समीप धरना प्रदर्शन करने हेतु मजबूर होना पड़ेगा। 

जिसकी सम्पूर्ण जिमेदारी जिमेदार विभागीय अधिकारियों ,स्थानीय जनप्रतिनिधियों व जिला प्रशासन की होगी। ज्ञात हो की 4 लेन सड़क निर्माण के नाम पर राष्ट्रीय राज्य मार्ग विभाग द्वारा बस्तरवाशियो की लाइफ लाइन एक्प्रेस सड़क NH30 को बस्तर जनप्रतिनिधियों व सर्व समाज व संघटनो को बिना पूछे ,5 वी अनुसूची के अंतर्गत बस्तर के निवाशियो को प्राप्त अधिकारों को दरकिनार  कर ,30 पूर्व व 15 नई कुल 45मीटर जमीन अधिग्रहण कर ,पुरानी 30 मीटर अधिग्रहित जमीन पर सड़क  7 से 11 मीटर नव निर्माण कर पुनः 2लेन सड़क बनाई गई है।  4 लेन सड़क का वादा कर जमीन अधिग्रहण कर पुनः 2 लेन सड़क निर्माण वास्तविक रूप से राज्य व केन्द्र सरकारो का बस्तर के साथ विसवासघात है। जिसका सम्पूर्ण बस्तर विरोध करता है। व आगामी दिनों में अपने अधिकारों के हनन  व  हो रहे अन्याय के खिलाफ आंदोलन हेतु बाध्य होगा।